(शिवकुमार शर्मा)
पुस्तक समीक्षा
पुस्तक का नाम- एकान्त की आहट
प्रकाशन- 2019
प्रकाशक - यश पब्लिकेशन, दिल्ली
मूल्य- रू. 199/-
अखिल भारतीय सेवा के मध्यप्रदेश केडर के अधिकारी डाॅ. मनोहर अगनानी द्वारा लिखी गई पुस्तक को कोराना काल के दोनों लाॅकडाउन में दो बार पढ़ा। 52 शीर्षकों में विभक्त इस पुस्तक को पढ़ते हुए मेरे अपने जीवन की अनेक घटनायें स्मृति पटल पर तरंगित हुई। कभी हर्षोतिरेक, कभी विषाद, कभी रोमांचित करने वाले प्रेरक प्रसंग, कभी भाव विव्हलता की स्थितियां बनी तो कभी काल क्रम के प्रभाव के दर्षन, सामाजिक समस्याओं से साक्षात्कार हुआ और सामाजिक सरोकार का रेखांकन मानस पटल पर उभर कर आया।
वस्तुतः लेखक की ’’एकान्त की आहट’’ के पूर्व भी तीन पुस्तकें प्रकाषित हुई है। ’’मिषिंग गल्र्स’’ ’’कहाॅ खो गई बेटियां तथा’’ अन्दर का स्कूल’’ इनमें प्रथम दोनो पूर्णतः बेटियों को समर्पित है। अन्दर के स्कूल एवं एकांत की आहट संस्मरणों के चुनिंदा मोतियों की मालायें हैं। लेखक को देश मे गिरते लिंगानुपात, समाज में जैण्डर (के मध्य लिंग-भेद अमूर्त, अव्यक्त एवं प्रभावी या हावी सोच) की समस्या ने ह्दयतल से चिंतित किया है इसके अतिरिक्त समाज में व्याप्त अनेक बुराईयों और विसंगतियों ने भी लेखक के मन को विचलित किया है। उक्त विचारमाला भाषा बद्ध होकर इन पुस्तकों के स्वरूप में प्रकट होकर हमारे सामने है। लेखक की षिक्षा-दीक्षा चिकित्साक्षेत्र की है, पेशे से अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी है और लेखन सामाजिक विषयों पर है अर्थात चिकित्सक, प्रशासक एवं लेखक तीनों के पृथक-पृथक दर्शन के अदभुत समन्वय से बने समाजशास्त्री हैं एकांत की आहट के लेखन को पढ़कर ऐसा अनुभव हुआ है।
’’क्षणे-क्षणे यन्नवतामुपैति तदैव रूपं रमणीयताया ’’ (षिषुपाल वधम 4/17) अर्थात जो प्रत्येक क्षण नवीनता को धारणा करता है वही रमणीयता है अर्थात सुन्दरता है। पुस्तक का प्रत्येक शीर्षक एक नयी सीख देते हुए प्रकट होता है जो, प्रतिभा प्रसूत है। यह पुस्तक न केवल संस्मरणों का लिपिबद्द स्वरूप मात्र है अपितु लोक जीवन की सहज शैली की निरूपम सौन्दर्य बोध दायी साहित्यक कृति है। इसे पढ़कर प्रत्येक पाठक अपने जीवन में घटित घटनाओं से साम्य बिठाकर अन्तर्मन में अतुलनीय आनन्दाधिगम को प्राप्त करता है। पुस्तक में दैनिक जीवन की छोटी से छोटी घटना-प्रधटना से प्राप्त होने वाली अनुभव जन्य सीख को लेखनी के माध्यम से ’’एकान्त की आहट’’ में भाषाबद्ध किया गया है। रोजमर्रा का जीवन अपने आप में सभी रसों (09) से सरावोर होता है। जीवन क्रम के उतार-चढ़ाव वे छन्द है जिनमें रस और अलंकार मौजूद रहते है। साहित्य के अन्तर्गत काव्य में रसों की मौजूदगी की विवेचना व्याख्या में प्रायः शुमार होती है, परन्तु इससे भिन्न इस पुस्तक में वर्णित तथ्य एवं कथ्य गद्य शैली में ष्यत्र-तत्र जीवन के रस बरसाते हुए एक बेहतर संदेश के साथ अवतरित हुए है यह इस पुस्तक की रमणीयता है।
पुस्तक की भाषा जनसामान्य से पहुंच के भीतर है। लेखन में विषय को स्पष्ट करने के लिए उर्दू, फारसी शब्द जैसे फितरत, जूनून, शख्स, मसगूल, जिक्र, सलीका, तालीम खूबसूरत, सबब, मेहफूज, लिहाजा, जाहिर, इंतजार, बेसब्र, खुषफहमी, आलम, सकून, शुमार, खामियाजा, मुमकिन, अफसोस, आदि तथा अंग्रेजी के मैटेनेंस, रेस्पांस, फिटनेस, र्मोनिंगवाॅक, सेंडआॅफ, षिफ्ट, लोकेषन, वेक्टीरियल इन्फेक्सन, कंसेप्ट, को डिजाईनर, टेम्परेरी सर्वर, अपडेट, ऐन्टीबायोटिक, साइडइफेक्ट, एलर्जी, टेक्नालाॅजी, ब्लण्डर, सिकजोक्स, आदि जैसे शब्दों का प्रयोग करने में कोई परहेज नहीं किया गया है। इस प्रकार इस पुस्तक में हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू के शब्दों की त्रिवेणी में पाठक सहजता से स्नान कर सकते है।
’’एकान्त की आहट ’’ जीवन दर्षन का साक्षात्कार है यह कहने में कोई संदेह नहीं है। पुस्तक में दी गई विषय सामग्री के पठन से हर उम्र का पाठक विषयवस्तु के साथ आत्मानुभूति और आत्म साक्षात्कार करता देखा जा सकता है।

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