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धमाका न्याय: बालाजी टाइल्स मोरबी गुजरात ने अग्रिम राशि प्राप्त की, नहीं भेजा शिव मार्बल शिवपुरी को पूरा माल, अब कोर्ट ने किया आदेशित, हर्जे खर्चे के साथ लोटाइए राशि

सोमवार, 10 अप्रैल 2023

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। गुजरात की एक फर्म द्वारा अग्रिम भुगतान प्राप्त करने के उपरांत भी जब शिवपुरी स्थित टाइल्स के दुकानदार को पूर्ण लागत की राशि का माल विक्रय नहीं किया गया तब क्रेता दुकानदार द्वारा शेष राशि का माल या राशि प्राप्ति हेतु वार्तालाप एवं विधिक सूचना पत्र कि कार्यवाही की गई, परंतु कोई भी समाधान नहीं मिलने पर, क्रेता दुकानदार द्वारा शेष राशि को प्राप्त करने हेतु शिवपुरी व्यवहार न्यायालय में दीवानी प्रकरण दाखिल किया गया। जिसके निर्णय में माननीय श्रीमाती श्वेता मिश्रा जी, व्यवहार न्यायाधीश महोदय द्वारा दावा स्वीकार किया गया। 
क्या है पूरा मामला:
प्रकरण में वादी की पैरवी करने वाले अधिवक्ता अंचित जैन ने बताया की वादी दिलीप गोयल संचालक शिव मार्बल शिवपुरी द्वारा रू. 1,48,000 की राशि का अग्रिम भुगतान, विक्रेता बालाजी टाइल्स मोरबी गुजरात को इस नियत से किया था की वह इस राशि की लागत की टाइल्स का माल वादी को भेजेगा। दोनों पक्ष टाइल्स का व्यापार करते है। परंतु विक्रेता द्वारा मात्र रू. 89680 की लागत का माल ही वादी को भेजा गया। शेष रू. 58320 की राशि का माल, या भुगतान वापस ना करने पर, जब वादी ने मामला न्यायालय के समक्ष दाखिल किया तब, न्यायालय ने वादी एवं उसके व्यावसायिक साथी की गवाही, एवं भुगतान का बैंक ब्यौरा, विक्रेता द्वारा जारी बिल, ई-वे बिल की प्रतियों के सबूतों के आधार पर मौखिक अनुबंध होने की संभावना, एवं अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन होना पाया। जिस कारण मानननीय न्यायालय द्वारा वादी के दावे में वर्णित प्रार्थना के अनुसार रू 58320 की राशि, वादी द्वारा चुकाया न्याय शुल्क, शेष राशि पर प्रकरण दिनांक से भुगतान दिनांक तक का ब्याज, एवं अभिभाषक शुल्क, वादी के पक्ष में अदा करने का आदेश, विक्रेता को किया है। 
विधिक सलाह: क्या करें या ना करें!
अधिवक्ता अंचित जैन की पाठकों को निम्न सलाह है:
 1. अगर मुमकिन हो तो दुकानदारों को मौखिक करार की बजाय अधिवक्ता के माध्यम से, लिखित अनुबंध के आधार पर व्यापारिक करार करना चाहिये। क़ानून भी लिखित करार की ही सलाह देता है; 2. आज के जमाने में व्यावसायिक विवादों के निपटारे हेतु, पक्षों को अब आर्बिट्रेशन शैली की तरफ़ बढ़ना चाहिए, जो लिटिगेशन से तेज एवं बेहतर साबित हो रही है। सरकार एवं न्याय व्यवस्था भी इसका समर्थन करते है, जिस कारण आर्बिट्रेशन अधिनियम भी सिर्फ़ इसीलिये स्थापित किया गया है, जिसको पुरज़ोर एवं समकालीन रखने हेतु नियमित संशोधन भी किए जाते रहे है।













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