शिवपुरी। मंत्री सुरेश राठखेडा के इलाके की घटना को लेकर भी वन अधिकारियों के मन में कोई खौफ नहीं हैं, चलो खौफ को जाने दें तब भी वन अमला अपनी ड्यूटी किस लापरवाही से करता हैं इसकी नजीर आज सुबह देखने को मिली जब एक काले हिरण ने इलाज के अभाव में छह घंटे तड़पने के बाद दम तोड दिया। मामला पोहरी के ग्राम झिरी के निकट नरैया खेड़ी का हैं। जब यहां के ग्रामीण सुबह सोकर उठे। करीब पांच बजे उन्होंने देखा कि कुछ कुत्ते एक हिरण की घेराबंदी में लगे हुए हैं। ग्रामीणों ने जब उसकी जान को खतरे में देखा तो कुत्तों को भगाया लेकिन तब तक शायद कुत्ते उसे चोट पहुंचा चुके थे। ग्रामीणों ने ग्राम के चौकीदार को सूचित किया। फिर वन अमले पोहरी को फोन किया तो बताया की सतनवाड़ा रेंज लगाओ। जब लोगों ने सतनवाड़ा फोन किया तो बोले हमारी हद में नहीं आता। हारकर ग्रामीणों ने चौकीदार के सुपुर्दगी में हिरण को सौंप दिया और फिर वन टीम को बुलाने की कोशिश की। आखिर में डी एफ ओ मेडम से जब दस बजे बात हुई तब टीम भेजने की बात कही लेकिन तब तक कुत्तों की घेराबंदी से घायल और घबराए हिरण ने दम तोड डाला। ग्रामीणों को दुख हैं की जिन वन्य प्राणियों के हितार्थ वन टीम की वेतन और जीवन चलता हैं उन्हीं वन्य जीवों पर वन अधिकारी लापरवाही करते हैं। ग्रामीणों ने दोषी वन अधिकारी कर्मचारी को दंडित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वन अधिकारी पहले तो फोन ही नहीं उठाते उस पर उठा भी ले तो काम नहीं करते। इधर डी एफ ओ को धमाका ने फोन लगाया तो अटेंड नहीं हुआ। लोग बताते हैं की जो नंबर मोबाइल में सेव हैं सिर्फ वही उठाए जाते हैं। अगर ये सच हैं तो फिर स्टाफ फोन नहीं उठाता तो हैरानी की बात क्या !

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