शिवपुरी। आचार्य विजयधर्म सूरि शताब्दी महोत्सव के आठवे दिन समाधि मंदिर प्रांगण में आयोजित सर्वधर्म सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के संतों ने अपने-अपने धर्म की खूबियों का बखान किया। सनातन हिन्दू धर्म से लेकर ईसाई धर्म, मुस्लिम धर्म, सिक्ख धर्म, जैन धर्म के अलावा गायत्री परिवार से जुड़े संतों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सभी धर्म इंसान को जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। अमन, चैन, प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। कोई भी नफरत और घृणा की शिक्षा नहीं देता, लेकिन इसके बावजूद भी चिंता का विषय यह है कि नफरत का यह वातावरण आखिर फैलाता कौन है? ऐसी विकट स्थिति में धर्म और धर्मगुरू क्या करें? इसे इशारे इशारों में एक प्रेरणास्पद कथा के माध्यम से पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी ने बखूबी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जंगल में जब आग लगी हो तब एक छोटी चिडिय़ा अपनी नन्हीं सी चोंच में बूंद-बूंद पानी भरकर आग बुझाने का कार्य करती है तो यह कार्य असंभव लगता है, लेकिन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि जब भी इतिहास लिखा जाएगा तो उस नन्हीं चिडिय़ा का नाम आग लगाने वालों में नहीं, बल्कि आग बुझाने वालों में होगा। संत कुलदर्शन विजय जी ने कहा कि ठीक उसी तरह उस नन्हीं चिडिय़ा की भूमिका धर्मगुरू अदा करें। आचार्य कुलचंद्र सूरि जी महाराज की निश्रा में आयोजित सर्वधर्म सम्मेलन में प्रमुख रूप से गुरूचरण जी महाराज पाण्डोखर सरकार, फादर किलीमेंट, सूफी संत मोहम्मद समीर शाह, जनाब काजी इकरामुद्दीन साहब, बीसभुजी दरबार के बाबा श्रीवास्तव, बाबा तेगसिंह, श्यामदास उदासी महाराज, विनयदास महाराज, सुरेन्द्र सिंह, अरूण महाराज, एनआर मेहते गायत्री परिवार, विकास शर्मा, अशोक शर्मा, जानकी सेना के बृजेश तोमर प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इसके अलावा संत कुलदर्शन विजय जी, संत कुलरक्षित विजय जी, संत कुलधर्म जी, साध्वी शासन रतना श्रीजी, साध्वी अक्षयनंदिता श्रीजी ठाणा छह सतियां भी विराजमान थी।
सर्वधर्म सम्मेलन में फादर किलीमेंट ने ईसा मसीह के उपदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इंसान को पृथ्वी के नमक की संज्ञा दी है तथा कहा है कि यदि तुम फीके पड़ जाओगे तो किसी काम के नहीं रहोगे। तुम संसार की ज्योति हो। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म ने भारत राष्ट्र के निर्माण में भी अनुपम योगदान दिया है। खासतौर पर शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ईसाई धर्म की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। महिला सशक्तिकरण को भी ईसाई धर्म ने बढ़ावा दिया है। इस अवसर पर उन्होंने मदर टेरेसा को भी याद किया। काजी जनाब इमरामुद्दीन साहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस्लाम धर्म ने भाईचारे को बढ़ावा देने का काम किया है। मोहम्मद रसूलउल्ला ने इंसान को जीने का तरीका सिखाया है। इस्लाम धर्म ने शिक्षा दी है कि माँ के पैरों तले जन्नत होती है। इस्लाम धर्म में हज यात्रा का महत्व है, लेकिन हज यात्रा से भी महत्वपूर्ण है अपनी माँ को मोहब्बत की निगाह से देखना। जितनी बार अपनी माँ मोहब्बत की निगाह से देखोगे उतनी बार हज यात्रा का फल मिलेगा। मोहम्मद साहब का संदेश है कि जमीन वालों पर रहम करो, आसमान वाला तुम पर रहम