ग्वालियर। प्रदेश भर के लोगों की निगाहें नगरीय निकाय चुनाव पर टिकी हुई हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर आज हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई हुई जिसमें मध्य प्रदेश सरकार ने आऱक्षण पर अपना जबाब पेश करने के लिए सरकार से समय मांगा। जिस पर 26 तारीख मिली अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रेल को होगी। हाईकोर्ट के आदेशानुसार सरकार को 81 नगरीय निकायों के आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया के मामले में सरकार को अपना जवाब पेश करना था। दरअसल, निकाय चुनाव के लिए प्रदेश के 81 नगरीय निकायों में मुरैना और उज्जैन नगर निगम समेत 79 निकायों में महापौर व अध्यक्ष पद के आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया में विसंगति होने से इन पदों के लिए सरकार द्वारा किए गए आरक्षण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। साथ ही कोर्ट ने आरक्षण की विसगंतियों पर सरकार को जबाब पेश करने का आदेश दिया था। आपको बता दें कि इन नगरीय निकायों के आरक्षण का मसला निपटने के बाद ही प्रदेश के नगरीय निकायों के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने साल 2014 में जो अध्यक्ष और महापौर के पद आरक्षित वर्ग के लिए थे, उन्हें इस साल प्रस्तावित चुनावों में भी आरक्षित कर दिया था। पंचायतों के चुनावों की प्रक्रिया 52 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष के पदों का आरक्षण न होने से रुकी हुई है। अब ऐसे में सबकी निगाहें सरकार के 26 अप्रैल के जवाब पर टिकी हुई है।

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