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#mamakadhamakanews: वैसे तो नगर की हर सड़क खराब हालत में है, मुख्य बाजार में पैदल चलना तक मुश्किल है, इन सड़कों का नव निर्माण तो दूर की बात नगर पालिका ने उनको रिपेयर तक नहीं करवाया है, इधर आलम ये है कि नगर के गांधी पार्क मैदान के पास जहां सीएमओ नगर पालिका की कोठी है उसी के पास हुए गड्ढों के कारण लोग परेशान हैं, ये है तिकोनिया पार्क के सामने गहरा गड्ढा

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shivpuri शिवपुरी। दोस्तों वैसे तो नगर की हर सड़क खराब हालत में हैं मुख्य बाजार में पैदल चलना तक मुश्किल है, इन सड़कों का नव निर्माण तो दूर की बात नगर पालिका ने उनको रिपेयर तक नहीं करबाया है। आलम ये है कि नगर के गांधी पार्क मैदान के पास जहां सीएमओ नगर पालिका की कोठी है उसी के पास हुए गड्ढों के कारण लोग परेशान हैं। तिकोनिया पार्क के पास वाला ये गड्ढा जो फोटो में नजर आ रहा है अगर इसमें कोई वाहन चालक गिरा तो सीधे सीएमओ की कोठी पर जाकर गिरेगा। इसी तरह का एक गड्ढा तिकोनिया पार्क के पिछले हिस्से में भी हो गया है जिससे लोग परेशान हैं और नगर पालिका इन्हें बंद नहीं करवा रही।
नगर पालिका ने खोदी पानी के लिए सड़क उसी के जख्म जनता को दे रहे दर्द
नगर पालिका ने नगर में पानी की लाइन बिछाने के लिए पूरे शहर की बेहतरीन सड़कें उखाड़कर रख दी हैं। उसी दौरान सीएमओ की कोठी के आगे लाइन जोड़ी जिसमें इस तरह पानी भरा रहता है               (फोटो देखिए)
जबकि दूसरी तरफ तिकोनिया पार्क के ठीक सामने और पीछे भी सड़क खोदकर छोड़ दी है। 
















#mamakadhamakanews: ये तो हद हो गई, video देखिए फिर दीजिए कमेंट्स में प्रतिक्रिया, दरअसल लखनऊ में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की रैली के दौरान भगवान हनुमान की वेशभूषा में एक कलाकार का डांस सोशल मीडिया पर चर्चा और भारी राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है

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लखनऊ। लखनऊ में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की रैली के दौरान भगवान हनुमान की वेशभूषा में एक कलाकार का डांस सोशल मीडिया पर चर्चा और भारी राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। यह घटना 5 जुलाई 2026 (या उससे ठीक एक-दो दिन पहले) बीजेपी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ दौरे और भव्य रैली के दौरान की है।
              (देखिए वायरल वीडियो)
यह आयोजन नितिन नवीन के बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके लखनऊ आगमन और स्वागत रैली से जुड़ा था। 
विवाद का मुख्य कारण
धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग: विपक्ष और आलोचकों का आरोप है कि राजनीतिक लाभ और चुनावी प्रचार के लिए भगवान हनुमान जैसे पवित्र धार्मिक स्वरूप का इस तरह इस्तेमाल करना गलत है।
ध्वज और नृत्य:
 वायरल वीडियो में कलाकार को भाजपा का झंडा लहराते और चुनावी रैली के माहौल में थिरकते देखा गया, जिस पर कई यूज़र्स ने आपत्ति जताई है।
ये बोले नेता
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एक्स (X) पर लिखा कि बीजेपी ने हिंदू धर्म को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए धार्मिक प्रतीकों का दुरुपयोग किया जा रहा है और बीजेपी को इसके लिए हिंदू समुदाय से माफी मांगनी चाहिए।
संजय सिंह (AAP सांसद): 
उन्होंने बयान दिया कि भगवान हनुमान के वेशधारी व्यक्ति से राजनीतिक जुलूस में पार्टी का झंडा उठवाकर नचवाना देवता का अपमान है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था को राजनीतिक तमाशा नहीं बनाया जाना चाहिए।
पवन खेड़ा (कांग्रेस नेता):
 उन्होंने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निशाना साधते हुए कहा कि खुद को हिंदू बताने वाले राजनीतिक लाभ के लिए पवनपुत्र हनुमान को नचा रहे हैं, जो पूरी तरह पाखंड है।
भाजपा का पक्ष और समर्थकों की राय: सोशल मीडिया पर बीजेपी समर्थकों और कुछ दर्शकों का मानना है कि यह केवल एक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, उत्सव और व्यक्तिगत श्रद्धा का हिस्सा था। उनका कहना है कि रैलियों में इस तरह के सांस्कृतिक रूप और लोक प्रस्तुतियां आम बात हैं।

















#mamakadhamakanews: पंडवानी की विश्व-विख्यात कलाकार डॉ तीजन बाई को विनम्र श्रृद्धांजली

