21वीं सदी में तरक्की की राह पर खड़े ग्लोबल होते ग्वालियर के विकास में आज एक नया आयाम जुड़ने जा रहा है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर के नवीन एयरपोर्ट की सौगात जो मिल रही है। 450 करोड़ की लागत बने एयरपोर्ट का निर्माण 20 हजार 230 स्क्वायर मीटर में किया गया है। ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेड असेसमेंट (ग्रीहा) की फाइव स्टार रेटिंग वाले इस नये एयरपोर्ट का शुभारंभ अपने आप में नया कीर्तिमान रचने वाला होगा क्योंकि इसके साथ ही 38 साल बाद फिर इतिहास दोहराया जाएगा और सिंधिया परिवार की तीन पीढ़ियों के विकास का संकल्प नजर आएगा। जो माधवराव सिंधिया की जयंती को खास बनाएगा।
10 मार्च, यह तारीख ग्वालियर के लिए विशेष है। क्योंकि माधवराव सिंधिया की जयंती है और आज ही ग्वालियर को राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयर टर्मिनल की सौगात मिलने जा रही है। ऐसे में सिंधिया परिवार का स्मरण करना जरूरी होगा। क्योंकि सिंधिया, सियासत और सत्ता ये तीनों एक दूसरे के पूरक हैं। सिंधिया परिवार के लिए सत्ता सेवा का केंद्र है। यही कारण है कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया हां या माधवराव सिंधिया या फिर द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया... इन्होंने राजनीति के माध्यम से जनसेवा की अनुकरणीय छाप छोड़ी है और विकास के नये आयाम तय किए हैं।
जैसा कि सभी जानते हैं- शहर ही... तरक्की, नयापन और रचनात्मकता के केंद्र होते हैं। शहरीकरण की रफ्तार काफी तेज है और यह अर्थव्यवस्था की प्रगति की वाहक भी है। किसी भी शहर की तरक्की में परिवहन का खास महत्व होता है। सड़क, रेल और वायुमार्ग इनके एक साथ जुड़ने से शहर तेजी से दौड़ने लगता है। क्योंकि ये तीनों मार्ग परिवहन के प्रमुख साधन हैं। ग्वालियर तेजी से तरक्की की रफ्तार पकड़ रहा है और विकास के नये आयाम गढ़ रहा है।
शहर में बना वर्ल्ड क्लास का एयरपोर्ट इस तरक्की की इबारत का नया अध्याय है। जो केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की विकास की ललक का ही परिणाम है।
सिंधिया ने सितंबर 2021 में कलेक्ट्रेट में अधिकारियों के साथ विजन डॉक्यूमेंट पर चर्चा के दौरान अपनी भावना से अवगत कराते हुए कहा था कि “ग्वालियर का विकास मेरा सपना है“। साथ ही यह भी कहा था कि मेरे पिताजी माधवराव सिंधिया का भी यही सपना था कि “ग्वालियर में एक अत्याधुनिक एयरपोर्ट बने“, जिसे दुनिया देखे। क्योंकि मेरी दादी का नाम इससे जुड़ा है। इसलिए एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट बनाना मेरा दायित्व ही नहीं अपितु धार्मिक कर्तव्य भी है। यही कारण है कि आत्मनिर्भर एवं सांस्कृतिक थीम पर ग्वालियर का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। ग्लोबल ग्वालियर की सोच रखने वाले सिंधिया के ड्रीम प्रोजेक्ट एयरपोर्ट का सपना आज साकार हो रहा है।
450 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ यह एयरपोर्ट भव्य, शानदार और अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। जहां ए-320 जैसे विमान उतर सकेंगे और एक साथ 19 विमान खड़े हो सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह देश में सबसे कम समय में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट है। क्योंकि 8 सितंबर 2021 को आलू अनुसंधान केंद्र ने 110 एकड़ जमीन की एनओसी दी। 24 सितंबर 2021 को सिंधिया ने विजन डॉक्यूमेंट की समीक्षा के दौरान अपने मंसूबे जाहिर किए।
16 अक्टूबर 2022 में एयरपोर्ट का शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया। ...और अब रिकॉर्ड समय में इसका शुभारंभ हो रहा है।
ग्वालियर का नया एयरपोर्ट प्रदेश का श्रेष्ठ हवाई अड्डा होगा। पर्यावरण के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने वाले इस एयरपोर्ट पर ग्वालियर की संस्कृति, सभ्यता और इतिहास के दर्शन भी होंगे। पर्यटन, शिक्षा और व्यवसाय की दृष्टि से अंचल के लिए वरदान साबित होगा। हम सभी को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति कृतज्ञता जाहिर करनी चाहिए कि उनकी संकल्प शक्ति से एक बेहतरीन एयरपोर्ट शहर को मिला है।
