शिवपुरी। सब्र टूटने और गुस्सा फूटने की वजह से ग्वालियर संभाग में आत्महत्या करने वालों की सूची लंबी होती चली जा रही है। पिछले 7 साल की बात करें तो परिस्थितियों से हारकर सैकडो लोग मौत को गले लगा चुके हैं। इस लिहाज से हर साल सैकडो लोग अपनी जीवनलीला खत्म कर रहे हैं। ये हम नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के आंकड़े बयां कर रहे हैं। एवम हम जो मीडिया में पढ़ते है वो बात कर रहे है ये कहना था हैप्पीनेस प्रोग्राम की सामाजिक महिला कार्यकर्ता श्रीमति बबीता कुर्मी का जो की शक्ति शाली महिला संगठन शिवपुरी द्वारा एकीकृत एकीकृत शासकीय माध्यमिक विद्यालय मुड़ेरी स्कूल में बाल सभा के अंतर्गत हैप्पीनेस प्रोग्राम जो की विश्व आत्महत्या निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर एक आयोजित किया गया जिसमे सैकड़ा बच्चो को जीवन में कभी भी हार नही मानना एवम जो लोग तनाव में है चुप चाप अंदर ही अंदर घुट रहे है कि उनसे आपसे भाईचारा एवम मानवता के नाते बात केसे करे इस बार जागरूक किया जिससे की आए दिन होने वाली आत्म हत्याओं पर काबू पाया जा सके राहुल ओझा ने अधिक जानकारी देते हुए कहा कि विश्व आत्महत्या निषेध दिवस पर मुड़ेरी में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में ऐसे अनेक खेल एवम बातों के बारे में बच्चो को बताया जिसको अपनाकर बच्चे तनाव को दूर कर सकते है एवम अपने को व्यस्त रख सकते है विश्व आत्महत्या निषेध दिवस के अवसर पर ग्वालियर मानसिक चिकित्सालय के मनोरोग चिकित्सा विभाग के डॉक्टर अर्पित बंसल जो की इस मुद्दे को लेकर संस्था के साथ काफी समय से जुड़कर काम कर रहे है उन्होंने कहा की बदलती लाइफस्टाइल के कारण भी लोग तनाव का शिकार होकर अवसाद में जा रहे हैं। इससे आत्महत्या जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। बचाव के लिए व्यायाम, योग, मेडिटेशन के साथ ही संतुलित जीवन शैली को अपनाना जरूरी है। बच्चो के माध्यम से लोगों को आत्महत्या से बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया। उन्होंने ऑनलाइन जुड़कर कहा की किसी भी प्रकार की परिस्थिति हो आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाना चाहिए। विचारों में सकारात्मकता रखें और तनाव से मुक्ति पाने के लिए योग व प्राणायाम करें। गुस्से पर अगर काबू रखा जाए तो भी आत्महत्या के मामलों में कमी आ सकती है सुपोषण सखी नर्मदा ने कहा की पहले जब में घर पर रहती थी कोई काम में मन नहीं लगता था एवम तानव में चली गईं थी लेकिन जब से शक्ति शाली महिला संगठन से जुड़ी तो मुझे हैप्पीनेस प्रोग्राम में शामिल हुई वहा मेने सीखा कि युवाओं में तनाव का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। वह अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया के कारण अपनों से दूर हो गए हैं। ऐसी स्थिति में परिवार को साथ देना होगा। युवाओं के साथ घर के सदस्यों को संपर्क बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। उनके साथ खाली समय बिताने का प्रयास होना चाहिए। जिससे वह अपने तनाव व मन की बातों को साझा कर सके। जैसे मेने करके दिखाया उन्होंने एक सैकड़ा बच्चो एवम शिक्षको से अनुरोध किया की जब भी आप किसी भी बच्चे को को व्यक्ति को तनाव पाए या गुमसुम अकेला पाए तो उससे एक बार अवश्य बात करने की कोशिश करे क्या पता इस बहाने आप किसी एक व्यक्ति को आत्म हत्या करने से रोक पाए या यू कहे की किसी व्यक्ति का जीवन बदल पाए तो एक बार करके देखे आपको बहुत सुकून मिलेगा जैसे की मुझे मिल रहा आज में तनाव मुक्त हूं हमेशा खुश रहती हूं। प्रोग्राम में बबिता द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर एक सैकड़ा बच्चो को संकल्प कराया की हम अपने आसपास के प्रिय जन, मित्र जन एवं स्वजनों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखेंगे और उनको अवसाद से बाहर लाने में मदद करेंगे। प्रोग्राम में शक्ति शाली महिला संगठन की पूरी टीम, स्कूल मुड़ेरी के सभी शिक्षकगण के साथ एक सेकड़ा से अभी अधिक बच्चो ने प्रोग्राम में भाग लिया।

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