इसी मामले में उनकी पत्नी अनीता और बेटी लावण्या पर भी केस दर्ज की मांग की जा रही हैं।
भोपाल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नेमीचंद जैन की शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने केस दर्ज किया। ये शिकायत दो अगस्त को की गई थी। जिसमें भोपाल बंगले की पत्नी और खुद के नाम खरीदी जमीन के लिए उक्त राशि अर्नी इंफ्रा से खाते में डलवाने की बात सामने आई थी। जांच हुई तो प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने अर्नी इंफ्रा के मालिक आदित्य त्रिपाठी को गिरफ्तार किया। तब पता चला कि अर्नी इंफ्रा नहीं बल्कि जल संसाधन विभाग का सबसे बड़ा ठेकेदार तो राजू मेंटना है जो अधिकारियों की मिलीभगत से ठेका हासिल करता है। इसके बाद अन्य कंपनियों को ठेका दे देता है। जल संसाधन विभाग में लंबे समय तक पदस्थ रहे जुलानिया के समय मेंटाना, ठेकेदार फर्म थी, उसी समय जुलानिया की बेटी लावण्या हैदराबाद मेंटाना की ही एक कंपनी में जॉब कर रही थी। इसकी जानकारी जुलानिया ने राज्य सरकार को नहीं दी थी। राज्य सरकार ने 22 अगस्त 2016 को जुलानिया को जल संसाधन विभाग से हटाया और IAS पंकज अग्रवाल को कमान सौंप दी थी। गजब की बात यह हुई की IAS पंकज अग्रवाल के कार्यकाल में मेंटाना कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया। इधर मेंटाना के ब्लैक लिस्टेड होते ही अचानक सरकार ने पंकज अग्रवाल को हटाया और जुलानिया को फिर से जल संसाधन में पदस्थ कर दिया। जुलानिया मेंटाना को ब्लैक लिस्ट से हटाकर उसकी फर्म को काम सौंप दिया। आरोप हैं की जुलानिया मेंटाना की मदद करते रहे और उससे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ भी लेते रहे। शिकायतकर्ता ने राधेश्याम जुलानिया पर विदेश में बेटे अभिमन्यु को एक करोड़ रुपए भेजने का आरोप लगाते हुए इसकी भी जांच कराने की मांग की। इस संबंध में तत्कालीन IAS रमेश थेटे ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पूरे मामले में फिलहाल लोकायुक्त संगठन के विधि अधिकारी अवधेश कुमार गुप्ता ने शिकायतकर्ता को लिखित सूचना दी है कि उनकी शिकायत के आधार पर लोकायुक्त संगठन ने रिटायर्ड IAS राधेश्याम राधेश्याम जुलानिया के विरुद्ध प्रकरण क्रमांक 0094/ई/ 22 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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