खनियाधाना। (अशोक राजपूत की रिपोर्ट) खनियाधाना में महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि मनाई गई, जिसमें उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई इस मौके पर नगर के राजेशदेव पांडेय ने कहा कि भारत के शौर्य के प्रतीक महाराणा प्रताप भारत की एकता अखंडता और संप्रभुता के लिए हमेशा खड़े रहे। उन्होंने कभी भी अधीनता स्वीकार नहीं की। महाराणा प्रताप जंगलों में भटकते रहे कंदमूल फल खाए, कई त्रासदी झेली लेकिन वे कभी भी किसी कीमत पर दुश्मनों के आगे नहीं झुके। उन्होंने कहा कि भारत माता को संपूर्ण न्योछावर करने वाले महाराणा प्रताप की कहानी से हमने बहुत कुछ सीखा है। अगर आज भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप की जीवनी को पाठ्य पुस्तक के रूप में अगर पढ़ाया जाए तो निश्चित रूप से हर घर के आंगन में भारत माता की पवित्रता के लिए महाराणा प्रताप का जन्म होगा। महाराणा प्रताप भले ही मेवाड़ में जन्मे, परंतु पूरा देश उनको नमन करता है। उन्होंने भगवा झंडा को कभी झुकने नहीं दिया। मरते दम तक वे दुश्मनों के आगे नहीं झुके। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि ऐसी महान आत्मा का पुनर्जन्म हो। इस अवसर पर नगर के रामगोपाल सोनी,गोपाल सिंह राजपूत,आशीष जैन,सोनू राजा,सुरेन्द्र कोठादार,सतेंद्र सिंह चौहान सहित अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं बजरंग दल खनियाधाना के कार्यकर्ताओं उपस्थित रहे।

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