हर साल महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल महाशिवरात्रि शनिवार 18 फरवरी 2023 को है। महाशिवरात्रि पर तीन विशेष संयोग भी बन रहे हैं, जिसमें पूजा-व्रत करना अत्यंत फलदायी रहेगा। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है और कहते हैं कि इस दिन व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जो व्यक्ति व्रत रखकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा- अर्चना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि यदि आप आर्थिक समस्याओं से घिरे हुए है, तो भगवान शिव की उपासना और कुछ ज्योतिष उपाय से आर्थिक समस्याओं से निजात पा सकते है। धन की प्राप्ति के लिए भगवान भोलेनाथ का अभिषेक गन्ने के रस से करना चाहिए। इससे धन की प्राप्ति होती है। इसके अलावा शहद और घी से भी अभिषेक करना चाहिए। जिससे धन की प्राप्ति होती है। अगर आपको मनोवांछित फल प्राप्त करना है, तो ऐसे में आप भगवान शिव को पसंद की चीज़ें चढ़ाए। यदि आपका धन कही रुका हुआ है, तो ऐसे में भगवान शिव के वाहन नंदी को हरा चारा खिलाएं। इससे आपको आपका अटका हुआ धन वापस मिल जाएगा। ऐसा भी माना जाता है कि महाशिवरात्रि की शाम में 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलता है।
महाशिवरात्रि तिथि
पंचांग के मुताबिक महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि की का आरंभ 18 फरवरी 2023 को रात 08 बजकर 03 मिनट पर होगी और इसका अंत 19 फरवरी 2023 को शाम 04 बजकर 19 मिनट पर होगा। वहीं महाशिवरात्रि की पूजा निशिता काल में की जाती है। इसलिए महाशिवरात्रि 18 फरवरी को मनाई जाएगी।
महाशिवरात्रि 2023 शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि की पूजा रात्रि के चार प्रहर में की जाती है।इस दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त प्रथम प्रहर में है जो कि शाम को 6 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा और रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। बता दें कि व्रत का पारण 19 जनवरी को किया जाएगा और पारण का समय सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
कहते हैं कि इस दिन विधि-विधान के साथ पूजन करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही लोग सुयोग्य पति या पत्नी की कामना से भी महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं। कहते हैं कि यदि सुहागिन महिलाएं महाशिवरात्रि का व्रत करती हैं तो उन्हें अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।
महाशिवरात्रि पर 3 ग्रहों का विशेष संयोग
इस दिन सर्वार्थसिद्धि, व्यातिपात और वरियान योग बन रहा है। वहीं कई साल बाद गुरु-शनि ग्रह खुद की राशि में रहेंगे और शुक्र उच्च राशि में रहेगा। करीब 24 साल बाद शनि प्रदोष व्रत का भी संयोग बनेगा।
बड़े शिवालयों में चार प्रहर की पूजा होगी
चार पहर की पूजा के बाद महादेवजी को दूल्हे के रूप में सजाया जाएगा। महाकाल की नगरी उज्जैन और काशी सहित अन्य नगरों के विद्वान छोटी काशी के पंडितों के साथ भगवान भोलेनाथ के विशेष अनुष्ठान संपन्न करेंगे। शिवजी का अभिषेक के लिए रामेश्वरम्, हरिद्वार, ऋषिकेश सहित अन्य तीर्थों का जल मंगवाया गया है।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें