तबादले के निहितार्थ...
इधर कुछ भी लिखने से पहले बस इतना समझ लीजिए कि हमने बहुत करीब से कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह को देखा हैं। सरकारी सेवा में किसी भी जिले के शीर्ष पद पर कलेक्टर का ही राज होता हैं ये हम भी जानते हैं और खुद कलेक्टर अक्षय जी भी, लेकिन इस पद पर अभिमान रहित इंसान और सदैव मुस्कुराकर किसी भी खास या साधारण व्यक्ति से अपने की तरह घुलने मिलने वाले अक्षय जी जैसे इंसान हमने कम ही देखे हैं। आजकल के जमाने में एक बाबू से फोन उठाने, मेसेज देखने या पलटकर जवाब की उम्मीद बेमानी है लेकिन एक इंसान हैं जो दिन रात देखे बिना, जाने और अनजाने लोगों के हर फोन का रिप्लाई देना कभी नहीं भूलते। ये उन लोगों के लिए एक नजीर हैं जो व्यस्तता के बहाने बनाकर किसी का फोन नहीं उठाते या कॉल बैक नहीं करते। बस इतनी ही अच्छाई होती तब भी हम कुछ नहीं लिखते लेकिन महज दो साल के कार्यकाल में एक इंसान ने इस जिले में इतनी पूंजी जमा कर ली की आज जब उनका तबादला हुआ हैं तो कई गले रूंधे हुए हैं तो कुछ की आंख नम हैं। अपने ही अधीन अधिकारी और कर्मचारियों के साथ मृदुल व्यवहार की शैली से इस इंसान ने न जाने कितनों को अपना बना लिया है।
हम बात कर रहे हैं जिला कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह की। जिनका बीती रात भोपाल से तबादला आदेश आया हैं और शिवपुरी की बेमिसाल, बेहतरीन, बेजोड़ और नवाचारों से ओतप्रोत पारी के चलते उन्हें बतौर इनाम ग्वालियर महानगर की सेवा का अवसर प्रदान किया गया हैं। नए अंदाज में तरुणाई लेते ग्वालियर को अभी केंद्रीय मंत्री द ग्रेट श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुआई में कई सोपान तय करने हैं और ऐसे में एक हरफन मौला अधिकारी के रूप में कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह सफल साबित होंगे इसकी पूरी उम्मीद हैं। उनकी हर वर्ग और व्यक्ति से सहज शेली में कार्य कराने की क्षमता का किसी से कोई मुकाबला नहीं। वे भले ही ग्वालियर प्रमोशन पर जा रहे हैं लेकिन शिवपुरी उनके किए गए तमाम कार्यों को कभी भुला नहीं सकेगी। मंत्रियों की फौज, मंतव्यों के भिन्न मायने होते हुए भी उन सभी में फिट बैठने वाले अधिकारी का नाम हैं कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह। उन्होंने शायद ही किसी को निराश किया। अगर कार्य नीति गत हैं, कागजों में कोई कमी नहीं हैं तो कल्पना से परे जाकर उन्होंने कोई भी काम पेंडिंग नहीं रखा। उनके जिले में आते ही मिली चुनौतियों को भी उन्होंने पलक झपकते निपटाया। ये काबिले गौर है की उन्हे ज्वाइन करते ही एक और बेहतरीन अधिकारी एसएसपी राजेश सिंह चंदेल के रूप में मिले। जिन्होंने अक्षय जी से पहले हिंदी पर न के बराबर अधिकार रखने वाली कलेक्टर अनुग्रह पी की पारी भी अपने बूते korona के पहले चरण में सफलता से निपटाई थी। जब अक्षय जी आए तो शिवपुरी को लगभग समझ चुके एसएसपी राजेश ने उन्हें अच्छे, बुरे से परिचित कराया। जिसके बाद ये कहा जाए की जिले को दो कलेक्टर और दो एसपी को सौगात मिली तो मजाक नहीं होगा क्योंकि बीते कई सालों में ऐसा साफ, सादगी वाले अधिकारियों का गठजोड़ कभी नहीं देखा गया। जिसके नतीजे में जिले को आज वो तमाम सौगात मिल चुकी हैं जो बीते कई सालों में नहीं मिली थीं।
जनता के बीच जाकर अपना बना लेना
कलेक्टर अक्षय सिंह और एसएसपी राजेश के समान गुण का कोई सानी नहीं। अच्छा हो या बुरा ही हो, दोनों अधिकारियों ने कभी कदम पीछे नहीं रखे। ऑन स्पॉट जाकर दोनों ही अधिकारी किसी भी मसले को हल किया करते हैं। जिससे इंसान से पहचान तो बढ़ती ही हैं बल्कि उसी का नतीजा हैं की आज जब कलेक्टर अक्षय जी का तबादला हुआ हैं तो सैकड़ों लोग उदास हैं, उनके प्रमोशन पर भी चेहरे की हंसी काफुर हैं।
टाइगर आयेंगे तो याद आयेंगे कलेक्टर अक्षय
शिवपुरी जिले में माधव नेशनल पार्क होने से कोई उद्योग की रणनीति कभी सफल नहीं हुई। जब कलेक्टर अक्षय जी ने नगर के कुछ जागरूक लोगों से बातचीत में समझा की पर्यटन इस जिले को उबार सकता हैं तो उन्होंने जिले की पर्यटन संवर्धन समिति को नई ऊंचाई दी और एक टीम एसी खड़ी की जिसने पूरा फोकस पर्यटन पर किया। डिप्टी कलेक्टर शिवांगी अग्रवाल के नेतृत्व में और खुद कलेक्टर अक्षय, एसएसपी चंदेल के मार्गदर्शन में पर्यटन के रास्ते से भटकी हुई गाड़ी को ट्रैक पर लाया गया। बहुतेरे प्रयास के नतीजे में आज माधव नेशनल पार्क टाइगर सफारी के लिए विकसित किया जा चुका हैं। जब भी टाइगर आयेंगे तो कलेक्टर अक्षय भी हमको याद आयेंगे। रंगमंच की बात करें तो बंद प्राय गीत, संगीत, फोक , नाटक तक की शुरुआत उन्होंने कराई हैं। नगर के सरकारी तमाम कार्यालयों को डामर की सड़कों से जोड़ने की विचारधारा भी कलेक्टर अक्षय की रही जिसे लोनिवि के ईई धर्मेंद्र सिंह ने अंजाम दिया। खलों से लेकर खेतों तक और जंगल से जायके तक के सफर में कलेक्टर अक्षय सिंह ने हर वर्ग को जोड़ने का काम किया हैं वो भी पेशेंस के साथ। हमने उन्हें कभी झल्लाते हुए नहीं देखा। बिखरे हुए बालों के बीच जिले के लिए हमेशा फिक्र मंद कलेक्टर अक्षय जी से थोड़ा दूर होने का गम हमको भी हैं लेकिन हम उन्हे और उनके बेहतरीन कामों को ग्वालियर में भी महकाते रहेंगे। दोस्तों ये हमारे मन के भाव हैं जो हमने आपके सामने उल्लेखित किए। हो सकता हैं किसी को पसंद आए तो किसी को नहीं लेकिन एक बेहतरीन इंसान के लिए लिखना जरूरी हैं।उन्हे नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं।

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