* सी.एस.एम.वी.एस. अंतर राष्ट्रीय प्रदर्शनी में मिस्र, ग्रीस, रोम जैसे देशों की मूर्तिकला कला होंगी प्रदर्शित
विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के सुनारी गांव में केवटन नदी से करीब एक दशक पूर्व निकाली गई भगवान विष्णु के वराह अवतार की अद्भुत प्रतिमा को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (सी. एस. एम.वी.एस.) में आयोजित होने वाली अंतर राष्ट्रीय प्रदर्शनी में शामिल किया गया है। मिस्र, ग्रीस, रोम जैसे देशों की प्राचीन मूर्तियों के साथ प्रदेश की वराह प्रतिमा को प्रदर्शित किया जाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी 1 दिसंबर से आयोजित होगी। जहां दुनिया के सभी क्षेत्रों प्रतिष्ठित पुरातात्विक मूर्तियां प्रदर्शित की जाएंगी। छत्रपति शिवाजी महाराज वस्तु संग्रहालय में ब्रिटिश संग्रहालय से 6, जर्मनी संग्रहाललय से पांच प्रतिमा, अमेरिका गेट्टी संग्रहालय से दो प्रतिमा, मुंबई संग्रहालय से तीन प्रतिमा, दिल्ली संग्रहालय से एक प्रतिमा एवं विदिशा संग्रहालय से एक प्रतिमा का चयन किया गया है। वराह प्रतिमा देशभर में द्वितीय स्थान पर चयनित किया गया है। यह प्रतिमा लाल बलुआ पत्थर से तैयार की गई है, जिसमें कई देवी-देवताओं और ऋषियों की नक्काशी के साथ बनाया गया है।भगवान विष्णु के तीसरे अवतार आदिवराह को पशु रूप में दिखाया गया है। आदिवराह पृथ्वी को अपने दाहिने दाँत पर उठाए हुए है। इस मूर्ति की पीठ और किनारों पर सूर्य, चंद्रमा, नवग्रह, ऋषि और अन्य देवी-देवताओं की लघु छवियां उकेरी गई हैं। मूर्तिकला में अद्वितीय चित्रण और आकर्षक मुद्रा है, जिसकी स्थिति काफी अच्छी है।
भागवत पुराण और महाभारत जैसी प्राचीन पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने वराह के रूप में अवतार लिया और जलमग्न पृथ्वी देवी को बचाया था। प्रतिमा विज्ञान अध्ययन में मूर्तिकला का बहुत उच्च कलात्मक मूल्य है। यह आदि वराह के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक है।
पुरातत्व संचालनालय का मुख्य कार्य राज्य भर में फैली सांस्कृतिक विरासत का गांव-गांव सर्वेक्षण, उत्खनन, संग्रह प्रदर्शन, संकलन, प्रकाशन और संरक्षण करना है।

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