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#धमाका_बड़ी_खबर: सीवर प्रोजेक्ट में लापरवाही: हाईकोर्ट का कड़ा फैसला, पीएचई, नगर पालिका और इफको पर लगा 12.08 करोड़ रुपये का जुर्माना, हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई: शिवपुरी में सालों से अधूरे पड़े सीवर प्रोजेक्ट पर न्यायालय का डंडा, याचिकाकर्ता को रिपोर्ट पर जवाब के लिए मिला तीन हफ्ते का समय

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shivpuri शिवपुरी। शिवपुरी के बहुचर्चित और सालों से लटके सीवर प्रोजेक्ट में बरती गई भारी लापरवाही पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रोजेक्ट से जुड़े तीन प्रमुख विभागों—पीएचई (PHE), नगर पालिका और डीपीआर (DPR) तैयार करने वाली एजेंसी इफको (Effco) पर सामूहिक रूप से 12 करोड़ 8 लाख रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड (जुर्माना) लगाया है। हाईकोर्ट ने सोमवार को विभागीय अधिकारियों की पेशी के बाद यह आदेश जारी किया।
किस विभाग पर कितना लगा जुर्माना?
जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने तीनों विभागों को इस बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराया है। जुर्माने का वर्गीकरण इस प्रकार है:
  • पीएचई (PHE) विभाग: सबसे अधिक 6 करोड़ 8 लाख रुपये का जुर्माना।
  • नगर पालिका: लापरवाही के लिए 4 करोड़ 62 लाख रुपये का अर्थदंड।
  • इफको (Effco): गलत या त्रुटिपूर्ण डीपीआर तैयार करने के लिए 1 करोड़ 35 लाख रुपये का दंड।
  • क्या है पूरा मामला और क्यों हुई कार्रवाई?
  • साल 2009 में शिवपुरी को 'झीलों की नगरी' के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से 68 करोड़ रुपये की लागत वाले इस महत्वाकांक्षी सीवर प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। लेकिन शुरुआत से ही यह प्रोजेक्ट विवादों और सुस्त रफ्तार का शिकार रहा। कभी वन विभाग की आपत्तियां तो कभी अन्य विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण काम सालों-साल खिंचता चला गया। इस लेटी-लतीफी पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और तत्कालीन खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी अपनी समीक्षा बैठकों में कड़ी नाराजगी जाहिर कर चुके थे। आखिरकार अधिकारियों के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के खिलाफ वर्ष 2024 में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पिटीशन) दायर की गई थी।याचिका के बाद न्यायालय के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसने दो बार शिवपुरी आकर जमीनी हकीकत का मुआयना किया। जांच दल द्वारा सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट में तीनों विभागों की गंभीर लापरवाही उजागर होने के बाद हाईकोर्ट ने यह बड़ा फैसला सुनाया। अब न्यायालय ने पिटीशन तैयार करने वाले अधिवक्ता को इस पूरी रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।बदहाली का दंश: धूल के गुबार से दमे और सांस के मरीज बने सैकड़ों नागरिक
  • इस सीवर प्रोजेक्ट की कछुआ चाल और संबंधित विभागों की घोर लापरवाही का सबसे दर्दनाक खामियाजा शिवपुरी के आम नागरिकों को भुगतना पड़ा है। प्रोजेक्ट के नाम पर ठेकेदारों और विभागों ने पूरे शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक को पूरी तरह खोदकर बेसहारा छोड़ दिया। पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों को नियम के अनुसार न तो ठीक से बंद किया गया और न ही उनका समतलीकरण (रिपेयरिंग) हुआ।नतीजतन, गड्ढों में तब्दील हो चुकीं इन सड़कों से दिन-रात उड़ने वाली धूल ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया। हवा में तैरते इस धूल के गुबार के कारण नगर के सैकड़ों लोग दमा, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस की गंभीर बीमारियों के शिकार हो गए। स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के कारण स्थिति और विकट हो गई। हालत यह हो गई कि सांस की इन गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मजबूर नागरिकों को उचित उपचार और अपनी जान बचाने के लिए ग्वालियर, दिल्ली और अन्य बड़े महानगरों के चक्कर काटने पड़े। लोगों की गाढ़ी कमाई इलाज और डॉक्टरों की फीस में स्वाहा हो गई, जिसके लिए पूरी तरह से प्रशासनिक विभागों की ये लापरवाही जिम्मेदार है।ग्वालियर के डॉक्टरों ने शिवपुरी को दिया नया नाम—"धूल नगरी", सीवर प्रोजेक्ट की लापरवाही ने फेफड़ों में घोला ज़हर
  • शिवपुरी में सीवर प्रोजेक्ट के नाम पर बरसों से खोदी गईं और लावारिस छोड़ दी गईं सड़कों ने यहाँ की आबोहवा को इस कदर ज़हरीला बना दिया है कि अब बाहरी शहरों के विशेषज्ञ भी इस पर हैरत जता रहे हैं। स्थिति यह हो चुकी कि ग्वालियर के बड़े डॉक्टर और पल्मोनोलॉजिस्ट (सांस रोग विशेषज्ञ) अब मरीजों के पते में 'शिवपुरी' देखते ही उसे "धूल नगरी" के नाम से पहचानने लगे।
अस्पतालों में ओपीडी के दौरान जब भी कोई मरीज गंभीर रूप से संक्रमित फेफड़ों या सांस की क्रॉनिक बीमारी के साथ पहुंचता है और अपना गृह जिला शिवपुरी बताता है, तो डॉक्टर तुरंत समझ जाते हैं कि यह बीमारी और कुछ नहीं बल्कि शहर की सड़कों से उड़ने वाले उसी जानलेवा धूल के गुबार का नतीजा है।
डॉक्टरों की चिंता: साधारण एलर्जी से सीधे दमा-अस्थमा के शिकार हो रहे लोग
ग्वालियर और दिल्ली के डॉक्टरों के अनुसार, शिवपुरी से आने वाले मरीजों में फेफड़ों की कार्यक्षमता (लंग कैपेसिटी) बहुत तेजी से कम पाई जा रही है। सड़कों पर उड़ने वाली बारीक धूल (सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) सांस के जरिए सीधे लोगों के फेफड़ों की गहराई तक पहुंच रही है। इसके कारण:
  • बच्चों और बुजुर्गों में: ब्रोंकाइटिस और सांस फूलने की समस्या महामारी की तरह फैली है।
  • युवाओं में: जो लोग पहले कभी पूरी तरह स्वस्थ थे, वे अब लगातार इनहेलर (पंप) का सहारा लेने को मजबूर हैं।
  • पहचान: ग्वालियर के मेडिकल सर्कल्स में अब शिवपुरी के इस संकट को एक 'प्रशासनिक जन स्वास्थ्य आपदा' के रूप में देखा जा रहा है, जहां लापरवाही ने पूरे शहर को बीमार बना दिया है।
हाईकोर्ट द्वारा अब पीएचई, नगर पालिका और इफको पर 12.08 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाने के बाद, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह जुर्माना तो सिर्फ सरकारी खातों में जाएगा, लेकिन विभागों की इस घोर लापरवाही ने शिवपुरी के सैकड़ों परिवारों को जो जिंदगी भर की सांस की बीमारी और ग्वालियर-दिल्ली के अस्पतालों के चक्कर काटने का दर्द दिया है, उसका मुआवजा कौन देगा?



