बामोरकला। (संतोष खबरदार की रिपोर्ट) नगर में जारी धर्मायोजन के दौरान आर्यिका मां बिज्ञान मति माता जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाव के माध्यम से फल मिलता है। धर्म धनाढय का नहीं होता। अहंकार करना भी संकलेष है।
जिसके निमित्त से पाप का संघ हो वह संकलेष है। संकलेष न करना ही सबसे बड़ा धर्म है। अनुष्ठान ( बिधान) के माध्यम से संकलेष कम करें। गंगा बह रही है। शीघ्र भर लेना चाहिए
श्री 1008 सिद्ध चक्र महा मंडल बिधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के
आयोजन हेतु आर्यिका मां बिज्ञान मति माता जी का ससंघ नगर आगमन हुआ। भब्य आगवानी के साथ दो किलोमीटर दूर से आगवानी के साथ मंगल प्रवेश हुआ। अनुष्ठान हेतु इन्द्रों का पात्र चयन तथा इसी क्रम में निकली मंगल कलश यात्रा। जिसमें बिधानाचार्य एवं कुशल निर्देशन बाल ब्रह्मचारी बिजय भैया जी, वात्सल्य लखनादौन। संगीतकार सचिन तन्मय एण्ड पार्टी भोपाल, अकील बैंड शाडौ़रा, बड़े बाबा दिव्य घोष ने अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर महामहोत्सव में द्रब्य पुणर्याजकों के निवास स्थानों पर जाकर समाज द्धारा द्रब्य साम्रगी को मंदिर जी में लाया गया।इस अवसर पर सभी समाज बन्धओं ने बहुत हर्ष के साथ घर्म लाभ के साथ घर्म प्रभावना की जा रही है। इस अवसर पर स्थानीय समाज के साथ बाहर से आये धर्म लाभ के लिए भी भोजन की शुद्ध ब्यबस्था की गई है।

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