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#धमाका_शेम_शेम: आखिर कहां जा रहा है देश का भविष्य, AI का मिस यूज, "देखना चाहते थे कि जिनके साथ रहते हैं, वे बिना कपड़ों के कैसी दिखेंगी", इसलिए सिर्फ 549 रुपए में बनाए 9 लड़कियों के न्यूड AI वीडियो-फोटो", पढ़िए शर्मनाक हरकत

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छिंदवाड़ा। दोस्तों, AI युग में युवाओं को देश का भावी भविष्य कहा जाता है, उनसे अपने घर, माता, पिता, भाई, बहिन ही नहीं देश के उत्थान की उम्मीद लगाते हैं लेकिन वर्तमान परिवेश में कुछ भटके युवा ऐसी घटिया हरकत करने से बाज नहीं आ रहे जिसे सुनकर लोगों की रूह कांप जा रही है। उनकी घटिया सोच और कारनामे देखने सुनने और सामने आने के बाद ये सोचने पर विवश होना पड़ रहा है कि क्या इनके घरों में मां, बहिन, भाभी, दादी, काकी नहीं हैं? अगर है और तब इनकी ये घटिया सोच है तो आप समझ सकते हैं कि उनके घरों की हालत क्या होगी। आज की इस व्यथा को लिखते हुए कलम सिहर रही है लेकिन लिखना इसलिए भी आवश्यक है कि समाज के लोग अब सतर्कता को जरूर अपना लेवे, हर किसी से दोस्ती के पहले सोचें, समझें तब ही आगे बढ़े। विश्वास पर धोखे की कालिख लगाती ये शेम शेम स्टोरी समाज को सोचने पर मजबूर अवश्य करेगी। हालाकि इस मामले में जिन युवतियों के साथ AI माध्यम से घटिया हरकत हुई वे डरी नहीं बल्कि पुलिस के पास गईं जिससे उन्हें न्याय मिल सका। 
आइए बताते हैं क्या है मामला
"जिन लड़कियों के साथ हम रहते हैं, देखना चाहते थे कि बिना कपड़ों के वो कैसी दिखेंगी। यही कारण था कि AI की मदद से उनके न्यूड वीडियो-फोटो बना लिए। सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दिया।"
दोस्तों ये किसी अन्य का नहीं बल्कि उन 15-16 साल के लड़कों का कहना है, जिन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि 9 लड़कियों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बना डाले और  ताज्जुब की बात ये है कि यह सब उन लोगों ने किसी को ब्लैकमेल करने या पैसों के लिए नहीं किया, बल्कि मानसिक विकृति इसकी वजह बनी। उन्होंने इसके लिए पैसे तक खर्च किए। पूछताछ में आरोपियों ने जो कबूला, उसने पुलिस को भी स्तब्ध कर दिया। अब दोनों पुलिस गिरफ्त में हैं। दरअसल 24 जनवरी को छिंदवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग का मामला सामने आया था। कोतवाली टीआई आशीष कुमार ने बताया कि नागपुर रोड पर रहने वाली तीन लड़कियां थाने पहुंचीं। शिकायत की कि उनकी तस्वीरों को एडिट कर अश्लील (न्यूड) फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि आरोपियों ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए हैं। एक युवक के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है। मामला गंभीर होने से तुरंत साइबर टीम की मदद से जांच शुरू की।
मोबाइल से मिले साक्ष्यों के आधार पर केस दर्ज किया गया। सोशल मीडिया पर अपलोड फोटो-वीडियो और मोबाइल से मिले सबूतों के आधार पर आरोपियों की पहचान हुई। दोनों आरोपी नाबालिग निकले।
पीड़िता ने बताया आरोपियों के मोबाइल पर मिले न्यूड फोटो-वीडियो
