शिवपुरी।सन् 2001 से बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय गुमशुदा बाल दिवस 20 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है. शक्ति शाली महिला संगठन ने इसी अवसर पर अपने बाण गंगा परिसर पर एक जागरूकता संवाद प्रोग्राम आयोजित किया जिसमे रवि गोयल ने कहा की आज से 43 साल पहले की बात है. दिन था 25 मई 1979. जगह थी- न्यूयॉर्क. एक 6 साल का बच्चा एटन पैट्ज बस से स्कूल जाते समय गुम हो गया. एटन के पिता एक फोटोग्राफर थे. बच्चे के गुम होने की घटना के बाद रोते रहने की बजाय उसे ढूंढने की ऐसी कोशिश शुरू की कि दुनिया भर के लिए एक मिसाल कायम कर दी. पेशे से फोटोग्राफर थे तो बच्चे को ढूंढने के लिए उसकी एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर जारी की. हर तरफ इस तस्वीर को भेजा गया.अमेरिका में इस घटना के बाद ऐसा भूचाल आया कि गुमशुदा बच्चों के लिए शायद इस तरह पहली बार ही सोचा गया था.नतीजा ये हुआ कि पहली बार एक बच्चे के लापता होने का मामला पूरी दुनिया के सामने आ गया. इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने 25 मई को अंतर्राष्ट्रीय गुमशुदा बाल दिवस के रूप में मनाना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे दुनिया भर में इस दिन को महत्व दिया जाने लगा. दुनिया भर में बच्चों की सुरक्षा को अहम मानते हुए उसके लिए जागरुकता लाने के उद्देश्य से यह दिन मनाया जाता है. प्रोग्राम में अवगत कराया की मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा लापता होते हैं बच्चे
अगर राज्यवार तरीके से देखें तो बच्चे की गुमशुदगी के मामले में मध्यप्रदेश टॉप पर है. यहां सबसे ज्यादा बच्चे लापता होते हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में सन् 2021 में 10, 648 बच्चे लापता हुए थे.एक आंकड़ा ये भी बताता है कि मध्य प्रदेश में हर रोज 52 बच्चे लापता हो जाते हैं. लापता होने वाले इन बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले काफी ज्यादा है. प्रोग्राम में शक्ति शाली महिला संगठन की पूरी टीम ने भाग लिया एवम मैदानी अमले को इस दिशा में आगे जागरूक करने का प्रयास किया।

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