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धमाका खास खबर: पुलिस ने झुठलाया पर न्यायालय ने माना हत्या का मामला, प्रकरण दर्ज, घटना के 14 वर्ष बाद हुई एफआईआर

शनिवार, 31 जुलाई 2021

/ by Vipin Shukla Mama
करैरा। (युगल किशोर शर्मा की रिपोर्ट) दिनांक 30.11.2007 को ग्राम जेरबा निवासी मेहरबान सिंह गुर्जर का मृत शरीर गांव के पास सूखे कुएं में पड़े होने की सूचना प्राप्त हुई, जिसका मर्ग कायम 01-12. 2007 को किया गया ।
ज्ञात हो कि मृतक व उसका पुत्र हरि सिंह गुर्जर टेड़िया का पुरा पर एक शादी समारोह में सम्मिलित होने गए थे ,कार्यक्रम के उपरांत पुत्र पिता से पहले अपने घर वापस आ गया लेकिन मृतक मेहरबान सिंह अपने दूर के भतीजे रामेंद्र गुर्जर के साथ वापस घर ग्राम जेरबा आ रहा था। वे रास्ते में आरोपी नत्थू कुशवाहा के फूलों के खेतों के पास से निकल रहे थे तभी वहीं खेतों पर हथियारों से लैस आरोपी नत्थू , रवि ,सिरनाम व अशोक सभी जाति कुशवाह निवासी करैरा ने एक राय होकर मृतक मेहरबान पर पूर्व रंजिश को लेकर हमला कर दिया जिसे देख साथ चल रहा रामेंद्र गुर्जर ने बचाने का प्रयास किया ,लेकिन अपनी जान को खतरा देख वह भी वहां से भाग खड़ा हुआ और गांव पहुचकर घटना की सारी जानकारी मृतक के पुत्र हरी सिंह व अन्य परिजनों को दी तो परिवार के सदस्य मृतक को बचाने घटनास्थल पर पहुंचे लेकिन वहां कोई भी नहीं मिला घटना स्थल पर सिर्फ खून से सना हुआ पत्थर व जमीन पर पडा हुआ खून दिखाई दिया, सारी रात खोजने पर प्रातः काल मृतक एक सूखे कुए में मृत अवस्था मैं पाया गया, जिसकी रिपोर्ट फरियादी हरि सिंह द्वारा करैरा थाना पर की गई लेकिन तत्कालीन थाना प्रभारी सुनील खेमरिया द्वारा f.i.r. कायम न करते हुए अपने अनुसार कहानी रचकर मर्ग क्रमांक 77/2007 दर्ज किया गया। जिसकी जांच तत्कालीन थाना प्रभारी सुनील खेवरिया द्वारा की जा रही थी लेकिन फरियादी हरि सिंह द्वारा उनके विरुद्ध आरोपी गणों से मिलीभगत कर अपराध खत्म किए जाने के संबंध में शिकायती आवेदन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दिए जाने पर मर्ग जांच सुनील खमरिया से हटाकर तत्कालीन एसडीओपी राजेश दंडोतिया को दी गई, उनका स्थानांतरण हो जाने के बाद जांच पदस्थ किए गए एसडीओपी प्रवीण भूरिया द्वारा जांच किए जाने पर उनके द्वारा धारा 302 का अपराध सिद्ध पाया गया इसके बाद तत्कालीन थाना प्रभारी सुनील खमरिया को एसडीओपी के द्वारा धारा 302 का अपराध दर्ज करने के निर्देश के साथ मर्ग डायरी भेजी गई ,बावजूद इसके f.i.r. ना कायम करने पर फरियादी हरि सिंह द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए गए परिवाद में भी उक्त संबंध में न्यायालय द्वारा एसपी को पत्र के साथ एफ आई आर दर्ज कराए जाने का निर्देश दिया बाद में एसपी के निर्देश पर पुलिस थाना करैरा द्वारा उक्त संबंध में अपराध क्रमांक 437/2008 अंतर्गत धारा 302, 201 ,147 ,148, 149 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। लेकिन इसके बाद भी मृतक के परिवार को न्याय नहीं मिला ।
#एफ आई आर के बाद आरोपी गणों से मिलकर हुई एफआर और केस डायरी हुई गायब --
घटना के संबंध में रहस्य तब और जाना बड़ गया जब थाने से केस डायरी ही गायब हो गई और एफ आई आर के अनुसंधानकर्ता तत्कालीन टीआई सुनील खेमरिया थाना ,प्रभारी दिनारा इसके बाद पिछोर एसडीओपी राजेश शर्मा द्वारा द्वारा अनुसंधान पूर्ण कर एफआर लगाई गई तथा तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा प्रकरण की केस डायरी स्थानांतरण हो जाने पर चार्ज में नहीं सौंपी गई जिस कारण से खेमरिया की भूमिका और संदिग्ध हो गई।
विभाग ने टीआई को किया दंडित--
 केस डायरी गायब किए जाने का दोषी पाते हुए विभागीय कार्यवाही में सुनील सांवरिया को दंडित किया जिसमें एक वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोके जाने के दंड से विभाग द्वारा दंडित भी किया गया।
#न्यायालय में लंबित परिवाद में परिवादी हरि सिंह व घटनाक्रम से संबंधित सभी साक्ष्यों के कथन दर्ज किए जाने के बाद माननीय न्यायालय श्री मान जेएमएफसी महोदय श्री ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ला द्वारा दिनांक 23-07 -2021 को प्रकरण में आदेश जारी करते हुए आरोपी गणों के विरुद्ध धारा 302, 34 का अपराध सिद्ध पाते हुए अपराध दर्ज किया गया, परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता एल के चतुर्वेदी द्वारा की गई।

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