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दोस्तों कल  05 जुलाई 2026 रविवार को छत्तीसगढ़ की प्रमुख पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई का निधन हो गया। उन्हें मामा का धमाका डॉट कॉम शिवपुरी की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। साथ ही उनके व्यक्तित्व को करीब से देखने वाले जानेमाने कलाकार साहित्यकार और लेखक अरुण अपेक्षित जी से उनके बारे में जानते हैं। अरुण जी कहते है कि सबसे पहले मैंने उन्हें सन 1984 में रायगढ़ लोकोत्सव में देखा और सुना था। तब वे राष्ट्रीय अथवा अंतर-राष्ट्रीय ख्याति की कलाकार नहीं थी। इस लिए उसी रेलवे स्टेशन के निकट धर्मशाला में ठहरी थीं जहां प्रदेश भर के तमाम कलाकार ठहराये गए थे। यह वह समय था जब मध्य प्रदेश का विभाजन नहीं हुआ था और तब हम भी शासकीय कलापथक के नये-नये कलाकार थे और तमाम मध्य-प्रदेश के लोक-गीतों, नृत्यों तथा नाट्य शैलियों से परिचित हो रहे थे। हम इस लोकोत्सव में हमारे ग्वालियर क्षेत्र का कांवर-नृत्य लेकर गए थे। सच्चाई यह है कि इस लोेकोत्सव में हम मध्य-प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के साथ छत्तीगढ़ी कलाकार ही नहीं उनकी ललित-कलाओं का भी प्रथम प्रत्यक्ष अवलोकन कर रहे थे। छत्तीसगढ़ी का नाचा, करमा और पंथी नृत्य, छत्तीसगढ़ी लोक-गीत और पंडवानी की प्रस्तुति का प्रथम दर्शन और अवलोकन। निश्चित ही उसी समय इस अद्भुत कलाकार ने हमें हम सब को बहुत प्रभावित किया। 
रायगढ़ उस समय नकसली घटनाओं की चपेट में था। हम सारे कलाकारों को कठोरता के साथ समझा दिया गया था कि कोई शाम के बाहर कहीं नहीं जायेगा। सभी अपनी धर्मशाला में रहेंगें। तीन दिवसीय लोकोत्सव जिस विशाल मैदान में आयोजित था वहां प्रदेश भर के 300-400 कलाकार दोपहर दो बजे के आसपास पहुंच जाते थे। तीन बजे से कार्यक्रम प्रारम्भ होता और छै बजते-बजते कार्यक्रम अपनी पूर्णता पर पहुंच जाता। स्वाभाविक है-सारे कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियां देने के उपरांत अपना अधिकांश समय उसी धर्मशाला में व्यतीत करते थे। इससे आपस में मिलने-जुलने का, मित्रता करने का अधिक से अधिक समय सभी कलाकारों को मिल जाता था। दूसरे इस धर्मशाला में अलग-अलग कमरे नहीं थे- बड़े-बड़े कक्ष थे जिनके दोनों ओर गद्दे बिछा दिए गए थे, सारे कलाकार इन्हीं गद्दों पर विश्राम करते थे। सभी को अपना निजी सामान भी अपने सिरहाने रखना होता था। एक बड़े से कक्ष में कम से कम सौ कलाकार तो होते ही थे। जब खाली समय होता तो सब अपना-अपना रियाज भी करते थे, जो रियाज नहीं कर रहे होते थे वे श्रोता बन जाते थे। तब मध्य-प्रदेश अखंड था इस लिए सम्पूर्ण अखंड-मध्यप्रदेश के ढेर सारे लोक कलाकार यहां एकत्रित थे। मैं और मेरे कलापथक के साथी चूंकि पहली बार इतने बड़े आयोजन में शामिल हो रहे थे तो हमारे लिए यह एक अलगसा अनुभव था। आज हम इस बात पर गर्व कर सकते हैं कि हमने तीजनबाई जैसे महान कलाकार के साथ एक ही टाट-पट्टी पर बैठ कर भोजन किया है। बाद में तीजनबाई से दुर्ग, विलासपुर, डोंगरगढ़ में आयोजित लोकोत्सवों में भी भेंट हुई। उनसे अंतिम भेंट शिवपुरी में ही हुई। आकाशवाणी शिवपुरी ने यहां एक लोकोत्सव का आयोजन किया था। प्रमुख मंचीय आयोजन के अतरिक्त एक परिवारिक बैठक का भी आयोजन हमने किया था जिसमें तीजन बाई अपने सम्पूर्ण दल के साथ पधारी थीं। निश्चित ही उनका सानिध्य बहुत ही सहज और साधरण था। कभी लगा ही नहीं कि हम किसी विश्व-विख्यात कलाकार से मिल रहे हैं। जब वे शिवपुरी आई थीं तब उन्हें पद्मश्री मिल चुका था। बाद में उन्हें पद्म-भूषण से भी अलंकृत किया गया। मैं मेरे देश की इतनी महान मगर सहज-साधरण, अपनी मिट्टी की कलाकार डॉ.श्रीमती तीजन बाई को अपनी विनम्र श्रृधांजली अर्पित करता हूं। अरुण अपेक्षित 06 जुलाई 2026 इंदौर मध्य-प्रदेश।
















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