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धमाका साहित्य कॉर्नर: गजल "जमाने को नहीं दिखता पसीना क्यों गरीबों का"

सोमवार, 23 मई 2022

/ by Vipin Shukla Mama
#ग़ज़ल
मुक़द्दर से नहीं लड़ता, लकीरें खुद बनाता है।
मिली है मुफ़लिसी फिर भी,बड़ी शिद्दत उठाता है।।
🍂
जमाने को नहीं दिखता पसीना क्यों गरीबों का।
मिले दो वक्त की रोटी तभी तन को जलाता है।।
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नहीं तन को ढकें कपड़े,नहीं खाने मिली रोटी।
गरीबी क्यो सताती है यही सबको बताता है।।
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विरासत में नहीं कुछ भी सहेजे फिर भला वो क्या।
मिला जो भी नसीबों से उसी से घर चलाता है।।
🍂
फ़कीरी ज़िन्दगी देखी ,कभी इज्ज़त नहीं देखी।
खड़े सब दूर ही तनके यही अफसोस आता है।।
🍂         #अंजली आर गुप्ता✍️

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