शिवपुरी। जिले में कोरोना का कहर किस तरह बरपा था आपको याद ही होगा, धड़ाधड़ मौतों से सभी दहल गए थे। ये मौतें एकाएक हुईं तो इनमें से 6 के सेम्पल जीनोम परीक्षण के लिये भेजे गए थे अब आई इनकी रिपोर्ट ने सभी के होश उड़ा डाले हैं। यानी कहा जा सकता है कि जिले में तीसरी लहर के जिमेदार माने जा रहे डेल्टा प्लस वेरियंट की मौजूदगी से लोग मौत के मुह में समाए हैं! हालांकि 4 के सेम्पल ही इस बात की पुष्टि कर रहे हैं क्योंकि सभी की जांच जीनोम से नहीं की जा सकती। संतोष की बात यह है कि जिनकी मौत हुई उनके परिजन सुरक्षित रहे।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शिवपुरी में कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट के कारण हुई चार मौत की रिपोर्ट आते ही एक बार फिर कोरोना की आज चर्चा सरगर्म हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमितों की मौत के बाद 6 लोगों के सेम्पल भेजे थे।
वैक्सीन के बाद भी हुई मौत
जिन चारों की मौत हुई उनको वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी थी, वाबजूद इसके उन्हें डेल्टा प्लस ने लपेटे में ले लिया था। सीएमएचओ डॉक्टर ए एल शर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट 3 दिन में गले से फेंफड़ों तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य वायरस को 7 दिन लगते हैं।
इन 4 की हुई मौत
सीएमएचओ डॉ एएल शर्मा ने बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट की वजह अजाक थाने के हवलदार प्रेमनारायण द्विवेदी, पिछोर के शिक्षक सुरेंद्र शर्मा, साॅफ्टवेयर इंजीनियर शिक्षक विनय चतुर्वेदी और सूरजपाल की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हुई। चार से पांच घंटे पहले तक यह मरीज सामान्य थे। उनके फेफड़ों में पानी भर चुका था और हार्ट डैमेज हो गया था। उन्होंने बताया कि यह वैरिएंट इसलिए घातक है, क्योंकि यह तीन दिन में ही गले से फेफड़ों तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य वायरस को गले से फेफड़ों तक पहुंचने में 7 दिन का समय लगता है। इसके अलावा संपर्क में आने वालों को भी गंभीर बीमार करता है। हालांकि डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि होने के बाद इनके संपर्क में आए लोगों के सैंपल लेने स्वास्थ्य विभाग की टीम गई थी, लेकिन कई दिन बाद सेम्पल रिपोर्ट आने के चलते सभी लोगों के स्वस्थ होने की वजह से किसी का सैंपल नहीं लिया गया।
बाहर के लोगों से आये संपर्क में
जिन लाेगाें में डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई है, वे कहीं न कहीं बाहर से संक्रमित हुए हैं। इस वैरिएंट में दो गज की दूरी भी प्रभावी नहीं है।
जानिये क्या है डेल्टा प्लस
यह कोरोना का सबसे खतरनाक वैरिएंट है। इसे डेल्टा-2 के नाम से जाना जाता है। अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा। ये चार वैरिएंट डब्ल्यूएचओ ने बताए हैं। इनमें सबसे खतरनाक डेल्टा वैरिएंट है, जो भारत में ही म्युटेंट हुआ है। इसे B.1.617 के नाम से भी जानते हैं। शिवपुरी में जो वैरिएंट पाया गया है, वह B.1.617.2 है। इसे जांच में डेल्टा प्लस नाम दिया गया है।
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