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धमाका साहित्य कॉर्नर: ढाई आखर को समझे नहीं आज तक व्यर्थ भाषा के झगड़ों में क्यों पड़ रहे

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2023

/ by Vipin Shukla Mama
भूल इतिहास की फिर न, दुहराइये
प्रेम के ग्रंथ का व्याकरण सीखिए। 
भारती ने सभी को दिया नेह था
राम के नाम सा आचरण सीखिए।

ढाई आखर को समझे नहीं आज तक
व्यर्थ भाषा के झगड़ों में क्यों पड़ रहे। 
जान पाये नहीं अर्थ, संदर्भ बिन
सीख सीखें नहीं, दंभ को गढ़ रहे। 
किसने किससे कहा और कब ये कहा
भाव रस पूर्ण स्वर स्मरण सीखिए। 

राम संबोधन है, द्रवित आह भी
राम अंतिम समय का ही आधार है। 
राम चरणों में झुकने का पर्याय है
राम बंधु सखा प्रेम संसार है। 
संग साथी रहे गुह केवट सभी 
भील के बेर का भी वरण सीखिए। 

शब्द के अर्थ में ही है अभिव्यंजना
शब्द शक्ति ही सामर्थ्य उसकी रही। 
उर समाये रहे नेह सरवर जहां
भाई को भाई से जोड़े रस्सी रही। 
बढ चलें हम प्रगति पंथ पर नित्य ही
लक्ष्य भेदी कदम के चरण सीखिए। 

डॉ मुकेश अनुरागी शिवपुरी







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