बच्चों के तनाव को कम करने के लिए चाइल्ड लाइन वर्कर्स एवं वोलेंटियर्स को दिए सुझाव
शिवपुरी। कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर बच्चे लंबे समय से घरों में कैद हैं। उन्हें दोस्तों से अलग थलग अपने घरों तक सीमित रहना पड़ रहा है। वे घर में तनाव रहते रहते उनमें चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ने लगा है। जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। स्कूल बच्चों की लाइफलाइन की तरह काम करता है। बच्चों को इससे दूर कर देने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। इस समय में बच्चों को अनुकूल माहौल, दोस्ताना व्यवहार और उचित काउंसिलिंग मिलना बेहद जरूरी है। यह बात चाइल्ड लाइन सदस्यों एवं वोलेंटियर्स के साथ आयोजित ऑनलाइन मीटिंग में बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों में कुछ मानसिक और शारीरिक बदलाव आ रहे हैं, तो पैरेंट्स को उन्हें भी समझना होगा। अभी सभी स्कूल बंद हैं,परंतु कई स्कूलों की ओर से बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की गई हैं। अगर बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा तो यह इस बात का संकेत है कि वे कहीं न कहीं मानसिक तौर पर तनाव में है। कोरोना वायरस के संक्रमण के मद्देनजर बच्चों में भी चिंता या भय जैसी स्थिति हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती हैं। इसलिए उनकी ज्यादा देखभाल की जरूरत है। परहित संस्था के डायरेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने मीटिंग में बच्चों के विकास एवं सुरक्षा को प्रभावित करने वाले जोखिमों को चिन्हित कर उन्हें मिटाने के संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पढ़ाई छूटने से बच्चों के सामने अनेकों जोखिम बढ़ गए है। बच्चों को मजदूरी पर,भीख मांगने या कचरा- कबाड़ बीनने में भी लगाया जा सकता है। उनका कम उम्र में विवाह किया जा सकता है। बच्चे गलत लोगों के साथ बैठेंगे तो नशे या आपराधिक गतिविधियों से भी जुड़ सकते है। ऐसी स्थिति में उन्हें उचित परामर्श एवं भावनात्मक सहयोग की बहुत जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि इस बात के लिए लोगों को प्रेरित करें कि अगर कोई बच्चा किसी प्रतिकूल परिस्थिति में है तो चाइल्ड लाइन को 1098 पर सूचित करें,ताकि उसकी मदद की जा सके। चाइल्ड लाइन समन्वयक वीनस तोमर ने भी बच्चों के जोखिमों को कम करने के संबंध में अपने विचार रखे। चाइल्ड लाइन सदस्यों ने फील्डवर्क में आने वाली समस्याओं एवं अनुभवों को भी सांझा किया। जिनके संबंध में उचित सुझाव दिए गए।
बच्चों के संरक्षकों को सुझाव
लॉकडाउन एवं संक्रमण का भय कम करने के लिए बच्चों को उनकी रुचि के अनुरूप रचनात्मक कार्यों से जोड़े तथा उन्हें भरपूर समर्थन दें,जिससे उन्हें भावनात्मक मजबूती मिलेगी। बच्चों को सुबह हल्का व्यायाम कराएं तथा खुद भी उनके साथ व्यायाम करें,जिससे उन्हें शारिरिक एवं मानसिक शक्ति मिलेगी। प्रतिदिन नाश्ते में कुछ बदलाव करने की कोशिश करें। रूटीन पढ़ाई के बाद उनके साथ मिलकर कोई रचनात्मक खेल खेलें, जिससे उन्हें दोस्तों की कमी नहीं खलेगी। मोबाइल और टीवी अधिक समय तक न देखें, यह भी ध्यान रखना जरूरी है। मोबाइल पर अधिक समय तक गेम खेलने से बच्चों की आंखों पर प्रतिकूल असर पड़ता सकता है।

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