शिवपुरी। नवजात बच्चों के विकास के लिए शुरुआती 1,000 दिन काफी अहम होते हैं। इसे देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े कई सर्वे संचालित किए जाते हैं, ताकि उनकी बेहतरी के लिए उचित उपाय किया जा सके। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)-5 के अनुसार, भारत में अनीमिया एवम कुपोषण की दर अधिक है। कुपोषण में वजन कम होना , उम्र के हिसाब से ऊंचाई नहीं बढना, ऊंचाई के अनुपात में वजन कम होना जैसे मामले 5 साल से कम उम्र के बच्चों में पाए जाते हैं। चिकित्सको का मानना है कि कुपोषण से बचाव के लिए दो बातें सबसे अहम हैं, पहला- बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग कराना और दूसरा- उन्हें समुचित और सही तरीके का पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना। शक्ति शाली महिला संगठन द्वारा आज पांच गांव बिनेगा, करई अहमदपुर, जमोनिया, तिघरा, टोंगरा एवम डोंगर में बच्चो में शुरु आत जीवन के 1000 दिन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जिसमे पोषण आहार सलाहकार एवम संस्था के संयोजक रवि गोयल ने बताया की बच्चों पर शुरुआती 1,000 दिनों के दौरान अधिक ध्यान देना होता है । इस जागरूकता में में दो बातों पर मूलत: ध्यान दिया गया- शुरुआती छह महीनों तक ब्रेस्टफीडिंग और फिर दो साल तक समुचित ब्रेस्टफीडिंग। छह माह के बाद ब्रेस्टफीडिंग ही सिर्फ पोषण की जरूरतों को पूरा नहीं करती है। इसके साथ बेहतर खान-पान की भी जरूरत होती है। साथ ही यह भी ध्यान रखने की आवश्यकता है कि खान-पान शुरू होने के बाद ब्रेस्टफीडिंग को न रोका जाए। ब्रेस्टफीडिंग को दो साल या इससे अधिक तक जारी रखा जाने के लिए बबिता कुर्मी द्वारा कहा गया। प्रसूति पूर्व मां की ट्रेनिंग जरूरी आई बाई सी एफ के नैशनल ट्रेनर रवि गोयल ने कहा कि भारत के आधे से अधिक बच्चे ब्रेस्टफीडिंग से वंचित रह जाते हैं। ब्रेस्टफीडिंग न कराने के पीछे कई कारण होते हैं, जैसे कि मां का प्रेग्नेंसी के बाद काम पर जल्दी जाने लगना, फीडिंग के लिए हेल्थ प्रोफेशनल की ट्रेनिंग न लेना, न्यूक्लियर फैमिली का होना, अस्पतालों की ट्रेनिंग उपलब्ध न होना। उन्होंने साथ ही कहा की हेल्थ प्रोफेशनल का प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए, जिससे वे बच्चे की मां को बेहतर ट्रेनिंग दे सकें। वह कहती हैं कि प्रेग्नेंसी से पूर्व चर्चा जरूरी है। उनके अनुसार, मां को अटैचमैंट, मां की पोजीशन, बच्चे की भूख पहचानना आदि का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिए कम्युनिटी और नियमों के स्तर पर सहयोग बेहद जरूरी है, क्योंकि एक स्वस्थ शिशु से ही बेहतर राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है। जागरूकता कार्यक्रम में समुदाय की एक सेकड़ा माताओं के साथ आगनवाड़ी कार्यकर्ता एवम शक्ति शाली महिला संगठन की पूरी टीम ने सक्रीय सहयोग किया।

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