
- वर्तमान में पशुपालन मंत्रालय भोपाल में उपसचिव के पद पर पदस्थ हैं शेख
शिवपुरी। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम राधाकिशन मालवीय ने खनिज मामले में पांच साल पहले रिश्वत के साथ गिरफ्तार किए गए शिवपुरी के तत्कालीन एडीएम जेडयू शेख व खनिज शाखा में पदस्थ बाबू रामगोपाल राठौर को पांच-पांच साल का सश्रम कारावास एवं 14-14 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी हजारीलाल बैरवा ने की। शिवपुरी में अब तक की रिश्वतखोरी के मामले में ये सबसे बड़ा फैसला बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार नई बस्ती भौंती निवासी दिवाकर पुत्र रामगोपाल अग्रवाल की खनिज संबंधी एक अनुमती की फाइल शिवपुरी एडीएम जेडयू शेख के कार्यालय में पेंडिंग पड़ी थी। उक्त अनुमती के संबंध में एडीएम सहित खनिज शाखा के बाबू द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी। मामले की शिकायत दिवाकर ने लोकायुक्त पुलिस ग्वालियर को दर्ज कराई, जिस पर लोकायुक्त पुलिस ट्रेप संबंधी कार्रवाई पूरी करने के बाद 7 नवम्बर 2015 को दिवाकर अग्रवाल के साथ शिवपुरी आई। इसके बाद उन्होंने पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें एडीएम के चेम्बर स्थित उनकी टेबिल के ड्रॉयर से दस हजार रुपए लिफाफे में रखे हुए बरामद हुए थे जबकि बाबू की जेब से पांच रुपए बरामद किए गए। लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में प्रकरण कायम कर विवेचना उपरांत न्यायालय में पेश किया। न्यायाधीश ने मामले में आए समस्त तथ्यों एवं साक्ष्यों पर विचारण उपरांत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में दोनों को चार-चार साल का सश्रम कारावास व सात-सात हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं धारा 13(1)डी/13(2) में दोनों को पांच-पांच साल सश्रम कारावास एवं सात-सात हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। इस तरह एडीएम व बाबू को पांच-पांच साल की सजा सहित 14-14 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
बता दें कि शेख को लोकायुक्त की टीम ने 5 साल पहले उन्हीं के कार्यालय में रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। लोकायुक्त की कार्रवाई में माइनिंग क्लर्क भी पकड़ा गया था। अब इसी मामले में शेख को 5 साल जबकि बाबू राठौर को 5 साल की सजा हुई है।

दिवाकर ने मामले की, की थी शिकायत
लोकायुक्त को की। शिकायत की तस्दीक के लिए लोकायुक्त की टीम ने दिवाकर से एडीएम और क्लर्क की फोन पर बातचीत रिकार्ड कराई। शिकायत सच पाई गई तो, लोकायुक्त टीम ने रणनीति तैयार कर रिश्वत की पहली किश्त 15 हजार रुपए, केमिकल लगाकर दिवाकर के हाथ एडीएम शेख को भेजे। जैसे ही रकम हाथ में ली, इशारा पाकर लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ कर मामला दर्ज कर लिया था। इसके बाद क्लर्क गोपाल को भी हिरासत में ले लिया गया था।
IAS अवार्ड के लिए प्रस्तावित था शेख का नाम
उस समय शेख 56 वर्ष के थे। एडीएम जेडयू शेख 1988 बैच में डिप्टी कलेक्टर बने थे। 1998 में एडीएम बन गए। रिश्वत कांड से अगले महीने जेड यू शेख का नाम आईएएस अवार्ड के लिए होने वाली डीपीसी के लिए प्रस्तावित हुआ। वे सीनियर अधिकारी का वेतनमान ले रहे थे।
रिश्वत लेने की पुष्टि इस तरह हुई थी
दिवाकर अग्रवाल से तीन बार मोबाइल पर बातचीत में क्लर्क रामगोपाल राठौर ने रिश्वत मांगी थी। इसमें सौदेबाजी भी हुई थी। रिश्वत में दिए गए नोट में फिनोटील पावडर था, इसलिए जब बाबू व एडीशनल कलेक्टर के हाथ सोडियम कार्बोनेट में धुलवाए गए तो वे रंग गए थे। पकड़े गए तो बोले- किसी ने रख दिए होंगे दराज में रुपए। लोकायुक्त पुलिस ने जब जेडयू शेख को रंगे हाथों पकड़ लिया तो उनका कहना था कि किसी ने मेरी दराज में दस हजार रुपए रख दिए होंगे।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें