
धमाका ग्रेट: 'आर्किटेक्ट मनीषा जैन' भूलीं 'मसूरी की थकान', 'झटपट दौड़कर 'मासूम काव्या' के लिये कर आईं 'रक्तदान'
शिवपुरी। यकीन मानिए हम में से कई लोग ऐसे होंगे जो कहीं बाहर से घूम कर आये और उन्हें कोई काम बता दिया जाए तो वह छल्ला पड़ेंगे। उस पर भी यदि कोई मसूरी, देहरादून से घूम कर आया हो और आते ही उसे पता चले कि किसी को रक्तदान करना है तो आप समझ सकते हैं कि क्या हालत होगी। लेकिन शहर की जानी-मानी आर्किटेक्ट मनीषा जैन ने अद्भुत मिसाल पेश की। वह मसूरी और देहरादून घूमने के लिए गई थी बीते रोज जैसे ही शहर में आई तभी एक मासूम के पिता रामवीर जाटव का फोन आया कि उनकी बेटी काव्या को रक्त की जरूरत है। मनीषा अपनी थकान भूल गई और दौड़ी भागी जिला अस्पताल जा पहुंची। जहां उन्होंने रक्तदान किया। उनके इस होंसले, साहस और संवेदनशीलता की शहरवासी मिसाल दे रहे हैं। हमें उनसे प्रेरणा लेना चाहिए कि दूसरे का दर्द जिसे समझ आ जाए वही इंसान है। एक दूसरे की मदद करने में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। हमेशा याद रखना चाहिए कि आज उनकी बारी है तो कल हमारी बारी है।

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