- जिस भूमि को लेकर हुआ केस दर्ज वह कमिश्नर की जांच में निजी भूमि निकली थी
- लोकायुक्त की पीएचई के बाद दूसरी एफआईआर पर अधिकारियों ने उठाये सवाल
शिवपुरी। नगर स्थित चिटोरा क्षेत्र में सोलर प्लांट की भूमि विक्रय के मामले में राज्य प्रशासनिक सेवा के 9 अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत केस दर्ज किया गया है। जिन पर केस दर्ज हुआ है उनमें शिवपुरी के तत्कालीन एसडीएम प्रदीप सिंह तोमर, तत्कालीन तहसीलदार रोहित रघुवंशी, करेरा तहसीलदार जीएस बेरवा, वरिष्ठ उप पंजीयक अशोक कुमार, उप पंजीयक कार्यालय के महेंद्र सिंह कौरव, राजस्व निरीक्षक नितेंद्र श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार शारदा पाठक, पटवारी अमृता शर्मा और जमीन विक्रेता सत्येंद्र सिंह सेंगर के विरुद्ध धारा 120 बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात 7 के तहत केस दर्ज किया है।
बता दें कि चिटोरा क्षेत्र में जानेमाने भूमि व्यवसाई सत्येंद्र सिंह सेंगर ने सोलर एनर्जी प्लांट को जमीन विक्रय की थी। इस भूमि को लोकायुक्त ने वन भूमि विक्रय का मामला मानते हुए केस दर्ज किया है।
कमिश्नर झा ने कराई थी जांच निकली निजी भूमि
बता दें कि जिस भूमि को लेकर केस दर्ज किया गया है। उसकी तत्समय शासन स्तर तक शिकायत हुई थी। जिसके बाद तत्कालीन कमिश्नर एमबी ओझा ने 27 दिसम्बर 2019 के पत्र के हवाले से टीम गठित कर शिवपुरी कलक्टर के माध्यम से जांच कराई। 9 जनवरी 2020 को कलक्टर ने कमिश्नर को जो जबाव भेजा उसके अनुसार उक्त भूमि नेशनल पार्क या वन भूमि न होकर निजी स्वामित्त्व की पाई थी। यह प्रतिवेदन कमिश्नर द्वारा शासन को भेजा गया था। कुलमिलाकर यह मामला भी अधिकारियों के बीच विवादों में घिर गया है। इस मामले में आरोपी बनाए गए एक तहसीलदार ने कहा कि हम किसी भी जांच एजेंसी का सम्मान करते हैं लेकिन बगेर हमारा पक्ष सुने एक तरफा केस दर्ज कर लिया है। हम कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं।
तो यह दूसरा मामला सवालों से घिरा
बता दें कि लोकायुक्त का यह दूसरा मामला सवालों में आ गया है। इसके पहले पीएचई के अधिकारियों पर दर्ज केस में भी एकतरफा केस दर्ज करने के आरोप उछले थे। अधिकारी कोर्ट में अपील भी कर चुके हैं। देखना होगा कि उक्त मामले को लेकर आगे क्या करवाई होती है।
इसलिए हुई थी कमिश्नर से जांच
बता दें कि राजस्व ओर वन भूमि के प्रकरण की जांच का अधिकार कमिश्नर को है। इसलिये उक्त मामले में जब विवाद गहराया ओर जांच हुई तो तत्कालीन कमिश्नर झा ने कराई थी।

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