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#धमाका_धर्म: श्री बांके बिहारी सेवा समिति का 9 वा विशाल भंडारा 30, 31 मार्च को दौलतराम रयात चैरिटेबल ट्रस्ट गोवर्धन मथुरा में

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शिवपुरी। श्री बांके बिहारी सेवा समिति का 9 वा विशाल भंडारा 30, 31 मार्च 2026 को  दौलतराम रयात चैरिटेबल ट्रस्ट गोवर्धन मथुरा में आयोजित किया जाएगा। आज इसे लेकर एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें समिति के सभी सदस्य शामिल हुए। 

#धमाका_धर्म: धूमधाम से निकाली चुनरी यात्रा, मां बलारी पर चढ़ाई 200 मीटर लंबी चुनरी, पार्षद एमडी भैया, कल्ला गुर्जर पिपरौनिया के नेतृत्व में निकली चुनरी यात्रा देखिए reel

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शिवपुरी। दूर दराज तक प्रसिद्ध मां बलारी पर 200 मीटर की चुनरी चढ़ाई गई। चुनरी यात्रा कोयला कॉलोनी पिपरौनिया से समस्त ग्रामीण वासियों के सहयोग से निकाली गई। नगर से निकली चुनरी यात्रा मां बलारी माता  बलारपुर पर बड़ी धूमधाम से संपन्न हुई। समस्त ग्रामवासी समस्त सर्व समाज मैया की चुनरी यात्रा में शामिल हुए।
ये चुनरी यात्रा युवा पार्षद एमडी भैया नगर पालिका शिवपुरी, कल्ला गुर्जर पिपरौनिया दोनों के नेतृत्व में संपन्न हुई। जिसमें लखन आदिवासी, बालकिशन आदिवासी, पुनना आदिवासी, रतिराम आदिवासी एवं समस्त ग्रामीण वासियों के सहयोग से संपन्न हुई। 
युवा पार्षद एमडी भैया ने बताया है कि मैया की चुनरी यात्रा अब हर वर्ष इसी भांति और  भव्य तरीके से ग्रामीणों के सहयोग से मेरे नेतृत्व में निकाली जाएगी। 












#धमाका_अच्छी_खबर: नरेश शर्मा एवं अनुज शर्मा नगर अध्यक्ष, भाजपा युवा मोर्चा शिवपुरी के नवीन प्रतिष्ठान “THE PIGEON EXCLUSIVE STORE” का भव्य शुभारंभ 23 जनवरी 2026 को 1 बजे कमलागंज में

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शिवपुरी। शहर की थीम रोड स्थित कमलागंज सब्जी मंडी के पास नरेश शर्मा एवं अनुज शर्मा नगर अध्यक्ष, भाजपा युवा मोर्चा शिवपुरी के नवीन प्रतिष्ठान “THE PIGEON EXCLUSIVE STORE” का भव्य शुभारंभ दिनांक 23 जनवरी 2026 को होने जा रहा है, जिसमें आपकी उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है। समय दोपहर 1:00 बजे स्थान कमलागंज सब्जी मंडी के पास, शिवपुरी (म प्र)













#धमाका धर्म: तीर्थोदय गोलाकोट के जन्म कल्याणक में सौधर्म इन्द्र ने 1008 कलशों से किया बाल तीर्थंकर ऋषभ कुमार का जन्माभिषेक

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*तीर्थोदय गोलाकोट में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
* शुक्रवार को मनाया जाएगा दीक्षा कल्याणक
खनियांधाना। जैन अतिशय क्षेत्र गोलाकोट जी पर चल रहे पंचकल्याणक महा महोत्सव के तीसरे दिन आज प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का जन्म कल्याणक धूमधाम एवं हर्षौल्लास पूर्वक मनाया गया। आज जन्म कल्याण के अवसर पर देश के विभिन्न नगरों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पधारे जिन्होंने मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज के मंगल प्रवचनों का लाभ लिया और जन्म कल्याण के अवसर पर विशाल शोभा यात्रा में शामिल हुए ।
प्रातः काल से ही इन्द्र इंद्राणियों द्वारा भगवान की पूजन अर्चना की गई तत्पश्चात राजा नाभिराय का राज दरबार लगा जिसमें माता मरुदेवी की कोख से बाल तीर्थंकर ऋषभदेव के जन्म का समाचार प्राप्त होते ही पूरे पंडाल में खुशी की लहर दौड़ गई तथा भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि लगभग 175×300 स्क्वायर फीट में बना बनाया गया पंडाल भी छोटा प्रतीत होने लगा ।
इसके बाद मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के मंगल प्रवचनों का लाभ उपस्थित श्रद्धालुओं को मिला। इस अवसर पर पहाड़ी के ऊपर गोलाकोट क्षेत्र में राजधानी बेसन परिवार द्वारा विशाल 100 कमरों का छात्रावास बनाने की घोषणा की गई जिसमें आगामी समय में 200 से अधिक बच्चे रहकर धार्मिक शिक्षा अध्ययन करेंगे तथा प्राचीन गुरुकुलों जैसा माहौल निर्मित होगा ।
जन्म कल्याण के अवसर पर सौधर्म एवं शची इंद्राणी अयोध्या नगरी पहुंचे तथा शची इंद्राणी ने माता के प्रसूति स्थल से बोल तीर्थंकर को लेकर आई और काफी अनुनय विनय करने पर सौधर्म इंद्र को बालक सौंपा तथा प्रभु के सबसे पहले दर्शन करते ही सौधर्म इंद्र ने 1008 नेत्र बनाकर प्रभु को निहारा फिर भी तृप्त नहीं हुआ । बाल तीर्थंकर को लेकर शोभायात्रा पाण्डुक शिला की ओर प्रस्थान कर गई । पूरी शोभायात्रा में श्रद्धालु बैंड और डीजे की धुन पर थिरकते हुए चल रहे थे तथा सभी श्रद्धालुओं को मिष्ठान वितरण करते हुए जन्मोत्सव की खुशी मना रहे थे । महिलाएं भी विभिन्न प्रकार के नृत्य गीत प्रस्तुत कर रही थी तथा विशेष रूप से तैयार की हुई जैन आर्मी भी शोभायात्रा के आकर्षण का केंद्र बनी रही । पाण्डुक शिला पर पहुंचने पर बाल तीर्थंकर का 1008 कलशों से अभिषेक किया गया ।
 पंचकल्याणक महोत्सव के चतुर्थ दिवस में कल दीक्षा कल्याणक मनाया जाएगा जिसमें राजा ऋषभदेव के राज्य संचालन की व्यवस्था दिखाई जाएगी तथा किस प्रकार वह अपनी दोनों पुत्रियां ब्राह्मी एवं सुंदरी के लिए अंक विद्या और अक्षर ज्ञान की शिक्षा देकर नारी शिक्षा की महत्वपूर्णता दर्शाएंगे।
भरत एवं बाहुबली के जीवन का प्रदर्शन भी किया जाएगा तथा बाद में राज दरबार में नृत्यांगना नीलांजना का नृत्य देखते हुए राजा ऋषभदेव को वैराग्य उत्पन्न होगा और संसार की क्षणभंगुरता जानते हुए वह जेनेश्वरी दीक्षा लेने वन की ओर प्रस्थान करेंगे।













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