- अंतर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के उपलक्ष्य में बच्चों को आत्मरक्षा के गुण सिखाए तथा जागरुक किया
- किशोरी बालिकाऐ अपने आहार में हरेपत्तेदार सब्जियां अवश्य शामिल करें: डा. एएल शर्मा, सीएमएचओ
- बालिकाओं को आत्म रक्षा के साथ आत्म निर्भर कैसे बनना है यह पता होना चाहिए: रागिनी त्रिवेदी पीओ डीआरडीए
शिवपुरी। अंतर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस हर साल 20 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देना दुनिया भर में बच्चों के बीच जागरूकता और बच्चों के कल्याण के लिए काम करना है। शक्तिशाली महिला संगठन शिवपुरी के कार्यक्रम संयोजक रवि गोयल ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस सबसे पहले सन 1954 में मनाया गया था। इस दिन बाल अधिकारों को अपनाया गया था। हम सभी को बच्चों के अधिकारों की वकालत करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है। बच्चें ही हमारा भविष्य हैं लेकिन अगर बच्चें अपने अधिकारों से वंचित रह जाएंगे तो एक बेहतर दुनिया का निर्माण नहीं किया जा सकेगा। इसी उददेश्य को लेकर संस्था शक्तिशाली महिला संगठन, स्वास्थ विभाग महिला बाल विकास एवं ब्रिटानिया न्यूट्रीशन फाउण्डेशन ने संयुक्त रुप से फतेहपुर आंगनवाड़ी केन्द्र के खुले परिसर में बच्चों के बेतहर स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एव स्वच्छता का संन्देश देकर मनाया।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम डा. अर्जुनलाल शर्मा ने किशोरी बालिकाओं एवं सुपोषण सखी के साथ सवांद में बताया कि बच्चों के खान पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए हरे पत्तेदार सब्जियों का उपयोग अनिवार्य रुप से प्रतिदिन करना चाहिए इसके लिए प्रत्येक घर में पोषण वाटिका लगाना आवश्यक है। साथ ही आयरन फोलिक एसिड की गोली का सेवन गर्भवती एवं किशोरी बालिकाओं को अवश्य करना चाहिए जो कि आपको खून की कमी से बचाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित किशोरी बालिकाओं एवं किशोरो को जिला आत्म सुरक्षा प्रशिक्षक अमन सिंह एवं योगेश माझीं की टीम के द्वारा आत्म रक्षा के गुण सिखाऐ एवं बताया कि कभी कोई परेशानी या मुसीबत बताकर नही आती आप सभी को अपने आप को सुरक्षित करने आत्म रक्षा का हुनर सीखना चाहिए। इस मौके पर मुस्कान नामदेव, शोभा जाटव, अंकिता परिहार, राम प्यारी ओझा एवं प्रीती परिहार को आत्म रक्षा की प्रेक्टिस कराई। कार्यकम मे करीब 70 किशोरी बालिकाओं ने इस हुनर को सीखा एवं आगे भी समय समय पर इनको यह प्रशिक्षण दिया जाता रहेगा।
कार्यक्रम में डीआरडीए की परियोजना अधिकारी रागिनी त्रिवेदी ने बताय कि सभी बालिकाओं को आत्म रक्षा के साथ साथ आत्म निर्भर बनने के लिए भी आगे आना होगा दिन रात मेहनत करना होगी तो वह भी मेरे जैसे अच्छी मुकाम तक पहुंच सकती है। इसके लिए आपको खुद आगे आना होगा। युनीसेफ वाश के संभागीय समन्वयक अतुल त्रिवेदी ने कार्यक्रम मे उपस्थित सभी बच्चो को विश्व बाल दिवस की शुभकामनाए दी एवं कहा कि कोरोना काल में खुद को बचाना है तो प्रतिदिन साफ सफाई एवं हाथों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा उन्होने बच्चो को साबुन से हाथ धोने के सही तरीके भी बताए। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए कि हर बच्चे को हर अधिकार प्राप्त हो जिस पर भारत सरकार ने 1954 में हस्ताक्षर किए हुए है।
संस्था की सुपोषण सखी हर्षा कपूर ने बताया कि वयस्कों से अलग बच्चों के अधिकारों को बाल अधिकार कहा जाता है। बाल अधिकारों को चार अलग.अलग भांगों में बांटा गया है . जीवन जीने का अधिकार, संरक्षण का अधिकार, सहभागिता का अधिकार और विकास का अधिकार हमारा मानना हैं कि बच्चे किसी भी देश के विकास की नींव होते हैं यानी अगर हमें अपना भविष्य संवारना है तो बच्चों को तंदुरुस्त और साक्षर बनाना होगा। एक और सुपोषण सखी राम प्यारी ने कहा कि हमे अपने आस पास बाल मजदूरी एवं बाल श्रम को रोकना होगा तभी बच्चों के अधिकार सुरक्षित रह सकते है एवं बच्चों के साथ होने वाले यौन शौषण एवं लिंग जांच का भी विरोध करना होगा तो हम एक सभ्य एवं बच्चों के अनुकूल बातावरण की कल्पना कर सकते है।
कार्यक्रम में सभी वक्ताओं अतिथियों को एक एक प्लाटं देकर उनका स्वागत किया। कार्यकम में डा. एएल शर्मा सीएमएचओ, रगिनी त्रिवेदी पीओ डीआरडीए, सत्यमूर्ति पाण्डेय, अतुल त्रिवेदी सभांगीय समन्वय वाश, शक्तिशाली महिला संगठन के रवि गोयल एवं उनकी टीम, सुपोषण सखी प्रीती परिहार , पूजा ओझा, रेखा नामदेव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताए, सहायिकाए, आशा, 60 किशोरी बालिकाए एवं 15 न्यूट्रीशन चैम्पियन ने भाग लिया।

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