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धमाका बड़ी खबर: आत्माराम पारदी हत्याकांड में गुना की तत्कालीन RTO मधु सिंह पर कई धाराओं में केस दर्ज, कई और भी शिकंजे में, फरार थानेदार पर इनाम बढ़ा, बस अग्निकांड की जांच में दबी फाइल खुली तो आई लपेटे में रसूखदार rto मधु सिंह

बुधवार, 3 जनवरी 2024

/ by Vipin Shukla Mama
गुना। आत्माराम पारदी हत्याकांड के मामले में तत्कालीन RTO मधु सिंह पर जालसाजी 420, 467, 471, 197, 198, 463, और 465 धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। मधु सिंह, वर्तमान में परिवहन उपायुक्त हैं, उन पर रिश्वतखोरी, अवैध रजिस्ट्रेशन और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में कई और भी चर्चित चेहरे शिकंजे में हैं, जबकि फरार थानेदार रामवीर पर इनाम बढ़ाकर तीस हजार दिया गया है। 
जानकारी के अनुसार गुना जिले में आठ साल पहले पुलिस द्वारा पारदी की हत्या के हाई प्रोफाइल मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। गुना की तत्कालीन आरटीओ मधु सिंह के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। मधु सिंह वर्तमान में परिवहन उपायुक्त हैं। उन पर हत्या के समय लाश को ठिकाने लगाने में प्रयोग की गई कार के फर्जी तौर पर किए गए रजिट्रेशन के मामले में विभिन्न धाराओं में आपराधिक केस दर्ज किया है। इस मामले में फरार चल रहे हत्या के आरोपी बर्खास्त थानेदार की गिरफ्तारी पर इनाम की राशि बढ़ाकर 30 हजार कर दी गई है। प्रदेश का बहुचर्चित यह पूरा मामला गुना जिले का है। यहां की धरनावदा पुलिस चौकी का प्रभारी सब इंस्पेक्टर पास के गांव से आत्माराम पारदी को पूछताछ के लिए पकड़कर लाया था। आरोप है कि पुलिस प्रताड़ना के चलते उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों द्वारा उसकी लाश को बहाने के लिए कार से एक नदी में ले जाया गया। पुलिस पहले आत्माराम को हिरासत में लेने से ही इनकार करती रही। बाद में परिजनों ने इस मामले में एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दर्ज की। उस की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी। सीआईडी ने प्रथमदृष्टया जांच के बाद इसे हत्या का केस माना। सीआईडी ने पाया कि रामवीर ने कुछ अन्य पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर लाश को कार से ले जाकर ठिकाने लगाया। इसमें रामवीर सहित बाकी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और लाश को ठिकाने लगाने जैसी संगीन धाराओं में आपराधिक केस दर्ज किया गया और ग्वालियर आईजी ने थानेदार को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। 
आठ साल से फरार चल रहा आरोपी थानेदार
इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस बहुचर्चित हत्याकांड में मुख्य आरोपी और बर्खास्त थानेदार को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पहले एसपी गुना ने दस हजार तो फिर एडीजी ग्वालियर ने 20 हजार का इनाम घोषित किया है। अब मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 30 हजार का इनाम घोषित किया हैं। 
बस अग्निकांड की जांच से बेनकाब तत्कालीन आरटीओ मधु पर भी केस दर्ज
2015 में हुए गुना के इस बहुचर्चित आत्माराम पारदी की हत्या से जुड़े एक मामले में सरकार ने बीती रात एक और बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी थानेदार ने जिस कार का आत्माराम पारदी की लाश को ठिकाने लगाने में प्रयोग किया, उसे आरटीओ विभाग के लोगों ने गलत तरीके से ट्रांसफर किया था। गुना बस हादसे के बाद जब वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर जांच-पड़ताल शुरू हुई तो वहां फाइलों में दबाकर रखा गया यह मामला भी सामने आ गया। इसके चलते वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गुना की तत्कालीन RTO मधु सिंह और आरटीओ के बाबू पर 420, 467, 471, 197, 198, 463, 465 के तहत केस दर्ज किया गया। यह कार्रवाई हत्या के मामले में फरार थानेदार की गाड़ी को फर्जी तौर पर ट्रांसफर करने के लिए किया गया है।
विवादों की रिश्तेदार हैं आरटीओ मधु
मधु सिंह वर्तमान में परिवहन उपायुक्त हैं। गुना के बाद, शिवपुरी, मुरैना में भी वह पदस्थ होकर विवादि रही हैं। उन पर रिश्वतखोरी और अवैध रजिस्ट्रेशन सहित गंभीर आरोप लगते रहे हैं, जिसकी CM तक शिकायतें भी पहुंचीं थी। उनकी रसूख की पहुंच पूर्व शिवराज सरकार में मंत्री गोविंद सिंह के दरबार में इतनी ऊंची रही की शिवपुरी में चार साल से ऊपर टिककर बेटिंग की। खूब आरोप प्रत्यारोप लगे, आरटीआई लगीं लेकिन वे विचलित हुए बिना सीट पर ड्राइविंग करती रही। 











 

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