पीड़ित लड़की ने पुलिस को बताया कि मैंने 12वीं तक पढ़ाई की है। दो सहेलियां हैं। 24 जनवरी की रात करीब 11 बजे मोहल्ले में ही रहने वाला एक लड़का घर आया। उसने मुझे बुलाया और अपने मोबाइल में टेलीग्राम एप पर मेरी दोनों सहेलियों के एआई जनरेटेड न्यूड फोटो दिखाए।
फोटो देखते ही मैंने उसे डांटा। पूछा- तूने मेरी और सहेलियों के ऐसे फोटो क्यों बनाकर वायरल किए? हमें बदनाम क्यों रहे हो? मैंने उसका मोबाइल चेक किया तो उसने सहेलियों के अश्लील फोटो अपने दोस्तों को वाट्सएप के जरिए शेयर किए थे। मैंने सहेलियों और उनके परिवारों को उनके न्यूड फोटो वायरल होने की जानकारी दी। इसके बाद थाने पहुंची।
आरोपी बोले - टेलीग्राम पर न्यूड कंटेंट सर्च किया
पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने मोहल्ले की लड़कियों को निशाना बनाया है। आरोपी और पीड़ित दोनों एक-दूसरे को अच्छे से जानते थे। यही वजह थी कि उन्हें तस्वीरें हासिल करने में मशक्कत नहीं करना पड़ी।
शिकायत करने वाली तीन पीड़ित थीं, जिनकी सामान्य सोशल मीडिया तस्वीरों को एडिट कर न्यूड फोटो और वीडियो में बदला गया था। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जो कबूल किया, उसने जांच को और गंभीर बना दिया।
उन्होंने बताया कि वे 8-9 लड़कियों की तस्वीरों के साथ ऐसा कर चुके हैं। इसके बाद टीम अब यह पता लगाने में जुट गई कि इन्होंने इस तरह की सामग्री और किन-किन प्लेटफॉर्म पर साझा की है। पुलिस के लिए बड़ा चैलेंज यह था कि जब तक वे नाबालिग का मोबाइल जब्त करते, तब तक वे मामले से जुड़ा डेटा डिलीट कर चुके थे। साइबर टीम की मदद से कुछ डेटा रिकवर हुआ। अभी भी मोबाइल और डिजिटल स्रोतों की मदद से डेटा रिकवर करने की प्रक्रिया जारी है।
पूछताछ में एक आरोपी ने बताया कि एक ही मोहल्ले में रहने के चलते कुछ लड़कियों से जान-पहचान हो गई। इनमें कुछ उम्र में बड़ी भी हैं। दोस्ती के कारण इंस्टा पर एक-दूसरे से जुड़ गए।
सोच इतनी घटिया
"हम ये वीडियो सिर्फ अपनी लस्ट (हवस) के लिए बनाते थे। देखना चाहते थे कि जिन लड़कियों के साथ हम हर समय रहते हैं, वे बिना कपड़ों के कैसी दिखेंगी।
जब भी उन्हें देखते, हमारी यह इच्छा और बढ़ जाती। हम उन्हें बिना कपड़ों के देखना चाहते थे, इसलिए पहले टेलीग्राम पर न्यूड कंटेंट सर्च किया। फोटो-वीडियो ढूंढने पर इससे जुड़ी कुछ लिंक खुल गईं। हम इन ग्रुपों से जुड़ गए और पोर्न वीडियो देखने लगे।
कुछ समय पहले ग्रुप में पॉड के माध्यम से वीडियो बनाने का ऑप्शन मैसेज आया। इस लिंक पर क्लिक करने पर 549 रुपए की डिमांड आई। यह भी मैसेज आया कि लिंक से कोई भी फोटो देकर न्यूड फोटो और उसके वीडियो मिल जाएंगे।
इंस्टाग्राम पर हमारे साथ जुड़ी लड़कियों के फोटो स्क्रीनशॉट लेकर उसमें डाले तो उन्हीं की जैसी लड़कियों के शरीर पर चेहरा लगकर वीडियो बनाकर हमारे पास आ गया। यह वीडियो सिर्फ हम अपने लिए बनाते थे, इसे देखकर हमें लस्ट (हवस) होता था। हम इसके माध्यम से किसी के भी फोटो बना लिया करते थे।
पूछताछ में लड़कों ने बताया कि 8 से 9 लड़कियों के फोटो के माध्यम से वीडियो बनाए। हालांकि, मोबाइल से तीन लड़कियों के अब तक फोटो-वीडियो मिले हैं। आरोपियों ने अकाउंट डिलीट कर दिया, इसलिए डेटा रिकवर करने में साइबर सेल जुटी है।
