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धमाका बड़ी खबर: नेशनल हाईवे- 39 रीवा-सीधी के बीच बनी वर्ल्ड क्लास मोहनिया टनल में पानी भरा

शुक्रवार, 1 सितंबर 2023

/ by Vipin Shukla Mama
रीवा। नेशनल हाईवे- 39 रीवा-सीधी के बीच बनी वर्ल्ड क्लास मोहनिया टनल में बीती रात नहर फूटने से टनल सहित सड़क पर पानी भर गया जिससे दो घंटे ट्रैफिक थमा रहा। टनल के ऊपर बह रही बाणसागर नहर का पानी टनल और आसपास के इलाकों में भर गया। रात में ही नहर में सप्लाई बंद करनी पड़ी। शुक्रवार सुबह पानी निकल जाने के बाद टनल को फिर से चालू किया गया। इस टनल का उद्घाटन करीब 9 महीने पहले 10 दिसंबर 2022 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। नेशनल हाईवे-39 पर वर्ल्ड क्लास मोहनिया टनल का निर्माण राष्ट्रीय सड़क विकास प्राधिकरण (NHAI) ने 1004 करोड़ रुपए की लागत से कराया है और निर्माण कार्य 18 दिसंबर 2018 को शुरू होकर तय समयसीमा मार्च 2023 से 6 महीने पहले ही पूरा कर लिया गया फिर नितिन गडकरी ने इसका उद्घाटन किया था। बीती रात टनल में पानी घुसने को लेकर गुढ़ थाना सब इंस्पेक्टर प्रवीण उपाध्याय ने बताया कि बुधवार रात करीब 11.30 बजे बाणसागर की मुख्य नहर फूटने से टनल में पानी भरने की सूचना चुरहट बॉर्डर से मिली थी। मोहनिया टनल में पानी भरने की जानकारी मिलते ही चुरहट विधायक शरदेंदु तिवारी, सीधी कलेक्टर और एसपी भी मौके पर पहुंचे। टनल से आवागमन बंद कराया। अफसरों ने शहडोल जिले के देवलौंद स्थित बाणसागर बांध के अधिकारियों से रात 12 बजे बात की। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और बाणसागर के अधिकारियों ने तय किया कि नहर का पानी डायवर्ट हो जाए तो टनल को खतरा टल जाएगा। इसके बाद जेसीबी की मदद से हाईवे के नीचे से जाने वाले कैनाल में पानी डायवर्ट किया गया। अफसरों ने बताया कि डायवर्जन के बाद पानी करीब 4-5 घंटे तक बहता रहा। पानी पूरी तरह से खाली होने में सुबह हो गई। इसके बाद भी पानी रुक-रुककर कैनाल के रास्ते नदी में जाता रहा। नहर फूटने की जानकारी मिलते ही टनल के मुख्य द्वार पर अफसरों और नेताओं की भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया 'अचानक से बाणसागर नहर का पानी जब टनल में आया तो ऐसा लगा जैसे बाढ़ आ गई हो। वर्ल्ड क्लास टनल के ऊपर बनी नहर के फूटने से बाणसागर विभाग के जिम्मेदारों के दावों की पोल खुल रही है।' 
MP की सबसे लंबी सुरंग इंजीनियरिंग का बेजोड़
नमूना
रीवा-सीधी के बीच बनी प्रदेश की सबसे लंबी मोहनिया टनल इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना बताया गया है। इस टनल का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का दावा है कि यह देश की पहली ऐसी टनल है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों का उपयोग किया गया है। साथ ही, 10 ऐसी तकनीकें हैं, जो इसे खास बनाती हैं। 15.50 किलोमीटर के प्रोजेक्ट में सिविल इंजीनियरिंग के 10 प्रयोग किए गए हैं। एक्वाडक्ट, अंडर पास, ओवर पास, आरओबी, माइनर ब्रिज, मेजर ब्रिज, बॉक्स कल्वर्ट, होम पाइप कल्वर्ट, रिजिट पेमेंट, फिलिजीबल पेवेमेंट आदि आधुनिक तरीके से बनाया गया है। 120 दिन में टनल एक्वाडक्ट 109 दिन में तैयार किया गया है। मतलब, हर जगह एनएचएआई ने समय से पहले कार्य पूरा कर केन्द्र व राज्य सरकार को बोलने का मौका नहीं दिया। फिलहाल इस तरह टनल दुनिया में कहीं नहीं है।
टनल झांसी (उत्तर प्रदेश) को रांची (झारखंड) से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 39 पर बनी
