
नए प्रयोग से शिक्षण व्यवस्था को चौपट करके बच्चो के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है: सुशील
शिवपुरी। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के जिला संगठन मंत्री सुशील अग्रवाल ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा विभाग के आला अधिकारी पूरी तरह मतान्ध होकर कार्य कर रहे हैं जबकि शिक्षण सत्र की परीक्षाएँ सिर पर आ रही है लेकिन बच्चों के साथ परीक्षा तैयारी के नाम प्रतिवर्ष नवाचार किया जाने लगा है। जैसे पिछला वर्ष प्रश्न बैंक के नाम रहा और इस वर्ष विभाग कोई भी परीक्षा समय पर कराने में असफल रहा बल्कि अर्द्धवार्षिक परीक्षा के समय मान्यता से प्राप्त बड़ी राशि को ठिकाने लगाने के नाम पर अनुगूंज कराना जरूरी समझा किन्तु परीक्षा नहीं। भले ही अनुगूंज के परिणामस्वरूप प्री-बोर्ड परीक्षा कराने का समय ही नहीं रहा किन्तु शिक्षक एवं छात्रों को प्रत्येक विषय के चार चार सेट का अभ्यास कराने में व्यस्त कर दिया जबकि इन दिनों में बच्चे अपनी शेष तैयारी में लगे होते तथा पूरे विषय का रिवीजन कार्य कर अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने का कार्य करते किन्तु लोक शिक्षण द्वारा प्रत्येक विषय में अभ्यास के नाम पर चार चार सेट के लिए जारी पूरे दिन का उबाऊ कार्यक्रम द्वारा बच्चों को तैयारी का समय ही बर्वाद किया जा रहा था। वर्षभर पढ़ाने हेतु किस प्रकार और क्या क्या एवं कब कब पढ़ाया जाये यह सब कुछ प्रदेश स्तर से तय किया जाता है किन्तु संस्था में प्राचार्य एवं विषय शिक्षक को कठपुतली की भूमिका में लाकर रख दिया गया और फिर अन्त में खराब परीक्षा परिणाम का ठीकरा संस्था प्राचार्य के सिर फोड़ दिया जाता है या फिर अधिक से अधिक विषय शिक्षक को भी जिम्मेदार ठहरा दिया जाये किन्तु वर्षभर की नीति निर्माण करने वालों से कोई सवाल जवाव कभी नहीं किया जायेगा कि उन्होने वर्षभर आखिर किस प्रकार की नीति अपनाकर क्या हासिल किया । वर्ष भर स्थानान्तरण के कार्य जारी रहे बल्कि आज भी जब स्वयं के बनाये शिक्षक प्रशिक्षण एवं कार्य अभ्यास कार्य के दौरान अचानक युक्तियुक्तिकरण का हौआ खड़ा किया गया जिसके कारण पूरी शिक्षण व्यवस्था चरमरा गई और शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब , शोषित ,वंचित तथा हरिजन एवं आदिवासी बच्चों का भविष्य चौपट करने का जैसे ठेका ही विभाग के आला अधिकारियों को मिल गया हो।

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