हिण्डौन। टोल प्लाजा पर मनमानी नई कहानी नहीं है। बाउंसर अंदाज कहें या दादागिरी भी टोल प्लाजा पर देखने को अक्सर मिल जाती है। इसी ठसक में हिण्डोन राजस्थान के एक टोल पर अधिमान्य पत्रकार से न सिर्फ टोल बसूल लिया बल्कि जब पत्रकार साथी ने टोल पर चस्पा बोर्ड पर अधिमान्य पत्रकार के वाहन संबंध में उल्लेख न किए जाने का हवाला दिया तो टोल कर्मियों ने बदसलूकी करते हुए आंख तरेरी। इस आत्मसम्मान को ठेस लगने के बाद पत्रकार ने कानूनी मदद लेते हुए कलक्टर व एनएचएआई कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई तो अब टोल कम्पनी को 25 हजार जुर्माना भरने का नोटिस थमा दिया गया है। जानकारी के अनुसार टोल मुक्त वाहनों की सूची में शामिल होने के बावजूद राजस्थान सरकार से अधिमान्य पत्रकारों से टोल राशि की अवैध वसूली करने के मामले में राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम के भरतपुर स्थित परियोजना निदेशक ने टोल संचालन कर रही कंपनी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना ठोका है। वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रकेतु बेनीवाल ने करौली के जिला कलेक्टर सिद्धार्थ सिहाग को भेजी शिकायत में लिखा कि 21 अक्टूबर 2020 को भरतपुर जाते समय धंधावली स्थित टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने उनसे अधिमान्य पत्रकार की आईडी दिखाने को कहा लेकिन उसे दरकिनार करते हुए 65 रुपए टोल राशि वसूल कर ली। इतना ही नहीं पत्रकार चंद्रकेतु बेनीवाल ने जब टोल मुक्त वाहनों वाला बोर्ड ना लगाने के बारे में सवाल किया तो टोल कर्मियों ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनके साथ अभद्रता की। तब बेनीवाल की शिकायत पर जिला कलेक्टर ने राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम के भरतपुर स्थित परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर उक्त मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद आरएसआरडीसी के परियोजना निदेशक शिवस्वरूप मीणा ने बीते गुरुवार को भरतपुर-बयाना-गंगापुर-भाड़ौती हाईवे पर सूरौठ टोल बूथ संचालक की फर्म मैसर्स गणेश गड़िया कंस्ट्रक्शन कंपनी को अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन मानते हुए कंपनी पर 25 हजार रुपए की शास्ती अधरोपित की है। निगम के परियोजना निदेशक ने इस जुर्माने की राशि को सात दिवस के अंदर कार्यालय में जमा नहीं कराने की स्थिति में कंपनी की जमा प्रतिभूति राशि में से काटने की चेतावनी देते हुए भविष्य में टोल वसूली के दौरान सदव्यवहार के भी कम्पनी को निर्देश दिए हैं। कुलमिलाकर अगर आप सही हैं। परिजनों के साथ होने या फिर रात, जल्दबाजी के फेर में टोल की ज्यादती का शिकार होते हैं तो नियम कायदे से कानून का सहारा लेकर न्याय प्राप्त कर सकते हैं।

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