शिवपुरी/आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में वन्यजीव तस्करी के एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट के पर्दाफाश ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिला प्रशासन और वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगरा पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक कार और होटल से 10 तेंदुओं की कटी हुई खालें और उनके सिर बरामद किए गए हैं। पकड़े गए अंतरराज्यीय तस्करों में शिवपुरी का 'भोगीराम' और मुरैना का 'गब्बर' शामिल है। इन्होंने प्रारंभिक पूछताछ में जो खुलासा किया है, उसने देश के वन्यजीव गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। शिकारियों के अनुसार, इन सभी तेंदुओं को शिवपुरी और उसके आसपास के जंगलों से मौत के घाट उतारा गया था।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरियाणा के फरीदाबाद निवासी सतपाल नाथ, शिवपुरी निवासी भोगीराम आदिवासी, मुरैना निवासी गब्बर तथा हरियाणा निवासी भगत सिंह के रूप में हुई है।
होटल में बिछाया गया जाल, खरीदार बनकर पहुंची पुलिस
* 3 महीने का गुप्त ऑपरेशन: वाइल्डलाइफ एसओएस और वन विभाग की टीमें पिछले तीन महीनों से इस गिरोह की निगरानी कर रही थीं।
* फिल्मी अंदाज में दबिश:
आगरा के सैंया क्षेत्र के एक होटल में जब तस्कर इन खालों का सौदा करने पहुंचे, तो पुलिस टीम खरीदार बनकर वहां दाखिल हुई।
* वैगनआर कार से बरामदगी:
होटल परिसर में खड़ी एक कार से पॉलिथीन और बैगों में छुपाकर रखी गईं 10 तेंदुओं की खालें और सिर जब्त किए गए।
शिवपुरी का 'भोगीराम' और मुरैना का 'गब्बर' गिरफ्तार
आगरा पुलिस ने इस मामले में चार अंतरराज्यीय तस्करों को दबोचा है:
भोगीराम आदिवासी:
यह मुख्य आरोपी मध्य प्रदेश के शिवपुरी का ही निवासी है, जो स्थानीय स्तर पर शिकार और खाल जुटाने का काम करता था।
गब्बर: यह आरोपी मध्य प्रदेश के मुरैना जिले का रहने वाला है।
सतपाल और भगत सिंह:
ये दोनों आरोपी हरियाणा के रहने वाले हैं, जो इस माल को दिल्ली-हरियाणा के रईसों को घरों की सजावट के लिए लाखों में बेचने वाले थे।
माधव टाइगर रिजर्व की सुरक्षा पर खड़े हुए 'तीखे सवाल'
इस बड़ी बरामदगी ने माधव टाइगर रिजर्व (शिवपुरी) की सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है।
कौड़ियों के दाम पर शिकार:
पूछताछ में सामने आया कि शिवपुरी के स्थानीय जंगलों और ग्रामीण इलाकों से तेंदुओं की खाल महज ₹400 से ₹1,000 में खरीदी या शिकार की जाती थी, जिसे आगे जाकर लाखों रुपये में बेचा जाता था।
शिकारियों का बढ़ता हौसला:
माधव नेशनल पार्क को हाल ही में भारत का 58वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है, जहां बाघों की सुरक्षा के लिए करोड़ों का बजट आता है। लेकिन एक साथ 10 तेंदुओं का खात्मा यह दर्शाता है कि रिजर्व के बफर और कोर जोन में शिकारी बेखौफ घूम रहे हैं।
विदेशी कनेक्शन की आशंका:
वन विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में अंगों की बरामदगी के पीछे अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह (International Wildlife Racket) का हाथ है और इसके तार चीन व अन्य देशों के पारंपरिक दवाओं के बाजार से भी जुड़े हो सकते हैं।
माधव टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जताई अनभिज्ञता
मामले में माधव टाइगर रिजर्व के सीसीएफ उत्तम शर्मा का कहना है कि उन्हें अभी तक माधव टाइगर रिजर्व या शिवपुरी के जंगलों में तेंदुओं के शिकार की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि बरामद खालों की उत्पत्ति और शिकार के वास्तविक स्थान का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
मध्य प्रदेश वन विभाग अलर्ट पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के वन अधिकारी लगातार संपर्क में हैं। यद्यपि स्थानीय स्तर पर अधिकारी अभी फॉरेंसिक जांच और विस्तृत पूछताछ के बाद ही सटीक लोकेशन की पुष्टि की बात कह रहे हैं, लेकिन शिवपुरी के आरोपी की गिरफ्तारी और उसके कबूलनामे ने माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पहले भी एक मादा टाइगर का कर चुके है शिकार!
शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व की लापता बाघिन का मामला अभी तक रहस्य बना हुआ है और स्थानीय स्तर पर उसके शिकार की आशंकाएं लगातार जताई जाती रही हैं, हालाकि वन विभाग अब तक उसके शिकार की पुष्टि नहीं करता, जबकि स्थानीय स्तर पर इस संबंध में लगातार आशंका व्यक्त की जाती रही हैं। ऐसे में अब 10 तेंदुओं के कथित शिकार का दावा सामने आने से वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण तंत्र पर नए सवाल उठ रहे हैं।
















































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