बदरवास। विवेकानंदजी ने अपने विवेक से भारतीय संस्कृति,अध्यात्म के आनंद को फैलाने का काम किया इसलिए ही तो वे स्वामी विवेकानंद होकर सम्पूर्ण राष्ट्र के वंदनीय हैं। महान युगपुरुष स्वामी विवेकानंद ने कम उम्र में ही भारतीय संस्कृति, सभ्यता, योग वेदांत, ज्ञान, विचारों का विश्व पटल पर परचम फहराया और वे दुनिया के प्रेरणा स्रोत बन गए। यह बात बदरवास के शासकीय मिडिल स्कूल बक्सपुर में विद्यालय प्रभारी गोविन्द अवस्थी ने स्वामी विवेकानंद जयंती ‘युवा दिवस‘ पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
युवा दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर स्वामी विवेकानंद और भारतमाता के छायाचित्र पर पुष्पांजलि विद्यालय के शिक्षक गोविन्द अवस्थी, जितेंद्र शर्मा, शैलेंद्र धाकड़, गंगा यादव, सुनील ओझा सहित छात्र छात्राओं ने अर्पित की। इस अवसर पर आयोजित सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में सभी ने सहभागिता निभाई।
विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंदजी के जीवन चरित्र और महान व्यक्तित्व से अवगत कराते हुए गोविन्द अवस्थी ने कहा कि स्वामीजी भारतीय नवजागरण के प्रेरणास्रोत और अग्रदूत थे। उनके "उठो जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक नहीं रुको" इस जोशीले संदेश ने स्वामी विवेकानंद को हमेशा के लिए अमर कर दिया। स्वामीजी वो महान व्यक्तित्व थे जिनसे भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के युवा जीवन जीने की सीख लेते हैं।
अवस्थी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद आयु में कम किंतु ज्ञान में असीम थे।उनका महत्वपूर्ण विचार “बल ही जीवन है तथा कमजोरी ही मृत्यु” को आत्मसात करना चाहिए। विवेकानंदजी के आदर्शों ने ही भारत को विश्व पटल पर स्थापित करने का काम किया है।
शिक्षक शैलेंद्र धाकड़ ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत की अमूल्य निधि हैं इसलिए उनके आदर्श और बताए पथ पर हमें चलना चाहिए। उन्होंने भारतीय अध्यात्म और धर्म संस्कृति का प्रचार दुनियाभर में किया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को सूर्य नमस्कार, प्राचीन योग परंपरा,प्राणायाम के महत्व से परिचित कराते हुए बताया गया कि हमारे शारीरिक और मानसिक विकास में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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