करेगा। बाबा तेगसिंह ने अपने गागर से सागर भरने वाले उद्बोधन में कहा कि सिक्ख धर्म में गुरू महिमा अपरम्पार है। आत्मा से परमात्मा को जो मिला दे वह गुरू है। सब उस मालिक की संतान हैं। सबका भला सिक्ख धर्म का मुख्य उद्देश्य है। सूफी बाबा समीर शाह ने प्रेरक उद्बोधन में बताया कि हिन्दुस्तान जैसी मिसालें पूरे विश्व में कहीं सुलभ नहीं हैं। यह वह देश है जिसमें गंगा, जमनी संस्कृति का वास है। भारत अकेला देश है जहां सभी धर्म के लोग अपनी-अपनी परम्पराओं का पालन करते हुए आपसी सद्भाव, प्रेम और भाईचारे से रहते हैं, लेकिन आज माहौल बदल गया है जबकि कोई भी धर्म नफरत का पाठ नहीं पढ़ाता। सिक्ख धर्म के सुरेन्द्र सिंह ने एक ऊंकार सतनाम का जिक्र करते हुए कहा कि ईश्वर वह जिसका कोई दुश्मन नहीं, जिसे कोई डर नहीं जो सब जगह व्याप्त है, प्रकाश रूप है। सिक्ख धर्म की मान्यता है कि गुरू ईश्वर से मिला करता है। अरूण महाराज ने कहा कि सभी धर्मों का संदेश है कि प्रेम से रहो। गायत्री परिवार के एनआर मेहते ने बताया कि जब सब कुछ ठीक नहीं चल रहा होता है तो दिव्य आत्माओं का अवतरण होता है। उन्होंने गायत्री परिवार के बारे में विस्तार से बताया। सबसे अंत में पाण्डोखर सरकार ने धर्मगुरूओं से अपील की कि वह अपने-अपने पंथ के माध्यम से धर्म ध्वजा फहराते चलें। अपने-अपने सम्प्रदाय और अपने धर्म गुरूओं की वाणी और शास्त्रों को सुरक्षित रखें। वहीं दूसरे धर्मों के प्रति प्रेम भाव बनाए। उन्होंने कहा कि एक दूसरे के ज्ञान की पूजा होनी चाहिए। सत्य पाने के अलग-अलग रास्ते हो सकते हैं, लेकिन सभी रास्तों की मंजिल एक होती है इसलिए किसी के प्रति दुर्भाव न रखें। सर्वधर्म सम्मेलन में आचार्य कुलचंद्र सूरि जी ने सभी धर्म गुरूओं का सम्मान कर उन्हें स्मृति चिन्ह भी भेंट किए।
धर्मगुरू जीवदया, जनरक्षा और राष्ट्ररक्षा का लें संकल्प : मुनि कुलदर्शन विजयजी
जैन संत कुलदर्शन विजय जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सभी धर्म गुरू जीवदया को अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बनाएं। जीओ और जीने दो का संदेश दें। जनरक्षा के क्षेत्र में भी वह बढ़चढ़कर कार्य करें। एक दूसरे के साथ प्रेमभाव बनाना होगा। राष्ट्र रक्षा की जब बात आए तब सभी को अपने-अपने मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना होगा। आचार्य कुलचंद्र सूरि जी ने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि देश और समाज को बचाने का गुरूतर दायित्व संतों और धर्म गुरूओं पर है। उनके सच्चे मन से किए गए प्रयास से देश और समाज की दशा पलट जाएगी।
ग्रहों की शांति के लिए करें ये साधारण उपाय
धर्म सम्मेलन में ज्योतिषाचार्य विकास शर्मा ने नवग्रह की शांति के लिए महत्वपूर्ण उपाय बताए। उन्होंने कहा कि अपने पिता और दादा को प्रसन्न रखोगे तो सूर्य की खराब दिशा परेशान नहीं करेगी। माता की प्रसन्नता से चंद्र का प्रकोप शांत होगा। कुटुम्ब को शांत रखोगे तो मंगल ग्रह अनुकूल होगा और धर्म आचरण से गुरू मजबूत होगा। बहन, बेटी और बुआ के प्रति प्रेमभाव से बुध की दशा से मुक्ति मिलेगी। कन्या और पत्नी को प्रसन्न रखोगे तो शुक्र ग्रह परेशान नहीं करेगा। गरीब, असहाय और निर्धन व्यक्तियों की सेवा करने से शनि ग्रह अनुकूल होगा। दादा, नाना और ससुराल पक्ष को संतुष्ट करने से राहु तथा मंदिर की सेवा और साफ सफाई करने से केतु ग्रह के प्रकोप से छुटकारा मिलेगा।

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