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#मामा_का_धमाका_खास_खबर: जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कलेक्ट्रेट की घड़ी कराई ठीक, लोग बोले, "शिवपुरी कलेक्ट्रेट परिसर में लंबे समय से मौन खड़ी ऐतिहासिक घड़ी का दोबारा चालू होना सिर्फ एक यांत्रिक सुधार नहीं, बल्कि ग्वालियर रियासत (स्टेटकालीन) के गौरवशाली इतिहास का पुनर्जीवित होना है"

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shivpuri शिवपुरी। आज हम अपने पाठकों के लिए एक इतिहास से जुड़ी खबर लेकर आए हैं। इस खबर का सर्जन जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा की पारखी नजर और उसके परिणामस्वरूप किया जा रहा है। साथ ही यह खबर शिवपुरी के नागरिकों और यहां की ऐतिहासिक धरोहर के प्रेमियों के लिए एक बेहद शानदार और सकारात्मक खबर भी है! दरअसल स्टेटकालीन कलेक्ट्रेट परिसर जैसी महत्वपूर्ण जगह पर लगी ऐतिहासिक घड़ी लंबे समय से खराब होकर बंद पड़ी थी जिसे कलेक्टर अर्पित वर्मा ने दोबारा चालू करा दिया है और इस घड़ी का ठीक होना न सिर्फ वक्त की पाबंदी को दिखाता है, बल्कि शहर की विरासत को सहेजने की दिशा में भी एक बेहतरीन कदम है।
लंबे समय से बंद पड़ी घड़ी का ठीक होना अक्सर पूरे परिसर में एक नई ऊर्जा और अनुशासन लेकर आता है
शिवपुरी कलेक्ट्रेट परिसर में लंबे समय से मौन खड़ी ऐतिहासिक घड़ी का दोबारा चालू होना सिर्फ एक यांत्रिक सुधार नहीं, बल्कि ग्वालियर रियासत (स्टेटकालीन) के गौरवशाली इतिहास का पुनर्जीवित होना है। जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि घड़ी ठीक होने पर उन्हें भी अच्छा लग रहा है, साथ ही वे इस घड़ी के अलार्म या कहें घंटे को भी ठीक करवाने का प्रयास कर रहे हैं। जब mamakadhamakanews के चीफ एडिटर विपिन शुक्ला मामा ने बताया कि ऐसी ही दो और घड़ियाँ भी शिवपुरी में हैं तो उन्होंने कहा कि अगर तीनों ही ठीक हुई तो और बेहतर होगा। उन्होंने इस दिशा में प्रयास करने की बात भी कही।
कलेक्ट्रेट परिसर की घड़ी का ऐतिहासिक महत्व
यह विशाल घड़ी ग्वालियर स्टेट के तत्कालीन शासक महाराजा माधवराव सिंधिया (प्रथम) के शासनकाल की याद दिलाती है। साल 1900 में जब शिवपुरी को ग्वालियर रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी (Summer Capital) घोषित किया गया, तब शहर में भव्य राजमहलों और प्रशासनिक भवनों का निर्माण हुआ था।
  • निर्माण और तकनीक:
  • यह घड़ी पूरी तरह से मैकेनिकल (लंगर और गरारी प्रणाली) पर आधारित है, जिसे विशेष रूप से समय के अनुशासन को बनाए रखने के लिए भवन के शीर्ष पर स्थापित किया गया था।
  • सटीकता का प्रतीक:
  • लंबे समय तक देखरेख के अभाव में यह बंद पड़ी थी, लेकिन प्रशासनिक प्रयासों से इसे सुधारकर इसके ऐतिहासिक स्वरूप को वापस लौटाया गया है। 
  • शिवपुरी में 3 प्रमुख स्टेटकालीन घड़ियाँ
    सिंधिया राजवंश के काल में शिवपुरी की वास्तुकला में समय को बहुत महत्व दिया गया था। यही कारण है कि पूरे शिवपुरी शहर में 3 चुनिंदा और ऐतिहासिक जगहों पर ये स्टेटकालीन घड़ियाँ लगाई गई थीं:
  • कलेक्ट्रेट परिसर (पुरानी कोर्ट बिल्डिंग): ग्रीष्मकालीन राजधानी के प्रशासनिक कामकाज और अधिकारियों को समय का पाबंद रखने के लिए मुख्य कार्यालय पर इसे लगाया गया था। 
  • माधव चौक (घंटाघर): 
  • शहर के बिल्कुल केंद्र (हार्ट ऑफ द सिटी) में स्थित यह घंटाघर आम जनता को समय बताने और रियासत की मौजूदगी का अहसास कराने के लिए स्थापित किया गया था।
  • सिंधिया छतरी परिसर यानि पुराना राजमहल: 
  • राजशाही परिवार और उनके विशेष अतिथियों के आवागमन वाले क्षेत्र में समय की गणना के लिए वास्तुकला के हिस्से के रूप में घड़ी लगाई गई थी।
  • शिवपुरी के इन तीनों ऐतिहासिक स्थलों का पर्यटन इतिहास ग्वालियर रियासत (सिंधिया राजवंश) के वैभव, वास्तुकला और दूरदर्शिता की कहानी बयां करता है। पर्यटकों के लिए ये तीनों स्थल आज भी आकर्षण का बड़ा केंद्र हैं। 