कैसे बनाते थे फर्जी न्यूड फोटो और वीडियो आरोपियों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम पर आपस में जुड़े थे। यहीं से लड़कियों की तस्वीरें डाउनलोड करते या स्क्रीनशॉट लेते थे। फिर उन्हें टेलीग्राम के जरिए उस एप पर अपलोड करते थे। एप पर मात्र 549 रुपए देकर तस्वीरों को AI के जरिए न्यूड फोटो और पोर्नोग्राफिक वीडियो में बदला जा सकता था।
तैयार वीडियो इतने वास्तविक दिखते थे कि असली और नकली में फर्क करना लगभग नामुमकिन था। उन्होंने बताया कि 549 रुपए देने पर 30 दिन तक आप लॉग-इन कर सकते हैं।
आरोपियों के मुताबिक, वे 2024 से इस तरह की हरकतें कर रहे थे। हाल में दो लड़कों के बीच गर्लफ्रेंड को लेकर हुए विवाद ने इस राज से पर्दा उठा दिया। झगड़े के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ आपत्तिजनक फोटो-वीडियो इनके नाबालिग दोस्तों के मोबाइल में हैं।
अपना बचाव करने एक आरोपी खुद पीड़ित के पास पहुंचा। दूसरे का नाम लेते हुए यह बात बताई। उसे लगा कि अपनी ऐसी तस्वीर देखकर लड़की डर जाएगी और मामला दब जाएगा, लेकिन हुआ इसका उलटा।
वीडियो देखकर पीड़ित ने हिम्मत दिखाई। उसने आरोपी के मोबाइल में मौजूद अन्य लड़कियों की तस्वीरें और वीडियो देखे, संबंधितों से संपर्क किया। इसके बाद तीनों पीड़ितों ने एक साथ कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
डिजिटल दुनिया में सतर्कता विकल्प नहीं, अब जरूरत
टीआई आशीष कुमार का कहना है कि यह घटना समाज के लिए चेतावनी बनकर सामने आई है। डिजिटल दुनिया में सतर्कता अब विकल्प नहीं, आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने चार मोबाइल जब्त किए हैं। रिकवर डेटा के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 79 BNS और 67 IT Act के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में क्रमशः 5 साल और 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि ये फोटो और वीडियो किन-किन लोगों के साथ साझा किए गए। मामले में पीड़ित और आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।
असली और नकली में फर्क जानना जरूरी साइबर एक्सपर्ट हिमांशु रघुवंशी का कहना है कि यह मामला बताता है कि AI तकनीक का गलत हाथों में पड़ना कितना खतरनाक है। साधारण सोशल मीडिया तस्वीरों का दुरुपयोग कर किसी की प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति पर गंभीर आघात पहुंचाया जा सकता है।
AI तकनीक की मदद से किसी दूसरे के चेहरे को किसी दूसरी बॉडी से लगा दिया जाता है। यह इतनी सफाई से होता है कि पहचान करना मुश्किल होता है। इसे डीपफेक कहते हैं।
इस तरह किया कीजिए पहचान
AI से तैयार किए गए फोटो और वीडियो में असली और नकली की पहचान करना कठिन तो है, लेकिन आप कुछ बिंदुओं पर ध्यान देकर इन्हें पहचान सकते हैं। इस तकनीक से तैयार किए गए फोटो में चेहरे की चमक ज्यादा रहेगी, जबकि इससे जुड़े व्यक्ति का चेहरा इतना चमकदार नहीं होता।
वीडियो के मामले में चेहरे के हाव-भाव से आप पहचान सकते हैं, क्योंकि इसमें चेहरे के एक्सप्रेशन कुछ अलग नजर आते हैं। इसके साथ ही इस दौरान की जाने वाली लिप सिंक भी अलग होती है।
