शिवपुरी। सिकेल सेल एनीमिया एक प्रकार का रक्त विकार है जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सी शेप, अर्धचंद्राकार या सिकेल शेप में बदल जाती हैं। बच्चों को भी यह बीमारी घेर लेती है।सिकेल शेप की लाल रक्त कोशिकाएं स्वस्थ अंडाकार शेप वाली कोशिकाओं की तुलना में सख्त और चिपचिपी हो सकती हैं। विकृत लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तरह रक्त वाहिकाओं में मूव नहीं करती हैं।यह बीमारी शिशुओं को भी प्रभावित करती है यह कहना था आज कर प्रोग्राम के मुख्य अतिथि सीएमएचओ डाॅक्टर पवन जैन का जो की आदिवासी बाहुल्य बस्ती मदकपुरा में विश्व सिकेल सेल एनीमिया दिवस पर शक्ति शाली महिला संगठन, ब्रिटानिया न्यूट्रीशन फाउंडेशन, महिला बाल विकास विभाग एवम स्वास्थ विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सिकिल सेल जागरूकता एवम जांच शिवर में आधा सैकड़ा किशोरी बालिकाओं एवम बच्चो को संबोधित करते हुए बोल रहे है उन्होंने साधारण तरीके से बच्चों एवम किशोरी बालिकाओं को समझाया की जब खून में पाई जाने वाली लाल रक्त कोशिकाओं हसीए के आकार की हो जाती है जो की सिकेल सेल डिजीज लाल रक्त कोशिकाओं के विकारों का एक समूह है जो बच्चे को उसे माता पिता से मिलता है। यह एक ऑटोसोमल रिसेसिव डिजीज है जिसका मतलब होगा कि बच्चे को यह बीमारी तभी होगी तब उसकी मां और पिता दोनों में सिकेल सेल जीन होंगे।जब बच्चे को अपनी मां और पिता दोनों से एक बीटा ग्लोबिन जीन की दो विकृत कॉपी मिलती हैं, तो बच्चे में यह विकार उत्पन्न होता है। जीन्स की विकृत कॉपी से डिफेक्टिव हीमोग्लोबिन प्रोटीन बनते हैं। आरबीसी यानी लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर असामान्य हीमोग्लोबिन प्रोटीन एक ऐसी चेन बनाता है जो एक साथ झुंड में होती हैं। ये आरबीसी की शेप को बिगाड़ देती हैं। प्रोग्राम में शक्ति शाली महिला संगठन के रवि गोयल ने जब बच्चो से पूछा तो किसी ने सिकील सेल के बारे में नही सुना था साथ ही बताया की हम एनीमिया पर बच्चो के साथ काम कर रहे है इसके तहत आज 50 किशोरी बालिकाओं बालकों एवम बच्चो को खून की जांच की गई जिनकी रीपोर्ट सोमवार को आयेंगे बच्चो में अपना रक्त समूह एवम स्किल सेल के बारे में जानने की काफी उत्सुकता थी प्रोग्राम में ब्लड बैंक के प्रभारी डॉक्टर पवन राठौर ने बताया की आज हमारे ब्लड बैंक की टेक्निकल टीम ने 50 खून के सैंपल लिए है इसके साथ डॉक्टर पवन ने समुदाय को बताया की सिकेल सेल एनीमिया के लक्षण चार से पांच महीने की उम्र तक शिशु में सिकेल सेल डिजीज के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। जन्म के बाद शुरुआती महीनों में शरीर में फीटल हीमोग्लोबिन के मौजूद होने की वजह से ऐसा होता है। जब फीटल हीमोग्लोबिन की जगह असामान्य हीमोग्लोबिन लेता है तब संकेत और लक्षण धीरे धीरे दिखने लगते हैं।
सिकेल सेल के लक्षणाों में बिलरूबिन के बढ़ने की वजह से आंखों का सफेद और त्वचा का पीला पड़ना शामिल है। इसके अलावा एनीमिया के कारण शिशु कमजोर हो जाता है। आमतौर पर लाल रक्त कोशिकाओं का जीवन 120 दिनों का होता है जिसमें सिकेल सेल सिर्फ 10 से 20 दिनों तक रहते हैं। इसकी वजह से एनीमिया होता है।डैक्टिलाइटिस में हाथ और पैर की उंगलियों में दर्दभरी सूजन होती है। ऐसा सिकेल सेल से रक्त वाहिकाओं में सूजन आने के कारण होता है। यह भी सिकेल सेल एनीमिया का कारण है। सिकेल सेल डिजीज से ग्रस्त मरीजों में बार-बार संक्रमण से प्लीहा काम करना बंद कर सकता है जिससे सिकेल सेल एनीमिया से प्लीहा डैमेज हो सकता है। सिकेल सेल के आंखों की रेटिना की रक्त वाहिकाओं के डैमेज और अवरुद्ध होने की वजह से आंखों का धुंधला पड़ना या रक्त कोशिकाओं की कमी की वजह से शिशु का धीमा विकास हो सकता है। प्रोग्राम में डाक्टर पवन जैन ने अंत में बताया की माता पिता या फ्रंट लाइन वर्कर ऐसे मरीजों को डॉक्टर को तब दिखाएं जब अगर शिशु को तेज बुखार, चिड़चिड़ापन , पीली रंगत, तेज सांसें, पेट बढ़ने, हाथ और पैरों में सूजन, कमजोरी, बेसुध होने, आंखों में दिक्कत और दौरे पड़ने की स्थिति में शिशु को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। प्रोग्राम में न्यूट्रीशन चैंपियन कविता ने अपने एनीमिया की स्टोरी शेयर की जो की पहले सीवर अनीमिया से ग्रसित थी जिसका की हीमोग्लोबिन 7 ग्राम था लेकिन आगनवाड़ी आशा द्वारा नियमित आयरन फोलिक एसिड की गोली का सेवन एवम पोषण वाटिका लगाकर इसके साथ नाश्ता समय पर करना शुरू किया आज कविता का हीमोग्लोबिन 12 हो गया है जो की सामान्य है ये करने में कविता को 6 माह का समय लगा अब वो न्यूट्रीशन चैंपियन बनकर अन्य किशोरी बालिकाओं को एनीमिया के खतरे के बारे में जागरूक कर रही है। प्रोग्राम में महिला बाल विकास की निवेदिता मिश्रा ने भी संबोधित किया । प्रोग्राम में किशोर, किशोरी, बच्चे , सुपोषण सखी आगनवाड़ी कार्यकर्ता रजनी वर्मा के साथ दोनो आशा कार्य कर्ता के साथ नर्मदा शाक्य एवम शक्ति शाली महिला संगठन की पूरी टीम उपस्थित थी।

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