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#mamakadhamakanews: खंडेलवाल महिला मंडल की "विलेज थीम किटी" में दिखी भारतीय ग्रामीण संस्कृति की झलक

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* गाँव सिर्फ़ एक स्थान नहीं, हमारी संस्कृति, हमारी पहचान और हमारे संस्कारों की जड़ है। ये कहना है मोहित बढ़ाया कलश इवेंट्स शिवपुरी अनिल मेहंदी वाले शिवपुरी का जिनकी पत्नी ने खंडेलवाल महिला मंडल के लिए किटी का आयोजन किया। इसे लेकर  मोहित ने अपने विचार साझा किए हैं।
आज मन गर्व से भर गया।
मेरी धर्मपत्नी, जो दिल्ली जैसे आधुनिक शहर में पली-बढ़ी हैं, उन्होंने खंडेलवाल महिला मंडल, में आयोजित "विलेज थीम किटी" में भारतीय ग्रामीण संस्कृति को जिस आत्मीयता, सादगी और समर्पण के साथ प्रस्तुत किया, वह वास्तव में प्रशंसनीय है।
उन्होंने गांव की मिट्टी की खुशबू, पारंपरिक रहन-सहन, प्राकृतिक जीवनशैली, मिट्टी के बर्तनों, देसी व्यंजनों और ग्रामीण परिवेश को इतनी खूबसूरती से साकार किया कि उपस्थित सभी  ने न केवल इसका भरपूर आनंद लिया, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस सादगी को भी महसूस किया जो आज धीरे-धीरे हमारी दिनचर्या से दूर होती जा रही है।
सबसे सुखद बात यह रही कि पूरे आयोजन में प्लास्टिक, डिस्पोज़ल या फाइबर क्रॉकरी का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया गया। मिट्टी के बर्तन, देसी स्वाद और प्राकृतिक सजावट ने इस आयोजन को एक नई पहचान दी।
मेरे लिए यह गर्व की बात है कि मेरी पत्नी केवल दिल्ली की बेटी ही नहीं, बल्कि shivpuri बढ़ाया परिवार और हमारे पैतृक गांव सिरसोद की संस्कारवान बहू भी हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि संस्कृति जन्मस्थान से नहीं, बल्कि विचारों और संस्कारों से जीवित रहती है।
मैं हृदय से खंडेलवाल महिला मंडल, का भी आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने इस अनूठी थीम को इतना प्रेम, सम्मान और उत्साह दिया।
अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही हमारी सबसे बड़ी पहचान है।
गर्व है... भारतीय संस्कृति पर।
गर्व है... अपनी पत्नी पर।
















#mamakadhamakanews: नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

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शिवपुरी। जिला कलेक्ट्रेट में बीते रोज आयोजित जनसुनवाई के दौरान शहर के युवक दिशांशु अग्रवाल ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि नगर पालिका की लापरवाही के कारण वार्ड क्रमांक 34 और 36 के बीच का क्षेत्र लंबे समय से गंदगी, अवैध कचरा डंपिंग, नालियों की बदहाल स्थिति और आवारा पशुओं की समस्या से जूझ रहा है। ज्ञापन में उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) तथा दोनों वार्डों के पार्षदों पर भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करने के आरोप लगाए हैं।
दिशांशु अग्रवाल का कहना है कि वार्ड में खुलेआम कचरा डाला जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैली रहती है। आरोप है कि कई बार इसी कचरे में आग भी लगा दी जाती है, जिससे जहरीला धुआं निकलता है और आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। उनका कहना है कि गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और डेंगू, मलेरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है और आम लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
दिशांशु अग्रवाल ने दावा किया है कि यह समस्या नई नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में भी इसी संबंध में नगर पालिका को लिखित शिकायत दी गई थी। इसके बाद CPGRAMS और स्वच्छता एप के माध्यम से भी कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन आज तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016, नगर पालिका अधिनियम और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही अवैध कचरा डंपिंग तत्काल बंद कराने, खुले में पड़े कचरे को हटाने, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने, आवारा पशुओं के नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था करने तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि जिला प्रशासन और नगर पालिका द्वारा समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाया जाएगा।
हालांकि, यह सभी आरोप शिकायतकर्ता दिशांशु अग्रवाल द्वारा अपने ज्ञापन में लगाए गए हैं। इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), वार्ड 34 एवं 36 के पार्षदों अथवा नगर पालिका प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
जनसुनवाई में ग्रामीणों ने उठाई पत्थर क्रेशर की शिकायत, प्रदूषण व फसलों के नुकसान का लगाया आरोप
शिवपुरी। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में करैरा तहसील के ग्राम पंचायत पारागढ़ के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को आवेदन सौंपकर गांव के समीप संचालित पत्थर क्रेशर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आवेदनकर्ता कामता प्रसाद लोधी ने ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाया कि क्रेशर के संचालन से धूल, ध्वनि प्रदूषण और ब्लास्टिंग के कारण क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हो रहा है तथा किसानों और ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि क्रेशर से निकलने वाली धूल खेतों में खड़ी फसलों पर जम रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। वहीं ब्लास्टिंग के दौरान उड़ने वाले पत्थरों से फसलों को नुकसान पहुंचने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार धूल उड़ने से सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि क्रेशर से जुड़े भारी वाहनों के लगातार आवागमन के कारण गांव की सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। साथ ही ब्लास्टिंग से आसपास के मकानों और कुओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की बात कही गई है।
आवेदनकर्ता कामता प्रसाद लोधी ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में भी प्रशासन, माइनिंग विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है तथा सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने और समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
















