शिवपुरी। शिवपुरी ग्वालियर फोरलेन स्थित सतनवाड़ा इलाके में 23 अप्रैल को 73 हरे भरे शीशम, नीम आदि के पेड़ आरी से कटवा डालने का मामला सामने आ रहा है। इन पेड़ को सरकारी भूमि से काटकर ट्रॉलि में भरकर भिजवा देने की बात भी सामने आ रही है। रोचक पहलू यह है कि जिस घनसुन्दर धाकड़ ने इन पेड़ों को काटने की शिकायत की। उसके बाद सतनवाड़ा थाने ने केस दर्ज नहीं किया बल्कि कहा कि मामला तहसीलदार की जानकारी में दे दिया वे कहँगे तो केस दर्ज कर लेंगे। इधर जब घनसुन्दर ने वन टीम को बताया तो रेंजर इंदर धाकड़ ने कहा कि खुद की जमीन से पेड़ काटे यह जानकारी के बाद ट्रॉली छोड़ दी जिसमें लकड़ी थीं। सवाल ये है कि 100 के आसपास पेड़ काटे जाने की परमिशन कल्याण धाकड़ ने वन अमले से ली थी क्या ? जो वन अमला गरीब महिलाओं को 4 लकड़ी बीनते देखकर पकड़ लेता है उसने 73 पेड़ो को निजी ही सही बिना अनुमति कैसे कटने दिया। अब सतनवाड़ा पुलिस जिसके हाथ कोई साइकिल पर लकड़ी ले जाता मिलता कार्रवाई करती वह संत बनकर तहसीलदार के आदेश का इंतजार कर रही है ? इधर घनसुन्दर का दावा है कि सरकारी भूमि और मेड पर लगे पेड़ नम्बर 2 में काटे गए हैं और मिलीजुली सरकार के फेर में दोषी पर कोई कार्रवाई नहीं कि गई। मामले के तार एक सफेदपोश नेताजी तक भी जुड़ते नजर आ रहे है। अपने राम का तो यही कहना है कि दुनिया ऑक्सीजन के लिये तड़प रही है ऐसे में पौधे भले न लगा सको पर जो लगे हैं उन्हें तो मत काटिये। देखना होगा डीएफओ लवित भारती मामले में क्या संज्ञान लेते हैं।

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