जानें क्या है डीपफेक
डीपफेक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी है, जिसका इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति के चेहरे, हाव-भाव, आवाज या बोलने के तरीके की नकल तैयार की जा सकती है। इसके जरिए किसी के वीडियो या फोटो को इस तरह बदला जा सकता है कि वह देखने में पूरी तरह असली लगे, जबकि वह फर्जी या नकली होता है। इसे वीडियो, ऑडियो और फोटो तीनों फॉर्म में तैयार किया जा सकता है।
डीपफेक की पहचान कैसे करें
वीडियो इस तरह पहचानें
*पलकें असामान्य तरीके से झपक सकती हैं।
*चेहरे के हाव-भाव अलग हो सकते हैं।
*बैकग्राउंड में धुंधलापन या गड़बड़ी हो सकती है।
*वीडियो का रेजोल्यूशन बहुत ज्यादा होता है।
*वीडियो बहुत ज्यादा क्लीयर और शाइनिंग होता है।
*वीडियो की लाइट और शैडो में फर्क हो सकता है।
ऑडियो ऐसे पहचानें
*आवाज रोबोट जैसी लग सकती है।
*वॉइस टोन और पिच में बदलाव हो सकता है।
*बोलते समय कुछ हिस्सों में आवाज कट सकती है।
*लिप मूवमेंट और आवाज में तालमेल नहीं होता है।
* शब्दों का उच्चारण असामान्य हो सकता है।
फोटो पहचानें
* चेहरे के आसपास धुंधला दिख सकता है।
* बाल, कान या आंख के आकार में अंतर हो सकता है।
*बैकग्राउंड में चीजें टेढ़ी-मेढ़ी या असामान्य हो सकती हैं।
*स्किन टेक्सचर बहुत स्मूद या प्लास्टिक जैसा लग सकता है।

#धमाका_अलर्ट: बोर्ड परीक्षा का बिगुल बजा, सड़कों पर बारात के जाम, सड़क से लेकर विवाह घरों में कान फोड़ू डीजे का शोर, शहर में 5 तारीख से लेकर 10 तारीख के बीच जोरदार शादी समारोह

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शिवपुरी। शहर में आज 5 तारीख से लेकर 10 तारीख के बीच जोरदार शादी समारोह है। कई रसूखदारों के बेटे और बेटियों का विवाह नगर के विवाह घरों से होना है। आज पांच जनवरी की ही बात करें तो नगर के हर हिस्से में फिल्मी गानों पर गाजे, बाजे, ढोल और कान फोड़ू डीजे का शोर सुनाई दे रहा है। उस पर विवाह घर के बाहर सड़कों पर पार्किंग और जाम अलग से लोगों का स्वागत कर रहे हैं। इधर बोर्ड की परीक्षा का बिगुल बज चुका है और विवाह घरों को रात दो बजे तो तेज आवाज में डीजे बजाने की आदत है। ऐसे में लोग जिला प्रशासन की तरफ देख रहे है जो हर बार शादी सीजन के पूर्व बैठक करता है। ट्रैफिक पुलिस भी विवाह घर संचालक और डीजे वालों से रूबरू होकर फोटो के साथ खबर प्रकाशित कराती है कि तेज आवाज में डीजे बजाया तो जब्त होगा। रात दस बजे के बाद डीजे नहीं बजाए जाएंगे लेकिन हकीकत में होता कुछ नहीं है। बता दें कि पांच, छह, नौ, दस फरवरी को सर्वाधिक विवाह समारोह है, इसलिए ट्रैफिक पुलिस को घोंसले से बाहर निकलकर सड़कों पर जाम से 
बिना पर्याप्त पार्किंग के चल रहे विवाह घर, नपा, पुलिस नोटिस तक सीमित
शिवपुरी शहर में संचालित लगभग 75 प्रतिशत मैरिज गार्डन ऐसे हैं, जहाँ पार्किंग के नाम पर एक इंच जमीन भी उपलब्ध नहीं है। शहर के रिहायशी इलाकों और मुख्य मागों पर स्थित ये गार्डन नियम-कायदों को ठेंगे पर रखकर संचालित हो रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी विवाह घर को नगर पालिका से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन हकीकत यह है कि मु‌ट्ठी भर गार्डनों को छोड़कर किसी के पास वैध अनुमति नहीं है। नगर पालिका प्रशासन अब तक इनकी जाँच-पड़ताल शुरू करने की हिम्मत भी नहीं जुटा सका है।
