विश्व जल दिवस : तीन लाख की आबादी खुद ही कर रही पानी की व्यवस्था
शासन की तरफ से नहीं मिली कोई सुविधा
अजय दण्डौतिया
मुरैना। आज विश्व जल दिवस है। आज के दिन पूरे विश्व में पानी की अहमियत को बताने के लिये जगह-जगह जागरूकता अभियान चलाये जाते हैं और पानी कितनी महत्वपूर्ण है इसके बारे में लोगों को बताया जाता है। पानी की अहमियत कितनी है यह मुरैना में स्टेशन रोड के पुल के बाद के हिस्से में जाकर देखा जा सकता है जहां आजादी के बाद भी अभी तक शासन प्रशासन द्वारा लोगों को पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। स्थानीय लोग या तो अपनी निजी बोरिंक करवाकर पानी ले रहे हैं और कई लोग तो इन बोरिंक से कनेक्शन लेकर अपने पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। हैरान करने वाला पहलू तो यह है कि कितना समय बीत जाने के बावजूद व नगर निगम के वार्ड में उक्त स्थान आने के बाद भी लगभग 3 लाख की आबादी पानी से अछूती बनी हुई है। अगर यहां के लोग स्वयं अपनी बोरिंग करवाकर पानी की व्यवस्था नहीं करते तो फिर इन लोगों को पानी कहां से नसीब होता। ऐसा नहीं है कि जिला प्रशासन और नेताओं को इस बारे में जानकारी न हो बावजूद इसके इस कोई किसी का ध्यान केन्द्रित नहीं है। अगर यहां के निवासी निजी बोरिंग करके पानी की व्यवस्था नहीं करते तो शायद इन्हें पानी के लिये लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर जाना पडता। वहीं नगर निगम की बात की जाये तो पानी के टेंकर आज दिनांक तक इन वार्डों में नहीं भेजे गए हैं। जिस व्यक्ति के यहां बोरिंग है वह तो पानी आसानी से ले लेता है लेकिन जिनके यहां बोरिंग नहीं है या जो बोरिंग कराने में असमर्थ हैं उन्हें आज भी पानी के लिये काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। उक्त लोग बोरिंग के कनेक्शन ले लेते हैं जिनके बदले में वह 500 से 1000 रूपये प्रतिमाह देते हैं और तो और कई बार पैसे देने के बाद भी उन्हें पानी नसीब नहीं होता। इस बारे में कई बार नगर निगम को अवगत भी कराया गया लेकिन इस समस्या का आज दिनांक तक कोई निपटारा नहीं हो सका। स्थानीय लोगों से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने बताया कि जब ज्यादातर लोगों ने अपने निजी बोरिंग करवाकर पानी की व्यवस्था कर ली है तो फिर शासन प्रशासन काहे यहां नल की व्यवस्था करेगा। अभी हाल ही में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा द्वारा एक पत्रकारवार्ता में अपनी पार्टी की योजनाओं को बताते हुए कहा था कि हमारी सरकारी हर घर जल की व्यवस्था कर रही है और शहर ही नहीं गांवों में भी लोगों को पानी मिलेगा। बीडी शर्मा के इस बयान पर तो हंसी ही आयेगी क्योंकि गांव तो दूर की बात है शहर में ही लगभग 3 लाख लोग पानी के लिये स्थानीय बोरिंग संचालकों पर निर्भर हैं तो फिर शासन की हर घर जल की योजना कहां पर संचालित है....? वहीं पीएचई विभाग द्वारा भी नल जल योजना के तहत गांवों में पानी की व्यवस्था को लेकर बडे स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। अपने चहिते ठेकेदारों को लाभ देने के लिये उक्त विभाग कमीशन लेने से पीछे नहीं हट रहा और कथित तौर पर झूठी जानकारी अपने उच्च अधिकारियों तक पहुंचा रहा है। पीएचई विभाग का ही ताजा तरीन मामला सामने आया जहां नलजल योजना के तहत मुरैना जनपद के ग्राम ऐंती में पाईप लाईन बिछाने का कार्य किया जा रहा था जिससे हर घर में पानी की