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धमाका: पलायन किसी समस्या का हल नहीं : डॉ.वंदना सेन

शनिवार, 20 अगस्त 2022

/ by Vipin Shukla Mama
चित्र भारती का श्रीकृष्णरूप सज्जा कार्यक्रम आयोजित
ग्वालियर। भारत के राक्षस रूपी शत्रु आज भी देश को अस्थिर और खंडित करने का निरंतर षडय़ंत्र करते रहते हैं? आखिर हमारा सभ्य समाज इन सबसे कैसे निपटे?  इसका समाधान हजारों वर्ष पहले श्रीकृष्ण के गीता संदेश में है? यह उद्गार मुख्य वक्ता डॉ. वंदना सेन ने सरस्वती शिशु मंदिर चिटनिस की गोठ में चित्र भारती द्वारा आयोजित श्रीकृष्णरूप सज्जा कार्यक्रम में व्यक्त किए। डॉ. सेन ने कहा कि जब महारथी अर्जुन विषाद से ग्रस्त होते हैं और वे कौरव सेना को ‘अपना’ कहकर उनके विरुद्ध शस्त्र उठाने से मना कर देते हंै, तब श्रीकृष्ण श्रीमद्भगवदगीता के संदेश से अर्जुन का पथ-प्रदर्शित करते हैं। तब हरि, अर्जुन से कहते हैं कि पलायन किसी भी समस्या का हल नहीं। श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की रक्षा हेतु यदि संघर्ष करने की आवश्यकता हो तो उससे भागना- कायरता है, अधर्म है। तब वासुदेव के विचारों से प्रभावित होकर अर्जुन ने ‘न दैन्यं, न पलायनम्’- अर्थात् कभी असहाय न होना और न कभी भागना, का उद्घोष किया। इसके बाद महाभारत के युद्ध में जो कुछ हुआ, वह सर्वविदित है। 
श्रीकृष्ण ने बचपन से किया अनाचारी व्यवस्था का विरोध: चाकणकर
चित्र भारती के सह प्रांत संयोजक दिनेश चाकणकर ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि सुदर्शन जैसा शस्त्रधारी होने के बाद भी जिनके हाथ में मुरली है वो श्रीकृष्ण हंै। सर्व सामथ्र्यवान होने के बाद भी सारथी बनने वाले श्रीकृष्ण जी के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गोकुल में कान्हा की लीलाएं अनाचारी व्यवस्था का विरोध थीं, ग्रामवासियों को अपने अधिकारों के प्रति सचेत करके, स्वावलम्बी बनाना ही उनका प्रयोजन था। मथुरा गमन के बाद का जीवन भी असत्य और निरंकुशता का दमन करते हुए निष्कलंक निकल आने का आदर्श प्रस्तुत करता है। जरासंध- शिशुपाल जैसी समाज विरोधी शक्तियों का विनाश किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती शिशु मंदिर चिटनिस की गोठ के छात्र-छात्राओं ने भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक रूप सज्जा एव वेशभूषा के माध्यम से प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना, दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विभाग सह प्रचार प्रमुख डॉ. नरेश त्यागी, चित्रभारती के विभाग संयोजक चंद्रप्रताप सिकरवार, रंग दे बसंती ग्रुप के नारायण भदौरिया,अजय कुबेर, विकास सेन , विद्यालय के सुधीर गुप्ता मंचासीन थे। कार्यक्रम का संचालन चित्रभारती के नारायण पिरोनिया एवं आभार प्रदर्शन मनीष मांझी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर राममोहन वर्मा, एकात्मता शर्मा, सुमित कश्यप , दीपक सोनी, पारुल बांदिल सहित विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।









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