शिवपुरी। संक्षेप में प्रकरण इस प्रकार है कि प्रकरण में अनावेदक ओमप्रकाश गुप्ता ( फौत) ऋणी द्वारा आधार हाऊसिंग फायनेंस कंपनी से भवन ऋण 10,71,893.00 रूपये प्राप्त किया था जिसमें से लाईफ सिक्योर्ड बीमा की राशि व नेवासिक संपत्ति बीमा राशि के रूप में 1,73,133/- रूपये की आधार हाऊसिंग द्वारा काटी गई थी जो यह व्यक्त कर काटी थी कि अगर हाउस लोन प्राप्त कर लेने के पश्चात लोन होल्डर ओमप्रकाश गुप्ता के साथ कोई दुर्धटना कारित अथवा लोन होल्डर का स्वर्गवास होने से ऋण की संपूर्ण राशि कंपनी द्वारा वहन की जाती है, बीमा धारक के परिवारजन को बीमा किश्त राशि जमा करने से छूट रहती है। अनावेदक ओमप्रकाश गुप्ता को 02 फरवरी 2021 को स्वर्गवास हो गया था जिसकी जानकारी मृतक ओमप्रकाश गुप्ता की पत्नी निर्मला गुप्ता पुत्र योगेश गुप्ता द्वारा कंपनी को दी गई थी इसके पश्चात भी आधार हाउसिंग फायनेंस लि. द्वारा ओमप्रकाश गुप्ता के परिवारजन से ऋण राशि की निरंतर मांग की जाती रही ओर आधार हाउसिंग फायनेंस कंपनी द्वारा बिना किसी सूचना के बीमा सिक्योर्ड की राशि ओमप्रकाश गुप्ता के खाते में वापिस कर दी गई, उक्त राशि किस आधार पर वापिस की गई जिसका कोई स्पष्टीकरण कंपनी द्वारा नहीं दिया गया क्योंकि एक बार किसी व्यक्ति का बीमा हो जाने पर बीमा राशि वापिसी योग्य नहीं होती जिससे दुःखित होकर स्वर्गीय ओमप्रकाश गुप्ता की पत्नि निर्मला गुप्ता द्वारा माननीय न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग शिवपुरी के समक्ष आधार हाउसिंग फायनेंस कंपनी के विरुद्ध परिवाद पत्र उनके अभिभाषक अजय कुमार जैन एडव्होकेट द्वारा प्रस्तुत कर दिया गया था। लेकिन आधार हाउसिंग फायनेंस लि० की ओर से वित्तीय अस्तियों का प्रतिभूतिकरण, पुर्नगठन और प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम 2002 की धारा 14 के अंतर्गत माननीय न्यायालय अपर जिला मजिस्ट्रेट शिवपुरी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसमें मृतक ओमप्रकाश गुप्ता ऋणी के वैध उत्तराधिकारी उनकी पत्नी श्रीमति निर्मला गुप्ता व पुत्र योगेश गुप्ता को अनावेदक के रूप में वर्णित कर बंधक रखी आवासीय अचल संपत्ति पक्का मकान का भौतिक आधिपत्य दिलाये जाने का अनुरोध किया गया तब प्रकरण के अनावेदक निर्मला गुप्ता व योगेश गुप्ता द्वारा अपने अभिभाषक अजय कुमार जैन एडव्होकेट के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होकर जबाव प्रस्तुत किया गया व संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किये गये। रिकार्ड पर आये दस्तावेजों, जबाव तथा उभय पक्ष के तर्कों को दृष्टिगत रखते हुये न्यायालय ने यह पाया कि प्रक्रिया में त्रुटि होने से प्रकरण में सम्पत्ति का भौतिक आधिपत्य दिलाये जाने हेतु आवेदन स्वीकार योग्य न पाकर कंपनी का बंधक संपत्ति पर वास्तविक आधिपत्य प्राप्तकरने का आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। उक्त प्रकरण में अनावेदक निर्मला गुप्ता व योगेश गुप्ता की ओर से पैरवी अजय कुमार जैन एडव्होकेट द्वारा की गई।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें