शिवपुरी। सिर्फ एक नाम। कहीं झांकी का श्रृंगार हो, रामलीला की तैयारी या फिर कागज पर जीवंत तस्वीरों का सृजन....अब कौंन उकेरेगा। जिले के जानेमाने कलाकार आजाद खान ने अंतिम सांस ले ली। उनके निधन की खबर से सभी स्तब्ध हैं। खासकर हमारे जैसे वे लोग जिन्हें तस्वीर उकेरने की कला हाथ मे ब्रश थमाकर आजाद ने सिखाई। नगर के विद्या मन्दिर स्कूल में सैकड़ों विद्यार्थियों ने उनसे ड्राइंग सीखी और कुछ ने नाम भी कमाया। मामा का धमाका डॉट कॉम टीम नम आंखों से आजाद को देती है अंतिम विदाई।
'नीरज' भी हुए दुःखी, लिखे मन के उदगार
नहीं रहे शिवपुरी के "आजाद" ...वो मजहब की बंदिशो से अलग था इसीलिए वो "आजाद" था...रामलीला में हर किरदार का मैक अप करने वाले, राम से रावण तक ...चित्रकारी के बादशाह ...आधी जिंदगी तो मैं खुद नहीं जानता था कि वो मुसलमान है ...नवरात्री, गणेश उत्सव, शायद ही कोई हिंदु पर्व इस आजाद के बिना पूरा हुआ हो ...आप यकीनन बनाये रहिए मजहब की ठेकेदारी पर मैं तो उस "आजाद" का शिष्य हूं जो कभी धर्म की बंदिशो में बंधा ही नहीं ...मुझे विधा मंदिर स्कूल में चित्रकारी सिखाने वाले मेरे गुरु ...छोड गये दुनिया ...
शत शत नमन...

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