सहारा इंडिया की सहकारी समितियों में अपनी मेहनत की कमाई जमा करने वाले निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। थाना कोतवाली, जिला शिवपुरी द्वारा एक आधिकारिक नोटिस जारी कर निवेशकों को उनके फंसे हुए पैसे की वापसी (रिफंड) की प्रक्रिया के बारे में सूचित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई प्रक्रिया
पुलिस द्वारा जारी पत्र के अनुसार, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 'पिनाक मोहंती विरुद्ध भारत संघ' (W.P. No. 191/22) मामले में सहारा समूह की सहकारी समितियों के निवेशकों की जमा राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के अनुपालन में केंद्र सरकार ने निवेशकों के लिए एक समर्पित पोर्टल शुरू किया है।
कैसे करें आवेदन?
निवेशक अपने रिफंड के लिए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज (CRCS) रिफंड पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि:
आवेदन केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से लॉग-इन करके किया जा सकता है।
वर्तमान अपडेट्स के अनुसार, अब निवेशक ₹10 लाख तक की राशि के लिए दावा (Claim) कर सकते हैं।
जिन निवेशकों के आवेदन पहले किसी तकनीकी कारण से रिजेक्ट हो गए थे, वे पोर्टल पर Resubmission (पुनः आवेदन) के माध्यम से अपनी कमियों को सुधार सकते हैं।
45 दिनों में भुगतान का लक्ष्य
सरकारी जानकारी के अनुसार, सही तरीके से आवेदन करने और सत्यापन पूरा होने के बाद, लगभग 45 कार्य दिवसों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अब तक 40 लाख से अधिक निवेशकों को ₹8,800 करोड़ से ज्यादा की राशि लौटाई जा चुकी है।
शिवपुरी पुलिस ने यह सूचना जनहित में जारी की है ताकि जिले के अधिक से अधिक निवेशक जागरूक होकर आधिकारिक माध्यम से अपना पैसा वापस पाने की प्रक्रिया शुरू कर सकें।
नोट: निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक CRCS पोर्टल का ही उपयोग करें और किसी भी अज्ञात व्यक्ति या अनाधिकृत एजेंट के झांसे में न आएं।
शिवपुरी, 26 मार्च 2026। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 28 मार्च शनिवार को प्रातः 10:30 बजे से वन विद्यालय शिवपुरी में एक शिविर आयोजित किया जाएगा। जिसका शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा किया जायेगा।
जल, जंगल, जमीन, हरियाली आदि विषय को लेकर शिविर लगाया जा रहा है।
Mumbai मुंबई। एक अनजान मदद… जिसने एक परिवार की जिंदगी बदल दी। जी हां, हम बात कर रहे हैं दिवंगत अभिनेता फ़ारूक़ शेख़ की जिन्होंने 26/11 मुंबई हमले (2008) में ताज होटल के मेंटेनेंस कर्मचारी राजन कांबले के मारे जाने के बाद, उनके परिवार की बिना किसी पहचान के सालों तक आर्थिक मदद की थी।
2008 के मुंबई हमलों में कई लोगों ने अपने अपनों को खो दिया। उन्हीं में से एक थे ताज होटल में काम करने वाले राजन कांबले, जिन्होंने दूसरों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवा दी।
पीछे रह गईं उनकी पत्नी श्रुति और दो छोटे बच्चे…
घर में ना कोई सहारा था, ना भविष्य की कोई उम्मीद।
इसी बीच एक अखबार में इस परिवार की कहानी छपी। यह खबर एक ऐसे इंसान तक पहुंची, जिसने चुपचाप मदद करने का फैसला किया।
वो थे फ़ारूक़ शेख़।
उन्होंने तय किया कि दोनों बेटों (रोहन और अथर्व) की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएंगे। लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी—
"परिवार को कभी ना बताया जाए कि मदद कौन कर रहा है।"
हर साल वो बिना किसी नाम और पहचान के पैसे भेजते रहे।
ना कोई दिखावा, ना कोई प्रसिद्धि… सिर्फ इंसानियत। परिवार उन्हें केवल "शेख़ साहब" के नाम से जानता था।
कई साल बाद जब सच्चाई सामने आई, तब तक फ़ारूक़ शेख़ इस दुनिया में नहीं थे।
श्रुति आज भी कहती हैं—
“काश मैं उन्हें धन्यवाद कह पाती…”
आज उनके बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ रहे हैं।
और ये सब उस इंसान की वजह से हुआ, जिसने बिना नाम के किसी की जिंदगी बदल दी।
दोस्तों सच्चा हीरो वही होता है, जो बिना दिखावे के दूसरों के काम आए।
यह वाकया दिखाता है कि फ़ारूक़ शेख़ न केवल फिल्मों में बल्कि असल जिंदगी में भी एक नेक इंसान थे।