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 
  • साल 1900 में महाराजा माधवराव सिंधिया (प्रथम) ने जब शिवपुरी को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी (Summer Capital) बनाया, तब इस विशाल प्रशासनिक भवन का निर्माण कराया था।
  • पर्यटन इतिहास व महत्व: 
  • इसे मुख्य रूप से तत्कालीन कोर्ट और सचिवालय के रूप में उपयोग किया जाता था। इस औपनिवेशिक और इंडो-सारसेनिक वास्तुकला से प्रेरित भवन की बनावट पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसके शीर्ष पर लगी स्टेटकालीन मैकेनिकल घड़ी अब फिर से चालू होने के बाद यहाँ आने वाले हेरिटेज प्रेमियों के लिए एक नया विजुअल आकर्षण बन गई है।
  • माधव चौक (ऐतिहासिक घंटाघर)
    • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: माधव चौक शिवपुरी शहर का मुख्य व्यावसायिक केंद्र और हृदय स्थल है। यहाँ लगे ऐतिहासिक घंटाघर (क्लॉक टावर) का निर्माण सिंधिया शासनकाल के दौरान आम जनता की सुविधा के लिए कराया गया था, ताकि बाजार क्षेत्र में आने वाले लोग समय का हिसाब रख सकें।
    • पर्यटन इतिहास व महत्व: 
    • पर्यटकों के लिए यह जगह शिवपुरी के शहरी जीवन और इतिहास का लाइव संगम है। यहाँ की ऐतिहासिक बनावट शहर के आधुनिक बाजार के बीच एक खूबसूरत लैंडमार्क की तरह खड़ी है। पुराने समय की वास्तुकला को देखने और शहर के केंद्र का अनुभव लेने के लिए सैलानी यहाँ रुकना पसंद करते हैं।
    • सिंधिया छतरी परिसर 
      • पर्यटन इतिहास व महत्व:
        • वास्तुकला: 
        • यह परिसर हिंदू, राजपूत और मुगल वास्तुकला का एक बेजोड़ मिश्रण है। यहाँ सफेद संगमरमर (मार्बल) और रंगीन पत्थरों पर की गई जालीदार नक्काशी देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।
        • परिसर की खूबसूरती: छतरियाँ एक शानदार और सुव्यवस्थित मुगल गार्डन और पवित्र तालाब के बीच स्थित हैं। यहाँ के शांत वातावरण, शाही छटा और राजसी समय की गणना के लिए लगाई गई ऐतिहासिक घड़ी के कारण यह शिवपुरी का नंबर-1 हेरिटेज टूरिस्ट स्पॉट माना जाता है।
        • शिवपुरी का यह "क्लॉक टावर हेरिटेज ट्रेल" सिंधिया राजवंश के समय के बेहतरीन इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर का जीवंत उदाहरण है।
    • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
    • यह शिवपुरी का सबसे प्रसिद्ध और भव्य स्थापत्य है। यहाँ दो भव्य स्मारक (छतरियाँ) एक-दूसरे के आमने-सामने बनी हैं। एक छतरी महाराजा माधवराव सिंधिया की माता महारानी संख्या राजे सिंधिया की स्मृति में बनी है और दूसरी स्वयं महाराजा माधवराव सिंधिया की है।
















  • #mamakadhamakanews : 12 वाँ प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान समारोह 20 अगस्त को नक्षत्र गार्डन में

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    *गरीब परिवारों के बच्चों के जीवन को शिक्षा के प्रकाश से आलोकित करने के महनीय योगदान के लिए ओमप्रकाश दीक्षित एवं सुरेंद्रपाल सिंह कुशवाह स्मृति सम्मान को करेंगे सुशोभित
    शिवपुरी। विख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार की जयंती पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान समारोह का 12 वाँ संस्करण 20 अगस्त 2026 को सायं 06:00 बजे नक्षत्र गार्डन शिवपुरी में आयोजित होने जा रहा है. उक्त समारोह में बतौर मुख्य अतिथि क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना के कुलगुरु (वाइस चांसलर) प्रोफेसर (डॉ.) किशन यादव एवं अध्यक्षता के लिए जिला कलेक्टर शिवपुरी अर्पित वर्मा की गौरवपूर्ण उपस्थिति होगी. कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक शिवपुरी यांगचेन डोलकर भूटिया कार्यक्रम में सम्मिलित रहेंगीं. 