व्यवस्था हो सके लेकिन उक्त कार्य पिछले 6 माह से ठेकेदार द्वारा बंद कर दिया गया है। पानी के पाईप यूं ही रास्ते पर पडे हुए हैं व पाईप लाईन बिछाने के लिये खोदे गए गड््डे भी लगभग पूरी तरह से भरते जा रहे हैं। इस पर बात पीएचई विभाग से जानकारी मांगी गई तो विभाग द्वारा बताया गया कि नल जल योजना के तहत कार्य स्वीकृत किया जायेगा उसके बाद कार्य प्रारंभ किया जायेगा। विभाग के इस जबाव से एक ओर तो हंसी आती है कि विभाग यह बता रहा है कि कार्य स्वीकृत होने के बाद शुरू किया जायेगा लेकिन कार्य तो पिछले एक साल से शुरू हो गया था लेकिन 6 महीने से बंद पडा हुआ है फिर विभाग को अपने ही द्वारा दिये गए कार्य की जानकारी क्यों नहीं है...? खैर आज विश्व जल दिवस है और मुरैना शहर ही नहीं बल्कि पूरा जिला आज भी पानी के लिये अछूता बना हुआ है। पानी की अहमियत क्या होती है यह मुरैना जिले में आकर देखा जा सकता है जहां शासन द्वारा किसी भी तरह की पानी की व्यवस्था नहीं की गई है।
निजी जगह पर लगाये हैण्डपंप
भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के लिये जाना जाने वाला पीएचई विभाग अपने कोई न कोई कारनामे की वजह से सुर्खियों में बना रहता है। ऐसा ही एक मामला पीएचई विभाग का सामने आया है जहां विभाग द्वारा व विधायक निधि से स्वीकृत कई हैण्डपंप को निजी जगह पर लगवा दिया गया है। उक्त हैण्डपंप को निजी जगह पर लगाने से केवल और केवल भूमि स्वामी को इसका लाभ मिल रहा है बांकी लोगों को पानी उपलब्ध ही नहीं हो पा रहा है। जी हां! यह बिल्कुल सच है। कई जगह स्वीकृत हैण्डपंपों को पीएचई विभाग द्वारा रिश्वत लेकर उन्हें निजी भूमि पर लगा दिया जाता है। इसका खामियाजा आम लोगों का भुगतना पडता है जिन्हें पानी की जरूरत होती है लेकिन पानी मिल नहीं पाता। उक्त निजी हैण्डपंप पर अगर पानी के लिये लोग जाते भी हैं तो भूमि स्वामी द्वारा उन्हें वहां से भगा दिया जाता है और यह कह दिया जाता है कि यह तो हमारे पैसों से लगवाया गया है जबकि हकीकत कुछ और ही है। इसका प्रमाणित मामला मुडियाखेडा स्थित एक निजी जमीन पर लगाया गया हैण्डपंप है जहां पीएचई विभाग द्वारा पैसे लेकर हैण्डपंप को निजी जगह पर लगा दिया गया है।
गांवों में इससे बुरे हालात
नेताओं की भाषणबाजी और प्रशासन की योजनाओं के तहत की जा रही वाहवाही की अगर बात की जाये तो पानी के लिये सबसे ज्यादा अगर कोई परेशान हो रहा है तो वह हैं मुरैना जिले के ग्रामीण। जी हां! मुरैना जिले में कई गांव ऐसे हैं जहां पानी के लिये आज भी लोगों को कई किलोमीटर दूर जाना पडता है। ऐसा नहीं है कि गांव में हैण्डपंप की व्यवस्था नहीं है लेकिन हैण्डपंप होने के बावजूद भी ग्रामीणों को पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसका एक प्रमाणित मामला ग्राम ऐंती का सामने आया है जहां हैण्डपंप पर गांव के सचिव और सरपंच की मिलीभगत से दबंगों ने अपनी मोटर डाल ली है। हैण्डपंप में मोटर डली होने की वजह से जरूरतमंद लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इस बारे में कई बार ग्रामीणों ने ग्राम ऐंती के सचिव और सरपंच से शिकायत की लेकिन भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूबे उक्त सरपंच सचिव ग्रामीणों की इस समस्या पर कतई ध्यान नहीं दे रहे हैं। आलम यह हो गया है कि ग्राम ऐंती से कई परिवार अब दूसरे गांव की और पलायन भी करने लग गए हैं।

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