* दतिया भाजपा में इस्तीफों की झड़ी
* भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण समेत सभी जिला पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
* भाजपा के सभी पार्षदों ने भी छोड़े पद
दतिया। पीतांबरा माई की नगरी दतिया से बड़ी खबर है। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अभूतपूर्व राजनीतिक बगावत और भारी बवाल शुरू हो गया है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को चौंकाने वाला फैसला लेते हुए नरोत्तम मिश्रा की जगह पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। टिकट वितरण के बाद जैसे ही ये खबर वायरल हुई दतिया में भारी असंतोष और हंगामे की
शुरुआत हो गई। बीजेपी के पदाधिकारियों, पार्षदों ने ग्वालियर झांसी फोरलेन पर जाम लगा दिया। जमकर विरोध प्रदर्शन किया और सामूहिक इस्तीफे दे दिये। सभी की मांग है कि नरोत्तम मिश्रा को ही टिकिट दिया जाए, दतिया के विकास के वे इकलौते जिम्मेदार है।
मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
बीजेपी दफ्तर का घेराव:
उग्र कार्यकर्ताओं ने दतिया में भाजपा कार्यालय को ताला लगाने की कोशिश की और पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बाजार बंद कराने पर विवाद:
शहर में कई जगहों पर समर्थकों ने जबरन दुकानें बंद कराने की कोशिश की, जिससे भाजपा पदाधिकारियों और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी झड़प व बहस देखने को मिली। पूरे शहर में भारी तनाव का माहौल बना हुआ है।
सड़कों पर उतरे समर्थक और चक्काजाम, हाईवे किया जाम:
टिकट की घोषणा के तुरंत बाद नरोत्तम मिश्रा के हजारों नाराज समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। उन्होंने ग्वालियर-झांसी नेशनल हाईवे (NH-44) पर चक्काजाम कर दिया, जिससे दो किलोमीटर से लंबा वाहनों का जाम लग गया।
सामूहिक इस्तीफों की झड़ी, पूरी कार्यकारिणी का इस्तीफा:
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से नाराज भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा ने पूरी जिला कार्यकारिणी के साथ अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।जनप्रतिनिधियों की बगावत:
जिला अध्यक्ष के साथ-साथ जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका दतिया के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और दतिया विधानसभा के सभी 6 मंडलों के अध्यक्षों ने भी त्यागपत्र सौंप दिया है।
पार्षदों और बूथ अध्यक्षों का इस्तीफा: दतिया और बड़ौनी के सभी भाजपा पार्षदों और विधानसभा के सभी 281 बूथों के अध्यक्षों व कार्यकारिणी ने भी अपने दायित्वों को छोड़ दिया है।
समर्थकों का 24 घंटे का अल्टीमेटम
जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा और समर्थकों ने पार्टी आलाकमान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर फैसले पर पुनर्विचार कर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार नहीं बनाया गया, तो वे भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे और चुनाव में पूरी ताकत से पार्टी का विरोध करेंगे।
नरोत्तम मिश्रा के समर्थक नेताओं का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह एकतरफा है और इसमें स्थानीय कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा की गई है। वे जल्द ही इस फैसले को बदलवाने के लिए दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे।
उपचुनाव का पूरा गणित और मौजूदा स्थिति
क्यों हो रहा है उपचुनाव?:
यह सीट कांग्रेस के निवर्तमान विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की अदालत द्वारा धोखाधड़ी के मामले में 3 साल की सजा सुनाए जाने और अयोग्य घोषित किए जाने के कारण खाली हुई है।
मतदान की तारीख:
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार दतिया उपचुनाव के लिए 30 जुलाई 2026 को मतदान होना है और वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी।
नामांकन की अंतिम तिथि:
पर्चा दाखिल करने की आखिरी तारीख 13 जुलाई है। नरोत्तम मिश्रा ने उपचुनाव घोषित होते ही क्षेत्र में प्रचार शुरू कर दिया था और नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था, जिससे उनका लड़ना तय माना जा रहा था।
टिकिट कटने को लेकर जितने मुंह उतनी बातें!
मिश्रा के टिकिट कटने के पीछे अनेक तर्क सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी ने गुप्त सर्वे करवाया जिसमें दादा का पलड़ा हल्का निकला। 300 न्यूट्रल लोगों से की गई रायशुमारी में 150 लोगों ने निगेटिव फीड बैक दिया। ये सर्वे संघ की ओर से हुआ ऐसा दावा किया जा रहा है! हालाकि हम ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं करते। अन्य कुछ बातों में ये बात भी कही जा रही है कि दादा दिल्ली दरबार में जाकर आशीर्वाद नहीं लाए। टिकिट घोषित होने से पूर्व ही फार्म ले आए। यहां तक कि देश के पीएम नरेंद्र मोदी जी दादा के गृहमंत्री रहते उनके सार्वजनिक बयानों को लेकर नाराज हुए थे। उन्होंने सार्वजनिक आलोचना की थी। उस नाराजगी के चलते भी टिकिट काटे जाने की अटकल है। फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
इधर कांग्रेस में भी हलचल
इस बीच, कांग्रेस खेमे में भी टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है और पार्टी अपने प्रत्याशी का नाम तय करने के लिए लगातार मंथन कर रही है। हालांकि, भाजपा में ऐन वक्त पर हुए इस बड़े उलटफेर और अंदरूनी बगावत ने दतिया के इस चुनावी रण को बेहद दिलचस्प और संवेदनशील बना दिया है।


















































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