मेरे घर की तू चमक है तू 'ज़िया' की है ज़िया
करैरा। शहर के युवा साहित्यकार सुभाष पाठक 'ज़िया' के निवास पर उनकी बिटिया दृशानि के प्रथम जन्मदिवस पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के समस्त साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आरंभ सुभाष पाठक 'ज़िया' के स्वागत भाषण के साथ हुआ तत्पश्चात कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र गुप्ता एवं मुख्य अतिथि प्रभुदयाल शर्मा जी ने दीप प्रज्ज्वलित किया एवं सौरभ तिवारी जी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। नन्हे कवि वारिद पाठक ने अपनी बहिन के लिए कविता पढ़ते हुए कहा कि
मेरी बहना कितनी प्यारी
जैसे फूलों की फुलवारी
प्रदीप श्रीवास्तव ने अपनी ग़ज़ल से प्रेम की परिभाषा व्यक्त करते हुए कहा कि
इतनी आसां नहीं प्रेम की ये डगर
युवा कवि विजेंद्र चौरसिया ने बदलते परिवेश को उजागर करती हुई कविता पढ़ी
कच्ची पौरों में जीवन की ऊषाकाल का कैरव मिलता था
खो गया वो परिवेश कहाँ जहाँ मान सम्मान मिलता था।
कार्यक्रम के मेज़बान सुभाष पाठक ने अपनी बिटिया के प्रति भावनाएं व्यक्त करते हुए लोरी सुनाई तो हॉल तालियों से गुंजायमान हो गया।
मेरे घर की तू चमक है
तू 'ज़िया' की है ज़िया
तेरी आँखें तेरा चेहरा
वरिष्ठ साहित्यकार सतीश श्रीवास्तव ने बच्चों से जुड़ी वात्सल्य भाव से भरी हुई रचनाएं सुनाते हुए यूँ कहा-
सुबह सुबह जब हो जाती है सब बच्चों से बात
लगता है सचमुच मिल जाती एक बड़ी सौग़ात
प्रमोद गुप्ता 'भारती' ने बेटी से जुड़े संस्मरण सुनाते हुए अपनी कविताएं प्रस्तुत की
बेटी से ही कल बचे बेटी से ही आज
ओमप्रकाश दुबे ने आध्यत्मिक काव्यपाठ करते हुए गोष्ठी को नई ऊंचाइयां प्रदान की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रभुदयाल शर्मा ने कहा कि बेटियां ही इस जगत का आधार हैं।
अपने अध्यक्षीय काव्यपाठ में राजेंद्र गुप्ता जी ने बिटिया से जुड़ा संस्मरण सुनाते हुए बिटिया को अपनी कविताओं से आशीर्वाद दिया।
कार्यक्रम का संचालन प्रमोद गुप्ता 'भारती' एवं आभार प्रदर्शन सुभाष पाठक 'ज़िया' ने किया। इस ख़ुशी मौके पर दृशानि के दादा- दादी श्री मती मनोरमा कमलकिशोर पाठक एवं पाठक परिवार के अन्य सदस्य नीलम ,अंकेश , संतराम,प्रियंका ,मोहित पाठक एवं धीरज भार्गव सहित शहर के प्रबुद्ध गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रमोद गुप्ता 'भारती' जी ने एवं आभार प्रदर्शन सुभाष पाठक 'ज़िया' ने किया।

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