शिवपुरी 15 फरबरी 2022। प्रादेशिक आहवान पर शासकीय एवं स्वशासी चिकित्सकों यानि धरती के भगवान ने सात सूत्रिय मांगो को लेकर
हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया हैं। हड़ताल की पूरी फिल्म रिलीज से पहले 16 को ट्रेलर देखने को मिलेगा जबकि 17 से काम बंद हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। साफ हैं की लोगों के साथ जिला प्रशासन और सरकार के स्वास्थ्य खराब करने वाली इस खबर से लोग परेशान अनुभव कर रहे हैं। इस हड़ताल में जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और ब्लॉक स्तर के डॉक्टर शामिल होंगे। इसके पूर्व आज 15 फरवरी 2023 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ पवन जैन तथा सिविल सर्जन डाक्टर आरके चोधरी को ज्ञापन सौंपकर डॉक्टरों ने आंदोलन प्रारंभ कर दिया है। अपनी मांगों को लेकर काली पटटी बांध कर विरोध दर्ज करा रहे चिकित्सक 16 फरवरी को सुबह 10 बजे से 12 बजे तक सांकेतिक काम बंद हडताल करेंगे तथा सरकार द्वारा चिकित्सकों की मांगे न माने जाने पर 17 फरवरी से पूर्णतः काम बंद हडताल प्रारंभ कर देंगे।
जानिए क्या वजह हड़ताल की
म.प्र. मेडीकल अधिकारी संगठन के जिला अध्यक्ष डाॅ एनएस चोहान तथा जिला उपाध्यक्ष डाॅ संजय ऋषीश्वर ने जानकारी देते हुए बताया कि म.प्र. में स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों के लिए प्रोत्साहन पूर्वक काम का माहौल न होने के कारण चिकित्सा संस्थानों से शासकीय चिकित्सक नौकरी छोड रहे है। वर्तमान स्थिति में शहरों से लेकर ग्रामीण क्षैत्रों तक चिकित्सकों की कमी इसका प्रमाण है। स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशासनिक हस्तक्षेप की निरंतर बृद्धि होती जा रही है। केन्द्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार तथा हरियाणा सरकार द्वारा चिकित्सकों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं से कमतर स्वास्थ्य सुविधाएं चिकित्सकों को म.प्र. में मुहैया कराई जा रही हैं।
डाक्टर द्वेय ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थाओं में आधार भूत संसाधनों की कमि और प्रशासकों के बडते हस्तक्षेप को देखते हुए चिकित्सकों ने सात सूत्रिय मांग शासन के समक्ष प्रस्तुत की हैं। जिसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीति का गठन हो, समिति की बैठक हर दो माह में हो। चिकित्सकों के संबंध में नीतिगत निर्णय लेने से पूर्व उक्त समिति की सहमति ली जावे। सेवा नियमों के अनुरूप पात्र चिकित्सकों को लाभ प्रदान किए जाएं जैसे समयमान वेतन मान पदोन्नति, पेंशन प्रकरण, शिकायत एवं विभागीय जांच की समय सीमा में समाप्ति आदि प्रमुख हैं । चिकित्सकों से संबंधित मुददों को समिति के माध्यम से निराकरण किया जावे। उच्चतम न्यायालय के निर्णय अनुसार चिकित्सकों का वेतन मान निर्धारण किया जावे और रिकबरी निरस्ती करण हेतु विभागीय आदेश जारी किए जाएं। विभाग में पदस्थ संविदा चिकित्सकों को नियमित किया जाए। पीएससी परीक्षा में नीट प्रीपीजी परीक्षा की भांति उनकी सेवा बर्षो के अनुरूप अतिरिक्त अंक प्रदान कर चयन में प्राथमिकता प्रदान की जावे। स्वास्थ्य विभाग में तकनीकि तथा राज्य के पदों पर चिकित्सकों को पदस्थ किया जावे। डब्लूएचओ मापदंडों के अनुसार जिल में जन संख्या के अनुरूप चिकित्सा संस्थान में भर्ती पंलगों की संख्या बडाई जाए और मानव संसाधन की नियुक्ति की जावे।
आज ज्ञापन सौंपने वाले चिकित्सकों में डाॅ एनएस चैहान, डाॅ संजय ऋषीश्वर, डाॅ पंकज गुप्ता, डाॅ गिरीश चतुर्वेदी, डाॅ अभिषेक गोयल, डाॅ आलोक श्रीवास्तव, डाॅ दिनेश अग्रवाल, डाॅ सकेत सक्सैना, डाॅ रविन्द्र सिह, डाॅ सीएस गुप्ता, डाॅ दिनेश राजपूत, डाॅ एसके पिप्पल, डाॅ आरआर वर्मा, डाॅ आरपी चैहान, डाॅ वैभव , डाॅ नीरजा शर्मा, डाॅ मोना गुप्ता, डाॅ प्रणिता जैन, डाॅ अनमोल, डाॅ गोविंद रावत, डाॅ गरिमा सिंह, दीपक शाक्य, डाॅ राम सुदर, डाॅ द्वारिका वर्मा, डाॅ नवल अग्रवाल, डाॅ संजीव राठौर , डाॅ पवन राठौर, डाॅ अदिति जैन, डाॅ संतोष पाठक, डाॅ शैलेन्द्र, डाॅ ब्रजेश मंगल, डाॅ विनोद गोलिया, डाॅ देवेन्द्र कौशिक , डाॅ सुनील गौतम आदि प्रमुख थे।

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