शहर में मैरिज गार्डनों की संख्या को लेकर भी नगर पालिका के आँकड़े सन्देह के घेरे में हैं। सरकारी कागजों में जो चिह्नित हैं, जिनसे सम्पत्ति कर वसूला जाता है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर 150 से अधिक गार्डन धड़ल्ले से चल रहे हैं। बिना लाइसन्स और बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे ये गार्डन न केवल राजस्व को चूना लगा रहे हैं, बल्कि शहर की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गए हैं। एडवांस बुकिंग का हवाला देकर अधिकारी अब इन पर ताला डालने से कतरा रहे हैं, जो उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खडे करता है।
शहर के कई मैरिज गार्डन तो पर्यावरण के लिए भी नासूर बन चुके हैं। कुछ गार्डन अपनी गंदगी और सीवर का कचरा सीधे जल स्रोतों या खुले नालों में बहा रहे हैं। रिहायशी इलाकों के बीच स्थित गार्डनों में देर रात तक बजने वाले डीजे और आतिशबाजी ने बुजुर्गों और बीमारों का जीना मुहाल कर रखा है लेकिन मजाल है कि नगर पालिका या प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के कान पर जूं तक रेंग जाए! पिछले वर्ष भी प्रशासन ने' दिखावे' के लिए दो दर्जन गार्डनों को नोटिस थमाए थे। व्यवस्था सुधारने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन नतीजा सिफर रहा। न पार्किंग बनी, न ही अग्निशमन यंत्र लगे। ऐसा लगता है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल नोटिस भेजने और फाइलें भरने तक सीमित है। सीएमओ के निर्देश केवल अखबारों की सुर्खियों तक रह जाते हैं, जबकि घरातल पर जनता जाम में फँसकर अपनी किस्मत को कोसती रहती है। शहर की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक शिवपुरी के नागरिक मैरिज गार्डन संचालकों के मुनाफे की कीमत जाम में फॅसकर चुकाते रहेंगे।
इन 10 शर्तों की सरेआम उड़ रही धज्जियाँ
* पार्किंग का अभावः कुल क्षेत्रफल का 30% हिस्सा पार्किंग के लिए होना चाहिए, जबकि यहाँ गाड़ियों सड़क पर खड़ी होती है।
 अवैध संचालनः बिना निकाय पंजीकरण के चल रहे गार्डन अवैध श्रेणी में हैं।
* दूरी का नियमः स्कूल-अस्पताल से 100 मीटर की दूरी का नियम कागजों में दफन है।
* बारात बीच सड़क पर चलती हैं जिससे जाम लगता है, टोकने पर विवाद होता है।
* बड़े बड़े डीजे इस साल करीब पांच न्यू बनकर तैयार हुए हैं उनसे भी सड़क पर जाम लगता है।
* ध्वनि प्रदूषणः रात 10 बजे के बाद भी कानफोडू संगीत जारी रहता है।
* प्लास्टिक पर कोई रोक नहींः प्रतिबन्धित थर्माकोल और प्लास्टिक का घडल्ले से उपयोग।
कचरा प्रबन्धनः कचरा सड़क पर या नालियों में फेंक दिया जाता है।
* आतिशबाजीः सड़क पर आतिशबाजी से राहगीरों की जान को खतरा बना रहता है।
* फायर सुरक्षा आपातकालीन निकास और फायर फाइटिंग सिस्टम का दूर-दूर तक पता नहीं है।












