मुक़द्दर से नहीं लड़ता, लकीरें खुद बनाता है।
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जमाने को नहीं दिखता पसीना क्यों गरीबों का।
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नहीं तन को ढकें कपड़े,नहीं खाने मिली रोटी।
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विरासत में नहीं कुछ भी सहेजे फिर भला वो क्या।
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फ़कीरी ज़िन्दगी देखी ,कभी इज्ज़त नहीं देखी।
🍂 #अंजली आर गुप्ता✍️

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