शिवपुरी। अपने लिये जिये तो क्या जिये ए दिल तु जी जमाने के लिये.....आज आपको इसी खूबी से ओतप्रोत एक मासूम शिवा की स्टोरी बताने जा
रहे हैं। उम्र बचपन की लेकिन अपने पिता रानू रघुवंशी की तरह परपीड़ा को समझने में समर्थ शिवा रघुवंशी ने बीती रात जो किया वह बेहतरीन संस्कार की मिसाल है जिसे प्रत्येक बच्चे को दिया जाना जरूरी है। दरअसल कल शाम शिवा अपने पापा रानू के साथ चौराहे पर जूस पीने गया था तभी एक गरीब औरत को देखकर रोने लगा जब उसके पापा ने पूछा कि क्यों रो रहे हो बेटा, तो रोते रोते कहने लगा कि पापा कितनी ठंड है इन बेचारों को सर्दी लग रही होगी और इनके पास कोई कपड़े भी नही है, बेचारे बीमार हो जायेंगे तो इनका क्या होगा,अपने पास कुछ हो तो इन्हें ओढ़ने दे दो। फिर क्या था रात भर जरूरतमंद लोगों को ढूंढा गया और उन्हें इस कपकपाती सर्दी में थोड़ी सी राहत के लिये 25 लोगों को कम्बल वितरित किये गये ,अब शिवा बहुत खुश है मानो उसका कोई मनपसन्द खिलौना उसे मिल गया हो।

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