मुरैना। (यदुनाथ सिंह तोमर की रिपोर्ट)
फूलों के ऊपर मंडराते हुए तमाम प्रकार की तितलियों को आप ने देखा होगा देखने में अति सुंदर एवं आकर्षक लगती हैं तितलियां एक फूल से दूसरे फूल पर इधर से उधर उड़कर जाना इनकी दिनचर्या रहती है क्योंकि तितलियां ठोस भोजन नहीं करती फूलों का पराग एवं रस पर ही निर्भर रहती है इस लिए भोजन के लिए इनको दिनभर संघर्ष करना रहता है । तितली का जीवन काल भी ज्यादा लंबा नहीं होता नर और मादा दोनों तितली अलग-अलग होती हैं मादा तितली पत्ते पर नीचे की ओर अंडे देती है अंडे लारवा के रूप में होते हैं कुछ दिनों के बाद लारवा से कीट के रूप में यह विकसित होती हैं और पत्ते को खाकर बड़ी होती है जब इनके पंख निकल आते हैं तब यह उड़ना प्रारंभ कर देती हैं बताया जाता है कि तितली में देखने सूंघने की गजब की क्षमता होती है । जानकार बताते हैं जहां पर तितली का जन्म होता है वह एक बार उस स्थान पर दोबारा जरूर जाती है तीन भागों में तितली का शरीर होता है । पैर धण तथा 2 जोड़ी पंख बहुत सुंदर आंखें व आंखों के ऊपर एंटीना के समान सिग्नल लगे रहते हैं जो सुघने का काम करते हैं । जिस तितली की बात आज हम कर रहे हैं । वह है तारुकस परिवार लाइकेनिडे में एक तितली जीनस है। उन्हें आमतौर पर ब्लू पिय्रोट्स या केवल पिय्रोट्स के रूप में जाना जाता है। देखने में यह बहुत ही छोटी तितली होती है जिसके पंख हल्के सफेद एवं उन पर काले रंग के निशान लाइनों में बने रहते हैं जिससे यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहती है एक जगह पर बड़ी मुश्किल से रूकती है।

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