    समाज में शिक्षा, सामाजिक कार्यों, सेवाकार्यों और मानवीय मूल्यों के संवर्धन की दृष्टि से अहर्निश उत्कृष्ट सेवा-कार्य करने वाले सेवाभावी व्यक्तित्वों का इस आयोजन में प्रतिवर्ष सम्मान किया जाता है. प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान 2026 इस वर्ष सेवानिवृत्त शिक्षक ओमप्रकाश दीक्षित एवं सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सुरेन्द्रपाल सिंह कुशवाह को प्रदान किया जाएगा.
     गरीब, मजदूर और सैंकड़ों असहाय जरुरतमंद परिवारों के बच्चों के भविष्य को संवारने एवं उनके जीवन को शिक्षा के प्रकाश से आलोकित करने के अप्रतिम समर्पण, निःस्वार्थ सेवाभाव के उल्लेखनीय योगदान के लिए सेवानिवृत्त शिक्षक ओमप्रकाश दीक्षित को यह स्मृति सम्मान प्रदान किया जाएगा. वहीं प्रबुद्ध विचारक, साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुरेन्द्रपाल सिंह कुशवाह को यह गौरवपूर्ण सम्मान मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत रचनात्मक साहित्य सृजन, युवाओं को शैक्षणिक मार्गदर्शन, गौवंश संरक्षण, जैविक कृषि प्रोत्साहन, ऋण-मुक्ति, दुर्घटना बीमा एवं अन्य बैंकिंग सेवाओं से समाज को लाभान्वित करने के महनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा.
    गौरतलब है कि शासकीय पी.जी. कॉलेज शिवपुरी में पदस्थ रहकर 41 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श प्राध्यापक के रूप में एकनिष्ठ साधना और समर्पण का ध्येयनिष्ठ जीवन जीने वाले और अंचल के विद्यार्थियों के जीवन निर्माण के लिए उत्कृष्ट शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर देने वाले प्रोफ़ेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार का 06 जून 2015 को देहावसान हो जाने के बाद से उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए इस सम्मान समारोह की शुरुआत शिवपुरी शहर में उनके शिष्यों द्वारा की गयी है. समाज में शिक्षा, सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में एवं मानवीय मूल्यों के संवर्धन की दिशा में निरंतर मौन भाव से कृतसंकल्पित होकर सेवा-कार्य करने वाले कर्मनिष्ठ आदर्श व्यक्तित्वों का सम्मान करने की यह शुरुआत अगस्त 2015 से की गयी है. इस वर्ष यह 12 वाँ समारोह है.
