#धमाका_डिफरेंट: "पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर जोन सक्सेना वार्षिक निरीक्षण के लिए आए शिवपुरी, हो गया बलवा, छोड़ने पड़े आंसू गैस के गोले, बलबा ड्रिल देख बोले राह चलते लोग"

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शिवपुरी। पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर जोन श्री अरविंद कुमार सक्सेना ने गुरुवार को जिला शिवपुरी पुलिस का वार्षिक निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिस सम्मेलन आयोजित कर पुलिसकर्मियों की समस्याओं का समाधान किया गया एवं पुलिस लाइन व पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निरीक्षण के साथ बलवा ड्रिल आयोजित की गई। जिसे देख लोग बोले हमें लगा बलवा हो गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए। बाद में पता लगा बलवा ड्रिल थी। 
जानकारी के अनुसार आज दिनांक 05.02.2026 को पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर जोन श्री अरविंद कुमार सक्सेना द्वारा जिला शिवपुरी का वार्षिक निरीक्षण किया जिसमें पुलिस अधीक्षक शिवपुरी श्री अमन सिंह राठौड़, जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी, थाना प्रभारी एवं पुलिस लाईन व पुलिस अधीक्षक कार्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
सर्वप्रथम पुलिस महानिरीक्षक द्वारा परेड ग्राउण्ड उपस्थित होकर परेड की सलामी ली एवं परेड का बारीकी से निरीक्षण किया। अच्छी वेशभूषा वाले अधिकारी कर्मचारियों को पुरुष्कृत किया। परेड के बाद बलवा ड्रिल का आयोजन किया गया, बलवा ड्रिल की पार्टियों के द्वारा बलबा ड्रिल का बखूबी प्रदर्शन किया। परेड व बलवा ड्रिल निरीक्षण के बाद पुलिस महानिरीक्षक द्वारा पुलिस सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसके माध्यम से पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों की समस्याओं को सुना जाकर तत्काल समाधान के लिये संबंधितों को आदेशित किया गया । सम्मेलन के दौरान कई रचनात्मक सुझाव पुलिस कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत किये गये जिन्हें क्रियान्वयन हेतुं पुलिस मुख्यालय भेजे जाने के संबंध मे बताया गया । इस अवसर पर आईजी महोदय द्वारा पुलिस कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुये वर्तमान तकनीकी परिदृश्य में सायबर अपराधों, महिलाओं पर होने बाले अपराधों एवं बेहतर पुलिसिंग के लिये व तकनीक आधारित अपराधों से निपटने के लिये खुद को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने एवं बेहतर स्किल डबलप करने की आवश्यकता को समझाया ।
तत्पश्चात पुलिस महानिरीक्षक द्वारा पुलिस लाइन शिवपुरी एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निरीक्षण किया गया, पुलिस लाइन की आर्म्स शाखा, एमटी शाखा, स्टोर शाखा एवं अन्य शाखाओं का निरीक्षण किया गया एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय की समस्त शाखाओं मे जाकर शाखाओं का निरीक्षण किया एवं रिकॉर्ड को चैक करते हुये सुसज्जित रिकॉर्ड संधारण पाये जाने पर प्रशंसा की गयी एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये।
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