वाराणसी। ASI ने ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी हैं। जिसे लेकर मुस्लिम पक्ष ने कहा, रिपोर्ट सार्वजनिक न करें। रिपोर्ट के साथ मूर्तियां, घड़े जैसे करीब 250 अवशेष भी जमा कराए गए हैं।
जानकारी के अनुसार ज्ञानवापी मामले में ASI के एडिशनल डायरेक्टर ने वाराणसी के जिला जज को सील बंद रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट 1000 से ज्यादा पेज की बताई जा रही है। ASI को ज्ञानवापी के सर्वे के दौरान खंडित मूर्तियां, घड़ा, चिह्न जैसे 250 अवशेष भी मिले थे इन्हें डीएम की निगरानी में लॉकर में जमा कराया गया था। इनको भी कोर्ट में पेश किया गया।
साथ ही कोर्ट को 2 पेन ड्राइव, 2 हार्ड डिस्क, 1000 पेज से अधिक की पीपीटी रिपोर्ट भी दिए जाने की बात सामने आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि GPR रिपोर्ट अमेरिका में तैयार की गई है। हैदराबाद की GPR टीम ने ज्ञानवापी में सर्वे किया था।
सर्वे रिपोर्ट पेश होने से पहले मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया ने कोर्ट में एप्लिकेशन दी। इसमें मांग की कि सर्वे की रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश हो और बिना हलफनामे के किसी को भी सार्वजनिक करने की इजाजत न दी जाए। वहीं, हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि 21 दिसंबर को अगली सुनवाई है। जैन ने कहा कि मैंने कोर्ट में एप्लिकेशन दी है कि रिपोर्ट की कॉपी हमें दी जाए। उन्होंने ASI के सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने पर भी आपत्ति जताई। कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सील बंद रिपोर्ट जमा करने से मना किया था।
इससे पहले, रिपोर्ट पेश करने के लिए सुरक्षा के बीच 5 सदस्यीय ASI टीम जिला कोर्ट पहुंची। ASI सुपरिंटेंडेंट अविनाश मोहंती और भारत सरकार के वकील अमित श्रीवास्तव ने रिपोर्ट पेश की। ASI की टीम सर्वे रिपोर्ट पेश करने के लिए 5 बार एक्सटेंशन ले चुकी थी। आज वादी-प्रतिवादी और दोनों पक्षों के सभी वकील मौजूद रहे।
ज्ञानवापी के वजूखाने को छोड़कर सर्वे का था आदेश
ASI सर्वेक्षण की मांग को लेकर 16 मई को याचिका दायर की गई थी। इसे दायर करने वाली चार महिलाओं की अगुआई वकील विष्णु शंकर जैन ने की थी। हिंदू पक्ष के वकील जैन ने वहां हिंदू मंदिर के प्रतीक चिह्न मिलने का दावा किया था। इसके बाद वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट ने 21 जुलाई 2023 को ज्ञानवापी परिसर के सील वजूखाने को छोड़कर बाकी सभी हिस्से और तहखानों के सर्वे का आदेश दिया था।

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