भोपाल। रेल पटरी पर मवेशियों के आने की घटनाओं को रोकने के लिए पूरे भोपाल मण्डल पर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत मण्डल के सभी आउट पोस्टों के प्रभारियों तथा रेल पथ निरीक्षकों के नेतृत्व में पूरे भोपाल मण्डल में रेल पटरी के नजदीक के गाँव व बस्तियों में जगह-जगह शिविर लगाकर मवेशी मालिकों को समझाया जा रहा है कि वह अपने जानवरों को रेल पटरी पर जाने से रोकें।इसी कड़ी में आज मंडल के गुना-महूगड़ा, दीवानगंज-भदभदाघाट, सुमेर-गुलाबगंज एवं गंजबासौदा-पबई के मध्य रेलवे लाइन के किनारे के गाँव में जगह-जगह पर रेल पथ निरीक्षकों एवं रेल सुरक्षा बल द्वारा शिविर लगाकर मवेशी मालिकों को समझाया गया। ट्रेसपासिंग तथा रेलवे ट्रैक पर पत्थर रखने की घटनाओं की रोकथाम एवं नागरिक जागरूकता अभियान के तहत वरिष्ठरेल पथ निरीक्षक श्री त्रिपुरारी कुमार मय स्टॉफ साथ में रानी कमलापति से सहायक उपनिरीक्षक रेल सुरक्षा बल श्री बीएम तिवारी एवं स्टाफ द्वारा किलोमीटर क्रमांक 815 / 34 से 816/ 2 तथा 806/6A से 806/4A तथा 803/7N से 803/9N पर किसानों को एकत्र कर तथा मवेशी चराने वालों को एकत्र कर रेलवे ट्रैक के किनारे मवेशी नहीं चराने तथा मवेशियों को लेकर ट्रैक पार नहीं करने बाबत समझाइश दी गई। इसके उपरान्त किलोमीटर 810/26A से 810/28A, समपार फाटक क्रमांक 243B तथा 809/18 से 809/20 पर आसपास रेलवे सीमा से लगे क्षेत्र के रहवासियों को एकत्र कर ट्रैक पार नहीं करने तथा पालतू जानवर आदि ट्रैक के किनारे नहीं चराने एवं ट्रेन पर पत्थर नहीं रखने बाबत समझाइश दी गई।मवेशी मलिकों को बताया गया कि पालतू जानवरों का रेलवे ट्रैक पर जाना ट्रेसपासिंग ( Trespassing) में आता है। जानवर को पटरी पर छोड़ देने तथा उसकी जान और रेल परिचालन को ख़तरा पैदा करने वालों के ख़िलाफ़ रेलवे
प्रशासन रेल अधिनियम की धारा 147 के तहत कार्यवाही करेगा, जिसमें 6 माह तक की जेल अथवा 500 रुपये से 1000 रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। मण्डल रेल प्रबंधक ने अपील की है कि मवेशियों के मालिक अपने मवेशियों को ट्रैक पर न आने दें। इससे मवेशियों की जान जाने के साथ ही दुर्घटना होने की संभावना रहती है। मवेशियों के ट्रैक पर आने की स्थिति में मवेशियों के मालिकों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्यवाही करनी पड़ सकती है।

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