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धमाका साहित्य कॉर्नर: साहित्य हमें संवेदनशील और मानवीय बनाता है

सोमवार, 27 जून 2022

/ by Vipin Shukla Mama
प्रलेसं कार्यकारिणी की बैठक संपन्न
शिवपुरी। ​मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ की शिवपुरी इकाई की कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन रविवार को लेखक ज़ाहिद ख़ान के निवास पर हुआ। जिसमें कार्यकारिणी से जुड़े सभी लेखक डॉ. रामकृष्ण श्रीवास्तव, अख़लाक ख़ान, अभय जैन, राजेन्द्र टेमक, अविनाश पांडेय, युधिष्ठर रघुवंशी, सुनील व्यास और जीतेन्द्र भार्गव ने भागीदारी की। इकाई के अध्यक्ष प्रोफेसर पुनीत कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई निर्णय लिए गए। जुलाई में प्रेमचंद जयंती पर जिले के दो स्कूलों में छात्र—छात्राओं के बीच कथा सम्राट प्रेमचंद के परिचय के साथ उनकी कहानी का वाचन करने का निर्णय हुआ, तो अगस्त में व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयंती पर भी एक छोटा सा कार्यक्रम करने पर सभी की सहमति बनी। इकाई से जुड़े लेखकों का कहना था, नई पीढ़ी में साहित्य के प्रति रुचि कम होती जा रही है। जबकि साहित्य ही हमें संवेदनशील और मानवीय बनाता है। इसलिए हमारी कोशिश रहे कि नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ा जाए। बड़े साहित्यकारों की जयंती—पुण्यतिथि के अवसर पर विद्यार्थियों के बीच जाकर, उन्हें उनसे परिचित कराया जाए।
 प्रसिद्ध हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास 'रेत समाधि' के अंग्रेज़ी अनुवाद 'टूंब ऑफ़ सैंड' को 'इंटरनेशनल बुकर प्राइज़' मिलने पर प्रलेसं, शिवपुरी इकाई ने  गीतांजलि श्री को बधाई देते हुए, हिंदी भाषा के लिए एक बड़ा सम्मान बतलाया। बैठक के अंत में साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष, प्रस़िद्ध उर्दू आलोचक प्रोफ़ेसर गोपी चंद नारंग को श्रद्धांजलि दी गई। प्रलेसं उपाध्यक्ष डॉ.रामकृष्ण श्रीवास्तव ने कहा, गोपी चंद नारंग उर्दू के पहले ऐसे स्कॉलर थे, जिन्हें भारत और पाकिस्तान दोनों देशों से नागरिक सम्मान मिला। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया, तो पाकिस्तान हुकूमत ने उन्हें अपने सबसे बड़े अवार्ड 'सितारा-ए इम्तियाज़' से नवाजा। बैठक का संचालन प्रलेसं, शिवपुरी इकाई ​सचिव ज़ाहिद खान ने किया।

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