    #mamakadhamakanews: ई अटेंडेंस पर मनमाने आदेश निकालने वाले अधिकारियों पर हो कार्रवाई: प्रांताध्यक्ष राठौर

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    * शिवपुरी पहुंचे मप्र शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष ने ई अटेंडेंस और टीईटी परीक्षा को लेकर की चर्चा, कहा, "कमिश्नर के निर्देशों की अव्हेलना कर रहे हैं कुछ डीईओ व जेडी" 
    शिवपुरी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 4 लाख शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर लागू की गई ई अटेंडेंस व्यवस्था की व्यवहारिक व तकनीकी खामियों को लेकर प्रतिदिन मीडिया में मामले सामने आ रहे हैं। पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने शिवपुरी पहुंचे मप्र शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष  डॉ. छत्रवीर सिंह राठौर ने सोमवार की देर शाम अनौपचारिक चर्चा में ई अटेंडेंस के मुद्दे पर संगठन का रुख स्पष्ट किया और शिक्षकों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि ई अटेंडेंस की तकनीकी व व्यवहारिक परेशानियों को लेकर संगठन ने शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह सहित आयुक्त लोक शिक्षण, अभिषेक सिंह से कई बार मुलाकात कर परेशानियों को दूर कराने का प्रयास किया है और अब भी संघ लगातार इस शिक्षा में कार्य कर रहा है। ई अटेंडेंस पोर्टल व लॉग इन एवं लॉग आउट की समय सीमा तय होने के बावजूद कुछ जिलों व संभागस्तर से सुबह 10 एवं 10.15 तक लॉग इन करने की बाध्यता संबंधी आदेश जारी करने के प्रश्र पर राठौर का स्पष्ट कहना है कि उनके संज्ञान में यह मामले आए हैं जिनमें कुछ जेडी व जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा इस तरह के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह के आदेश आयुक्त लोक शिक्षण के निर्देशों की अव्हेलना है और ऐसे अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग मप्र शिक्षक संघ करेगा। राठौर ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि वे ई अटेंडेंस को लेकर कतई मानसिक तनाव न लें और न ही किसी परिस्थिति, बाढ या अन्य कोई गंभीर प्राकृतिक स्थिति में ई अटेंडेंस के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें। अधिकारियों व शिक्षा मंत्री ने आश्वस्त किया है कि अकारण किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं काटा जाएगा। यदि कोई शिक्षक स्कूल में है और तकनीकी कारण से लॉग इन या लॉग आउट नहीं भी हो पाता है तो भी उसकी वेतन नहीं कटेगी। ई अटेंडेंस सिस्टम में अर्जित अवकाश, महिलाओं के विशेष अवकाश, किसी स्कूल पर आकस्मिक व्यवस्था पर अटैंडेंस , हाफ टाइम ऑन ड्यूटी आदि व्यवस्था जल्द उपलब्ध कराए जाने को लेकर  भी तकनीकी टीम कार्य कर रही है और जल्द ही यह ऑप्शन भी उपलब्ध हो जाएंगे। राठौर ने साफ शब्दों में कहा कि बावजूद इसके ई अटेंडेंस सिस्टम में खामियां बनी रहीं तो हम ई अटेंडेंस व्यवस्था का स्थाई समाधान कराने के लिए भी प्रयास करेंगे। सोमवार को कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्राथमिक व माध्यमिक  स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की टीईटी परीक्षा का कार्यक्रम घोषित करने के प्रश्र पर राठौर का कहना था कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उक्त परीक्षा आयोजित होनी है, लेकिन सरकार ने 2005 के बाद व्यापम परीक्षा उत्तीर्ण कर नौकरी में आने वाले शिक्षकों को टीईटी से राहत देने के लिए विशेष याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है। ऐसे में उन्हें राहत मिल सकती है जबकि शेष शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा से डरने की आवश्यकता नहीं है। 2028 तक परीक्षा के पर्याप्त अवसर मिलेंगे और परीक्षा का पाठ्यक्रम भी वही होगा जो शिक्षक स्कूल में पढ़ा रहे हैं। टीईटी परीक्षा ओएमआर पर कराने की बजाय ऑनलाईन कराने तथा कई शिक्षकों के कम्प्यूटर में दक्ष न होने के प्रश्र पर राठौर ने कहा कि समय डिजीटल क्रांति का है और शिक्षक को भी अपडेट होना होगा फिर भी हम ऐसे शिक्षकों के लिए ऑफलाईन परीक्षा आयोजित हो इसे लेकर बात रखेंगे। राठौर के शिवपुरी अल्पप्रवास के दौरान उनसे मिलने मप्र शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के अलावा अन्य विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल थे जिनमें प्रमुख रूप से राजेन्द्र पिपलौदा, डॉ. कौशल गौतम, स्नेह रघुवंशी, नीरज सरैया, पवन अवस्थी, तारिक सिद्धकी, विपिन पचौरी, राजकुमार सरैया, अनिल गुप्ता, अरविंद सरैया,रामेश्वर गुप्ता, रामकृष्ण रघुवंशी, अवधेश सिंह तोमर, भरत धाकड़ आदि उपस्थित रहे।
















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