शिवपुरी। ग्राम ककरवाया में श्री हनुमान जी मंदिर पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के आज द्वितीय दिवस की कथा में बालयोगी पंडित श्री वासुदेव नंदिनी भार्गव जी ने शुकदेव जी के द्वारा परीक्षित को श्रीमद भगवत कथा का श्रवण एवं परिक्षत के द्वारा किए गए त्याग की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि हम तिनके को भी कितना बड़ा साम्राज्य समझ लेते हैं, किंतु धन्य हैं परीक्षित जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी पर जिसका एक क्षत्र साम्राज्य हो ,उसने मृत्यु को जानकर इतने बड़े साम्राज्य को तिनके के समान त्याग दिया । हमैं जो बाहर की बस्तुए हें उन्हें छोड़ना त्याग लगता है। वास्तविक त्याग तब होता है जब हम अपने अंदर के विकारों को छोड़ते हैं।कथा मैं आसपास के ग्रामीण जन के साथ शिवपुरी के कथा रसिक भी पहुंच रहे हैं।

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