शिवपुरी। प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव से बेहतरीन कार्य के लिए पुरस्कृत हो चुके मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय ऋषिश्वर मंगलवार को सुर्खियों में छाए रहे। उन्हें विभाग ने एक ऐसे मामले में निलंबित कर दिया जिसमें वे न सीधे दोषी हैं न मामला उनके समय का है लेकिन पदीय दायित्व जिले का उनके पास है इसलिए गाज उन्हीं पर गिर गई है। दरअसल किसी एक कर्मचारी की नियुक्ति के बाद पेंशन के निर्धारण को लेकर साल 2018 के बाद कोर्ट में उक्त कर्मचारी में बाद दायर किया। सुनवाई हुई और शासन की ओर से पैरवी जिस वकील ने की वह बाद में उक्त शासकीय अधिवक्ता पद से निवृत हो गए लेकिन सुनवाई जारी रही और तब विभागीय लापरवाही से शिवपुरी से संबंधित उक्त प्रकरण में विमर्श ऊपर यानि भोपाल किया जाता रहा, बात यहां तक आ गई कि वरिष्ठ अधिकारी उक्त मामले में तलब कर लिए गए, लेकिन शिवपुरी में इस बात की भनक चंद रोज पहले लगी जब तक देर हो चुकी थी और नतीजे में जो बगुला शिकार के लिए ताक लगाए बैठे थे उन्होंने तरकश से तीर छोड़ा जो सटीक निशाने पर लगा, ये हम इसलिए कह सकते है कि अगर कुछ माह पहले उक्त कार्रवाई होती तो न सिर्फ कलेक्टर बल्कि उच्च अधिकारी भी डॉ संजय ऋषिश्वर की बेहतरीन कार्यशैली के फैन थे जो सजा तो देते शायद लेकिन निलंबन की नहीं। खैर देख दिननं के फेर...काठ की हांडी अधिक देर नहीं चढ़ती!
कोरोना में जान की परवाह छोड़ बचाई सैकड़ों जान
जब दुनिया में रिश्ते तार तार हुए। सगे भी साथ छोड़ बैठे थे ऐसे में डॉ संजय ऋषिश्वर और उनके छोटे भाई डॉ राजकुमार ऋषिश्वर ने शिवपुरी जिले में कोरोना में सैकड़ों जान बचाई। कर्तव्य के प्रति सदैव सजग डॉ संजय एक ईमानदार पिता डॉ एमएस ऋषिश्वर के सुपुत्र हैं। लोग चाहे कुछ कहें लेकिन जो उन्हें करीब से जानते है वे हमारी बात समझ हुए होंगे। वैसे हम यही कहेंगे बुरा वक्त भी सबक देने के लिए आता है, अपने और पराए सामने हो जाते हैं। वैसे हम यही कहेंगे। "पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना मैं समुंदर हु लौटकर आऊंगा।"



















































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