आइए जाने क्या होते हैं नौतपा क्या पड़ता है प्रभाव जनमानस पर
शिवपुरी। (पंडित विकासदीप शर्मा, मंशापूर्ण ज्योतिष) इस माह 25 मई को सूर्य देव प्रातः 7 बजकर 5 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 15 दिनों तक इसी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश से नौतपा भी प्रारंभ हो जाएंगे। और इस नक्षत्र में सूर्य देव 8 जून तक रहेंगे। नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सर्वोच्च ताप में होना है यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है।
खगोल विज्ञान के अनुसार इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है. यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत देता है।
ज्योतिष गणना के अनुसार 23 मई को शनि की वक्री चाल के कारण इस बार नौतपा खूब तपेगा। नौतपा में आंधी तूफान और बारिश होने की भी संभावना रहेगी।
नौतपा क्या होता है...??
ज्योतिष गणना के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी लम्बवत पड़ती हैं। जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है। यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है। ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत और श्रीमद् भागवत में नौतपा का वर्णन आता है। कहते हैं जब से ज्योतिष की रचना हुई, तभी से ही नौतपा भी चला आ रहा है। सनातन सस्कृति में सदियों से सूर्य को देवता के रूप में भी पूजा जाता रहा है।
हिंदू पंचांग में लिखा है कि 'ज्येष्ठ मासे सिते पक्षे, अद्रादि दसतारका। सजला निर्जला गेया निर्जला सजलास्तथा'। तात्पर्य यह है कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में जिस दिन आद्रा नक्षत्र शुरू होता है, उस नक्षत्र से अगले 10 नक्षत्र तक नौतपा माना गया है। माना जाता है कि यही 10 नक्षत्र मानसून में पानी प्रदान करते हैं। नौतपा के दौरान यदि बारिश होती है तो मानसून के मौसम में सूखा पड़ने की संभावना रहती है और यदि नौतपा में भीषण गर्मी पड़े तो बारिश अच्छी होती है।
नौतपा में क्या करें, तो होगा लाभ
हिन्दू सनातन धर्म की परंरपरा के मुताबिक, नौतपा के दौरान महिलाएं हाथ पैरों में मेहंदी लगाती हैं। क्योंकि मेहंदी की तासीर ठंडी होने से तेज गर्मी से राहत मिलती है। इन दिनों में पानी खूब पिया जाता है और जल दान भी किया जाता है ताकि पानी की कमी से लोग बीमार न हो। इस तेज गर्मी से बचने के लिए दही, मक्खन और दूध का उपयोग ज्यादा किया जाता है। इसके साथ ही नारियल पानी और ठंडक देने वाली दूसरी और भी चीजें खाई जाती हैं।

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