शिवपुरी। जिले को पर्यटन के नक्शे पर उभारने और टाइगर प्रोजेक्ट जेसे मिशन पर तेजी से काम कर रही शिवपुरी के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर पर्यटक बैन कर दिए गए हैं। पूरे वर्षाकाल के लिए यानी सितंबर अंत तक भदैया कुण्ड, सांख्य सागर झील (चांदपाठा), मडीखेडा बांध, टुंडा भरका, भूरा-खो सहित तमाम अन्य स्थलों के साथ नदी, तालाबों के आसपास पर्यटक नहीं फटक सकेंगे। यह आदेश एसडीएम गणेश जायसवाल की और से जारी हुआ हैं लेकिन इसका विरोध भी शुरू हो गया हैं। लोगों ने भारी बारिश के अलर्ट के बीच नदी, नालों में उफान, झरनों की तीव्रता के चलते लगाए गए प्रतिबंध का तो स्वागत किया हैं, लेकिन पूर्ण वर्षाकाल के लिए प्रतिबंध का विरोध जताया हैं। जागरूक लोगों ने कहा की शिवपुरी जिसमें पर्यटन की ही संभावना शेष हैं। कूनो में चीते, शिवपुरी में टाइगर से पर्यटकों का पुनः आगमन होने की उम्मीद हैं इस बीच झरने और नेशनल पार्क सम्मोहन का काम करेंगे लेकिन पूरे वर्षाकाल तक पर्यटक स्थलों पर रोक ठीक नहीं।
किसने क्या कहा
चेंबर ऑफ कॉमर्स के मानसेवी सचिव विष्णु अग्रवाल ने अभी की स्थिति पर लगाई रोक का स्वागत किया लेकिन हालात अच्छे होने पर रोक हटाने की बात कही।
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जिला पर्यटन संवर्धन समिति के अध्यक्ष अरविंद सिंह तोमर ने कहा हाल के हालात में रोक उचित हैं लेकिन पूरे वर्षाकाल के लिए यह आदेश ठीक नहीं। आप प्रबंध जुटाए, सुरक्षा कड़ी करें। पर्यटन को आगे ले जाने के लिए प्रबंध तो करने पड़ेंगे। पूरी तरह रोक तो प्रशासन का फेलियर हैं।
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एडवोकेट गजेंद्र यादव ने कहा की पर्यटन को लेकर लाखों फूंके जा रहे हैं। दूसरी तरफ पर्यटकों को रोका जाता हैं। अभी के हालात में तो रोक ठीक लेकिन बाद तक क्यों ? आदेश बदला जाए।
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एडवोकेट राजीव शर्मा ने कहा की जिला प्रशासन अपनी नाकामी के लिए यह सब करता हैं। चलो मान लिया की अभी बाढ़ का खतरा, उफान हैं तब रोक ठीक लेकिन सामान्य हालात होने पर भी रोक रहेगी यह ठीक नहीं। पर्यटन को बचाना हैं या नष्ट करना हैं, नष्ट करना हैं तो इन जगहों को हमेशा के लिए सील करो।
क्या हैं आदेश में
जिले के जिन पर्यटक स्थलो पर आमजन का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया हैं, धारा 144 भी लगाई गई हैं। शिवपुरी अनुविभागीय दण्डाधिकारी गणेश जायसवाल द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत तहसील शिवपुरी अंतर्गत आने वाले विभिन्न स्थलों पर वर्षाकाल अवधि तक जनसामान्य का आना-जाना प्रतिबंधित करने हेतु आदेश जारी किया है।
जारी आदेश के तहत जन-सामान्य की जान एवं माल की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए तहसील शिवपुरी के सुल्तानगढ़ वाटर फॉल (जिला शिवपुरी एवं जिला ग्वालियर की सीमा), भदैया कुण्ड, सांख्य सागर झील (चांदपाठा), मडीखेडा बांध, टुंडा भरका, भूरा-खो तथा क्षेत्रांतर्गत अत्यधिक जल भराव वाले नदी एवं जल संरचनाएं आदि पर आमजन का आना-जाना प्रतिबंधित रहेगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसके विरूद्ध भारतीय दण्ड विधान 1860 की धारा 188 एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 से 60 के अंतर्गत तथा अन्य सुसंगत अधिनियमों के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।
यह दलील दी हैं यह उचित भी है
उल्लेखनीय है कि सुल्तानगढ़ वाटरफॉल शिवपुरी एवं ग्वालियर की सीमा पर स्थित एक प्राकृतिक झरना है। जो ग्वालियर में आता हैं जिसको देखने के लिए शिवपुरी एवं ग्वालियर से लोग आते है। वाटरफॉल का पहाड़ियों से होता हुआ बारिश का पानी बहुत तेजी से बढता है। जिससे लोग उसमें फंस जाते है। पूर्व में वर्ष 2018 में भी सुल्तानगढ़ वाटर फॉल को देखने गये लोग पानी अचानक बढ़ जाने के कारण वाटरफॉल में ही फंस कर रह गये थे। चार दिन के रेस्क्यू के बाद 45 लोगों को बचाया गया था एवं 10 लोगों की जान चली गई थी। इस वर्ष भी मानसून के मौसम में बड़ी संख्या में सुल्तानगढ़ वाटरफॉल को देखने वाले लोगों के आने की संभावना है, जन एवं पशु हानि को रोकने के लिए एवं इस प्रकार किसी प्रतिकूल परिस्थिति से बचने के लिये ऐसे स्थलों पर धारा 144 लगाए जाने की कार्यवाही की गई है।
यह हैं जारी हुआ आदेश

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