#mamakadhamakanews: शिवपुरी में बिजली संकट पर भड़का जन-आक्रोश: 24 घंटे में दो बड़े प्रदर्शन, कहीं चक्काजाम तो कहीं ऊर्जा मंत्री की निकाली शवयात्रा

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shivpuri शिवपुरी। जिले में अघोषित और लगातार हो रही बिजली कटौती ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। प्रशासनिक दावों को धता बताते हुए बिजली संकट से परेशान लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। महज 24 घंटे के भीतर जिले में दो ऐसे बड़े विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, जिसने शासन-प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं।
सड़क पर उतरे 15 गांवों के किसान: मंगलवार को सीहोर थाना क्षेत्र के वहगवां के पास एक बड़ा नजारा देखने को मिला। बिजली व्यवस्था से त्रस्त 15 गांवों के किसान और ग्रामीण एकजुट हुए और करेरा-भितरवार मार्ग पर करीब दो घंटे तक चक्काजाम कर दिया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं। हालांकि, मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने जल्द सुधार का आश्वासन देकर जाम तो खुलवा दिया, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस रहे।
ऊर्जा मंत्री की अनोखी 'शवयात्रा': 
जब अधिकारियों के आश्वासन खोखले साबित हुए, तो बुधवार को सिरसौद क्षेत्र के ग्रामीणों ने विरोध का एक बेहद अनोखा और कड़ा रास्ता चुना। ग्रामीणों ने सूबे के ऊर्जा मंत्री की तस्वीर लगाकर एक प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली। इतना ही नहीं, पूरे हिंदू रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया।
प्रशासनिक दावों की खुली पोल
लगातार दो दिनों तक हुए इन तीखे आंदोलनों ने शिवपुरी जिले की चरमराई बिजली व्यवस्था को पूरी तरह उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वादे बहुत किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में बिजली न मिलने से खेती-किसानी और आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो चुका है। अब देखना यह है कि इस कड़े विरोध के बाद विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है या नहीं।
 छह घंटे मिल रही बिजली
वहगवां पंचायत के सरपंच गजेंद्र रावत ने बताया कि क्षेत्र में पंप फीडर से पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। 24 घंटे में मुश्किल से छह घंटे बिजली दी जा रही है, वह भी बीच-बीच में बंद कर दी जाती है। आबादी फीडर पर भी लगातार कटौती हो रही है। इसका सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है और खेतों में खड़ी धान की फसल सूखने लगी है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
अगले दिन निकली शवयात्रा
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने पांच दिन में व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया था, लेकिन बिजली कटौती जारी रही। इसके विरोध में बुधवार को सिरसौद क्षेत्र के ग्रामीणों ने अनोखा प्रदर्शन किया। रामराजा मंदिर से प्रदेश के ऊर्जा मंत्री की तस्वीर लगाकर प्रतीकात्मक अर्थी निकाली गई। अंतिम यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए काली माता मंदिर परिसर पहुंची, जहां विधि-विधान से प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बिजली कंपनी मुर्दाबाद के नारे लगाए और कहा कि लगातार बिजली कटौती से खेती-किसानी, घरेलू कामकाज और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बाद भी बिजली कंपनी केवल आश्वासन देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हो रहा। 
अंतिम संस्कार के बाद सामूहिक स्नान
प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार के बाद ग्रामीण पंचायत के बोरवेल पर पहुंचे और सामूहिक स्नान किया। ग्रामीणों ने कहा कि यह प्रदर्शन व्यवस्था के प्रति उनके आक्रोश का प्रतीक है। उनका कहना है कि यदि जल्द बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली संकट अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और खेती दोनों पर भारी पड़ रहा है। धान की फसल सूखने लगी है, सिंचाई प्रभावित हो रही है और बच्चों की पढ़ाई तक बाधित हो रही है। उन्होंने प्रशासन और बिजली कंपनी को चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
















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