मुरैना। मुरैना जिले में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे मासाब बने बैठे शिक्षकों की गूंज प्रदेश भर में सुनाई दे रही हैं। सिर्फ मुरैना ही नहीं बल्कि शिवपुरी में भी प्रमाण पत्र परीक्षण में रोचक खुलासे हो रहे हैं। बीते रोज शिवपुरी के एक दिव्यांग शिक्षक डॉक्टरी परीक्षण में मजाक के पात्र बने। उन्होंने डॉक्टर को आधा हाथ कुछ ऊंचाई तक उठाकर दिखाया बोले इसके ऊपर उठता ही नहीं। जब डॉक्टर ने कहा दिव्यांग से पहले कितना उठ जाता था तो मासाब भूल गए और पूरा हाथ ऊपर उठाकर बोले, इतना। खेर अभी जांच का दौर चल ही रहा हैं लेकिन इसी जांच में मुरैना शिक्षा विभाग की एक चूक से दिव्यांग महिला शिक्षक मनोरमा को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पात्रता फर्जी पाए जाने की बात पर उनके विरुद्ध केस दर्ज तक हो गया सेवा समाप्त हुई सो अलग, रही सामाजिक मानहानि सो अलग हुई। इसके बाद शिक्षिका मनोरमा शर्मा ने कलेक्टर को आवेदन देकर खुद के दिव्यांग प्रमात्र पत्र को सौ फीसद सही बताया।
कलेक्टर अंकित अस्थाना ने उक्त प्रमाण पत्र की पुनः जांच के आदेश सिविल सर्जन को दिए। जांच के बाद सभी तब इसी मामले में संन्न तब रह गए जब सिविल सर्जन कार्यालय मुरैना का एक पत्र 20 जून को सामने आया। जांच रिपोर्ट में लिखा था की मनारेमा शर्मा के दिव्यांग प्रमाण पत्र असली हैं और अस्पताल की विकलांग पंजी में मनोरमा शर्मा का नाम 840वें नंबर पर दर्ज है। इस मामले को लेकर एके पाठक डीईओ मुरैना ने कहा कि यह बात सही है कि मनोरमा शर्मा का दिव्यांग प्रमाण पत्र पहले फर्जी बताया, जिस कारण उन पर एफआइआर हुई। दोबारा हुई जांच में मनोरमा शर्मा का दिव्यांग प्रमाण पत्र सही पाया गया है। यह पूरी गफलत स्वास्थ्य विभाग की जांच के कारण हुई है। उन पर हुई एफआइआर को निरस्त करने टीआई को पत्र लिखा है।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें