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कोरोना से कैसे बचें- व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास: कलक्टर अक्षय

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। हम सबकी जान बचाने में जुटे कलक्टर अक्षय कुमार ने दीपक सक्सेना की एक पोस्ट साझा की है। तल्ख, स्पस्ट, सटीक यह विचार अगर प्रत्येक व्यक्ति जीवन मे आत्मसात कर ले तो मौत को टाल सकता है। आइये क्या कुछ कहा है जरूरी सुझाव अंतर्गत। 
1. कोरोना के संक्रमण से बचना जितना आसान है, एक बार हो जाने के बाद उससे बच पाना उतना ही मुश्किल है. यदि अस्पताल के दरवाज़े तक पहुँचने की नौबत आ गई तो फिर भरोसा नहीं है कि घर का दरवाजा फिर नसीब होगा या नहीं. अत: समझदारी इसी में है कि कोरोना हो ही नहीं और हो भी तो इतना मामूली हो कि घर पर ही ठीक हो जाये.
2. जिन व्यक्तियों को कोरोना हो गया है, उनके बारे में अस्पताल, सरकार, क़िस्मत और भगवान पर भरोसा रखें. उम्मीद करें कि सब ठीक होगा.
3. कोरोना न हो इसके लिये कुछ अनुशासन और बंदिशों का पालन स्वमेव करना होगा. अब वह समय निकल गया जब सरकार डंडा लेकर अनुशासन का पाठ पड़ा रही थी, अब अपनी ही ज़िम्मेवारी है और अपनी ही रिस्क. अब हमें अगले दो-तीन महीने तक कुछ *”बंदी”* का पालन व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से करना होगा.
4. *घर बंदी*- जब तक जान जाने की नौबत जैसा काम न आन पड़े, घर से बाहर कदम न रखें. इमरजेंसी में घर से बाहर जाने के लिये केवल एक ऐसा व्यक्ति मुक़र्रर करें जो शारीरिक रूप से स्वस्थ हो. यदि घर में ऐसा कोई बंदा न हो तो अड़ोस-पड़ोस मे, नाते-रिश्तेदारी में देख लें.
5. *नाक-मुँह बंदी* - जब भी घर से बाहर निकले, दोहरा मास्क लगाकर निकलें. पहले थ्री लेयर सर्जिकल मास्क लगाये, फिर उसके ऊपर कपड़े का मास्क बांध लें. मास्क लगाने से यदि घुटन होती है तो होने दें, मरेगें नही. दम घुटने से मरना भी पड़े तो कोरोना से मरने से अच्छा है. बाहर जिस भी व्यक्ति ने नाक-मुँह बंदी नहीं की है, उससे न तो संवाद करें और न ही कोई संव्यव्हार. भले ही वह आपका कितना भी करीबी क्यों न हो. घर से बाहर रहने के दौरान हर आधे घंटे में हाथों को सेनेटाईज करते रहें. बाहर से घर में वापस आने पर कपड़े के मास्क को साबुन से अच्छी तरह से धोयें और सर्जिकल मास्क को जलाकर नष्ट कर दें.
6. *गाड़ी बंदी*- जहां तक संभव हो अपना काम पैदल जाकर ही करें. इससे आवागमन सीमित हो जायेगा. इधर-उधर के फोकट चक्कर नहीं लगेगें.
7. *मोहल्ला बंदी- गाँव बंदी* - यह सामूहिक प्रयास से ही संभव होगा. अनावश्यक किसी बाहरी व्यक्ति को गाँव और मोहल्ले में प्रवेश न करने दें. ऐसे व्यक्ति को तो बिल्कुल भी नहीं, जिसने नाक-मुँह बंदी न कर रखी हो. मोहल्ले और गाँव में निगरानी के लिये दस्ते बनाये, जो बारी-बारी से पहरा दें. हर किसी को गाँव मोहल्ले से बाहर भी न जाने दें. कुछ स्वस्थ स्वयं सेवकों का चयन कर ले, मोहल्ले गाँव के सारे बाहर के काम चयनित स्वयं सेवक ही निपटायें. गाँव मोहल्ले में गरीब लोगों की पहचान कर लें, सब लोग मिल-जुलकर ऐसे लोगों के खाने-पीने की जुगाड़ जमा दें.  
8. *ज़रूरत बंदी* - अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर लें. ऐसी वस्तुओं का उपयोग यथा संभव छोड़ दें, जिनके लिये रोज़-रोज़ बाहर निकलना पड़े. जैसे कि सब्ज़ी, सब्ज़ी मंडी में कोई कुछ भी कर लें सोशल डिस्टेंसिंग हो ही नहीं पाती. दो महीने सब्ज़ी की जगह आलू, प्याज़, दाल, बेसन, बड़ी जैसी चीजों से काम चलायें.
9. *कमाई बंदी* - यदि अगले दो तीन महीने तक घर में बैठकर गुज़ारा चल सकता हो तो सारे काम छोड़ दें. बच जायेगे तो कमाई के अवसर भविष्य मे बहुत निकल आयेगें.
*॥इति॥*
*दीपक सक्सेना*

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