टनल झांसी (उत्तर प्रदेश) को रांची (झारखंड) से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 39 पर बनी है। 1,456 दिन में बनी सुरंग के साथ 15.5 किलोमीटर के प्रोजेक्ट में सिविल इंजीनियरिंग के सभी प्रयोग सफल रहे हैं। भारत की यह ऐसी सुरंग है, जिसमें सबसे नीचे टनल, फिर बाणसागर की नहर और सबसे ऊपर पुराना सड़क मार्ग है। मोहनिया टनल का काम 14 दिसंबर 2018 से शुरू हुआ। 15 किलोमीटर के पहाड़ को अत्याधुनिक मशीनों से काटकर 2,280 मीटर की सुरंग 1,456 दिन में बनाई गई। हालांकि टनल का कार्य सितंबर 2022 में ही पूर्ण कर लिया गया है। इसके बाद आकर्षक साज सज्जा का कार्य किया जा रहा था। ये ऑप्टिकल फाइबर युक्त 2,280 मीटर की टनल है। जिसमें प्रत्येक 300 मीटर के बाद एक टनल से दूसरे टनल में जाने के लिए रास्ता है। देश में पहली बार कोई प्रोजेक्ट तय समय से 6 महीने पहले पूरा हुआ है। 15.5 किलोमीटर के प्रोजेक्ट में सिविल इंजीनियरिंग के सभी टेक्नीक यूज में लाई गई हैं। यह देश का पहली ऐसी सुरंग है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया गया है। सुरंग के अंदर सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यह टनल 100 वर्ष के लिए सोचकर बनाई गई है। दोनों टनलें 24 घंटे चालू रहेंगी।
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा
15.5 किलोमीटर के प्रोजेक्ट में सिविल इंजीनियरिंग की सभी टेक्नीक उपयोग की गई हैं। यह देश की इकलौती सुरंग है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया गया है। 
सुमेश बाझ प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई
सिविल इंजीनियरिंग
1. एक्वाडक्ट: टनल में नीचे टनल, उसके ऊपर बनारस जाने वाली नहर व उसके ऊपर वाहन जाने के लिए रोड है। जो अपने आप में अद्भुत संरचना है।
2 अंडर पास ऐसी संरचना, जहां ऊपर से रोड और नीचे से आवागमन की सुविधा हो।
3 ओवर पास: जहां हाईवे नीचे से निकल जाए। क्रॉस करने वाला ऊपर से निकल जाए। उसे ओवर पास कहते हैं। यह गोविंदगढ़ चुरहट रोड पर बना है।
 4. आरओबी : आरओबी मतलब रेलवे ओवर ब्रिज । यह चुरहट के पास बड़खेरा 746 पर बना है। नीचे से ट्रेन और ऊपर से हाईवे है।
5. माइनर ब्रिज ऐसा पुल, जिसकी लंबाई 60 मीटर से कम हो। वह माइनर ब्रिज कहलाता है। इस तरह के ब्रिज बने हैं।
6 मेजर ब्रिजः जिसकी लंबाई 60 मीटर से ज्यादा हो, उसे मेजर ब्रिज कहते हैं। यह चुरहट रोड पर बनाया गया है।
7. बॉक्स कल्वर्ट : ऐसा स्थान, जहां इंग्लिश के ० के आकार की संरचना होती है। यह वाहनों के सुगमता से आवागमन के लिए बनाया जाता है।
8 हूम पाइप कल्वर्ट: ऐसी संरचना, जिसे सीमेंट का पाइप डालकर बनाया गया हो। इससे पानी को एक ओर से दूसरी ओर ले जाया जाता है। टनल में इस तरह 20 जगह हूप पाइप कल्वर्ड बनाया गया है।
9. रिजिट पेवमेंट : ऐसा स्थान, जहां सीमेंट कांक्रीट की रोड बनाई, मतलब, कांक्रीट की सड़क को, रिजिट पेवमेंट कहते है।
10. फिलिजिबल पेवेमेंट: ऐसी सड़क, जो डामर से बनाई जाती है।
NHAI करेगा निगरानी
प्रोजेक्ट डायरेक्टर का कहना है कि सुरंग की निगरानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण करेगा। सीधी और रीवा में छोर में दो कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। वहीं, सुरंग के अंदर फायर फाइटिंग सिस्टम, सर्विलांस कैमरा, एलएचडीएस के माध्यम से टनल के अंदर की गैस को बाहर निकालने का सिस्टम लगाया गया है। अंदर की गैस बाहर करने के लिए 46 एग्जॉस्ट फैन लगाए गए हैं। वहीं, 50 मीटर में हाई मास्क लाइट्स आवश्यकतानुसार एक सैकड़ा कैमरा व एक सैकड़ा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम लगे हैं।
सुरंग की शुरुआत में देश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट
सुरंग की शुरुआत में देश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट भी है। सीधी के छोर पर जहां सुरंग समाप्त होती है, वहां ऊपर से बाणसागर बांध की नहर गुजर रही है। इस नहर से उत्तर प्रदेश राज्य को पानी दिया जाता है। काफी मशक्कत के बाद नहर को बंद कर चार महीने में एक्वाडक्ट का निर्माण किया गया। सुरंग के ऊपर से भी एक अन्य नहर और सड़क गुजर रही है।
6 लेन टनल की लंबाई 2,280 मीटर है। तीन न आने के लिए और तीन लेन जाने के लिए हैं। सुरंग को आपस में जोड़ने के लिए अंदर 7 जगह अंडर पास दिए गए हैं। अगर कोई वाहन चालक विपरीत परिस्थितियों में बीच से वापस लौटना चाहे, तो आसानी से लौट सकता है। सेफ्टी के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे, फायर सिस्टम, कंट्रोल रूम और अनाउंसमेंट सिस्टम लगाया गया है।














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