#धमाका_न्यूज: आज फिर नो एंट्री में प्रवेश कर रहे 5 भारी वाहनों को पकड़ा ट्रैफिक पुलिस ने ठोका जुर्माना, देखिए video

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शिवपुरी। दिनांक 4.11.26। पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया के निर्देश पर बुधवार को यातायात पुलिस द्वारा नो एंट्री में प्रवेश कर रहे 5 भारी वाहनों को जप्त कर थाना यातायात लाया गया जहां प्रत्येक वाहन पर ₹5000 जुर्माना या न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी। यातायात पुलिस द्वारा नो एंट्री में भारी वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। 
यातायात पुलिस द्वारा दो दिवस में 11 भारी वाहनों पर कार्रवाई की गई है।












#धमाका_दो_ बड़ी_खबर: एल्डरमैन प्रभात मिश्रा ने CMO से कहा, प्राचीन श्री सिद्धेश्वर मेला समय पर लगवाएं, पार्षद प्रदीप शर्मा ने नवाब साहब रोड का नाम शिवाजी मार्ग करने का बिंदु कराया पास

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shivpuri शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका की बैठक में शहर के प्रमुख मार्ग 'नवाब साहब रोड' का नाम बदलकर 'शिवाजी मार्ग' करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया है।
यह मांग वार्ड क्रमांक 8 के पार्षद प्रदीप शर्मा द्वारा परिषद के सामने रखी गई थी, जिसे नगर पालिका परिषद ने अपनी बैठक में मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव पास होने के बाद पार्षद प्रदीप शर्मा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि "शिवपुरी में कोई नवाब नहीं रहते, इसलिए मार्ग का नाम शिवाजी मार्ग किया जाना एक अच्छा निर्णय है"।
यह सड़क शिवपुरी की एक बेहद व्यस्त सड़क है, जिसके चौड़ीकरण (करीब 800 मीटर) और डिवाइडर निर्माण को लेकर भी पार्षद प्रदीप शर्मा और स्थानीय विधायक देवेंद्र कुमार जैन लोक निर्माण विभाग (PWD) के माध्यम से लगातार सक्रिय हैं। जिस बैठक में यह नाम बदलने का प्रस्ताव पास हुआ, वह काफी हंगामेदार रही और इसमें 3 करोड़ रुपये की मोटरों की दर स्वीकृति के मुद्दे पर विवाद होने के कारण 15 पार्षद बैठक छोड़कर बाहर चले गए थे।
एल्डरमैन प्रभात मिश्रा ने उठाया सिद्धेश्वर मेला का मुद्दा
शिवपुरी नगर पालिका परिषद के नवनियुक्त एल्डरमैन प्रभात मिश्रा ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को पत्र सौंपकर शहर के ऐतिहासिक और प्राचीन श्री सिद्धेश्वर बाणगंगा मेले को समय पर आयोजित कराने की मांग की है।
प्रभात मिश्रा ने CMO का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि श्री सिद्धेश्वर मेला शिवपुरी की वर्षों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर और पहचान है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि तैयारियों में देरी के कारण हर साल इस ऐतिहासिक मेले का समय प्रभावित होता है, जिससे स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को असुविधा होती है।
मामले के मुख्य बिंदु:
दुकानदारों के हितों की रक्षा: एल्डरमैन प्रभात मिश्रा ने कहा कि समय पर मेला लगने से बाहरी व स्थानीय छोटे व्यापारियों को रोजगार के उचित अवसर मिलेंगे और वे समय पर अपनी दुकानें व्यवस्थित कर पाएंगे।
समय पर पुख्ता तैयारियां: उन्होंने नगर पालिका प्रशासन और CMO से मेले की निविदा (टेंडर प्रक्रिया), लाइट, पानी, सुरक्षा और भूखंड (प्लॉट) आवंटन जैसे सभी प्रबंध समय रहते पूरे करने का आग्रह किया है ताकि अंतिम समय में कोई अव्यवस्था न हो।
सांस्कृतिक महत्व: सिद्धेश्वर मेला शिवपुरी के जनमानस की आस्था और मनोरंजन का एक बड़ा केंद्र है, जिसे सुचारू रूप से संचालित करना नगर पालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है।












#धमाका_न्यूज: एनडीपीएस कोर्ट शिवपुरी ने 22 ग्राम स्मैक मामले में सुनाया फ़ैसला

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* एनडीपीएस कोर्ट शिवपुरी ने 22 ग्राम स्मैक मामले में आरोपी को किया दोषमुक्त; 
* धारा 50 एवं 52ए के विधिक प्रावधानों के उल्लंघन पर न्यायालय का फैसला 
* सीनियर अधिवक्ता श्री सैयद नसीर अली एवं अधिवक्ता श्री संदीप शर्मा ने की शानदार पैरवी
​शिवपुरी। विशेष न्यायाधीश (एन.डी.पी.एस. एक्ट), शिवपुरी श्री दिनेश कुमार शर्मा के न्यायालय ने अवैध मादक पदार्थ स्मैक रखने के आरोप में विचारण का सामना कर रहे अभियुक्त प्रशांत राय को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त (बरी) करने का आदेश पारित किया है। मामले में आरोपी की ओर से  पैरवी  सीनियर अधिवक्ता श्री सैयद नसीर अली एवं अधिवक्ता श्री संदीप शर्मा द्वारा की गई। 
​मामले का संक्षिप्त विवरण
​अभियोजन के अनुसार 28 जुलाई 2024 को पुलिस थाना करैरा के ए.एस.आई. चरण सिंह को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी ग्राम टीला के बडोरा तिराहे पर अवैध मादक पदार्थ स्मैक बेचने की फिराक में खड़ा है। पुलिस टीम ने मौके पर दबिश देकर ग्राम टीला निवासी प्रशांत राय (उम्र 20 वर्ष) को घेराबंदी कर पकड़ा। पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान आरोपी की पैंट की जेब से 22 ग्राम स्मैक एवं एक इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा बरामद किया गया था। इसके आधार पर पुलिस ने थाना करैरा में अपराध क्रमांक 549/2024 दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध धारा 8 सहपठित धारा 21(ख) एनडीपीएस एक्ट के तहत चालान न्यायालय में पेश किया था ।












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