अब बात करते हैं “राजमाता विजयाराजे सिंधिया की“- जिनके नाम पर यह एयरपोर्ट पर है। कर्मण्येवाधिकारस्ते माफलेषु कादचन- गीता के इस शाश्वत आर्ष वाक्य को जीवन में आत्मसात करने वाली ममतामयी माँ राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने जीवन पर्यन्त सिद्धांतों के संघर्ष में रहकर त्याग को स्वीकार कर समाज, देश व मानवीय मूल्यों के लिए अतुलनीय योगदान प्रदान किया। त्याग, तपस्या और परोपकार की साक्षात प्रतिमूर्ति कही जाने वाली राजमाता विजयाराजे सिंधिया के नाम पर जीवंत धरोहर ने मूर्तरूप लिया है।
समृद्ध राजघराने की मुखिया के रूप में उनके पास भव्य महल ओर हजारों कर्मचारी थे, सभी सुविधाएं थीं। बावजूद इसके उन्होंने सामान्य मानवी और गॉव-गरीब के साथ जुड़कर जीवन जिया, उनके लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने साबित किया कि जनप्रतिनिधि के लिए राजसत्ता नहीं, जनसेवा सबसे महत्वपूर्ण है। भाजपा की संस्थापकों में से एक रहीं। देशभर की समस्याओं के विषय में वे जानकार थीं। उन्होंने जीवन काल में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समाज सेवा से जुड़े अनेक संस्थानों की स्थापना कराई।
राजनीति के जीवंत इतिहास बन चुके पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था- कि भारत के सार्वजनिक जीवन में राजमाता का स्थान अतुलनीय है। ध्येय देवता के प्रति अविचल निष्ठा, कर्तव्य के पथ पर अविराम यात्रा, अपने विश्वासों के लिए राजमहल के सुखोपभोग को तिलांजलि देकर कारगार की यातना को सहर्ष स्वीकार करने की उनकी सिद्धता, समाज के हित के लिए परिवार के मोह और ममता से मुंह मोड़ लेने का उनका मनोधैर्य नयी पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक ही नहीं, भावी संतति के लिए अनुकरणीय भी सिद्ध होगा।
प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी भी “मन की बात“ में बहुत विस्तार से उनके स्नेह पर चर्चा कर चुके हैं।
स्वयं,राजमाता ने कहा था कि एक दिन ये शरीर यहीं रह जाएगा। आत्मा जहां से आई है वहीं चली जाएगी.... शून्य से शून्य में। स्मृतियां रह जाएंगी। अपनी इन स्मृतियों को मैं उनके लिए छोड़ जाऊंगी, जिनसे मेरा सरोकार रहा है, जिनकी मैं सरोकार रही हूं।
“आज राजमाता जी जहां भी हैं, हमें देख रही हैं, हमें अपना आशीर्वाद दे रही हैं। हम सभी लोग जिनका उनसे सरोकार रहा है, जिनकी वो सरोकार रहीं हैं। वे आज इस सुखद नजारे को देख बेहद प्रसन्न होगीं!
उनके पुत्र माधवराव सिंधिया ने भी सेवा के संकल्प को पूरा करते हुए अपना राजनीतिक जीवन जीया। उन्होंने हिंदवी स्वराज को आगे बढ़ाया। यही वजह रही कि लोग श्रीमंत माधवराव सिंधिया को लोगों का “महाराज“ कहना उचित समझते थे। क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन सार्वजनिक सेवा और राष्ट्रीय एकता के लिए अपने पूर्वजों महान मराठा राजश्री पाटिलबुवा महादजी सिंधिया के नक्शे कदम पर चलते हुए समर्पित कर दिया।
उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए शताब्दी एक्सप्रेस की सौगात दी। रेल को तरक्की की राह पर दौड़ा दिया। नागरिक उड्डयन मंत्री रहते हुए माधव राव ने घरेलू यात्रा के अनुभव की पारंपरिक मानसिकता को तोड़ने का जो संकल्प लिया उसे पूरा किया। उड्डयन के क्षेत्र में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मॉडल में इंडियन एयर लाइंस के लिए एक प्रमुख भूमिका की परिकल्पना की। जिसमें एयर टैक्सियों का एक छोटा स्लॉट था। हवाई यात्रा की लागत में कमी सिंधिया के दृष्टिकोण की पुष्टि करती है।
माधवराव सिंधिया की विरासत महान आदर्शों से प्रेरित थी। उनकी इस गौरवशाली विरासत को उनके पुत्र ज्योतिरादित्य बखूबी संभाल रहे हैं। यही वजह है कि आज फिर एक बार इतिहास दोहराया जा रहा है। अब इसे महज इत्तेफाक कहें या फिर इतिहास की पुनरावृति। क्योंकि 38 साल पहले सात सितंबर 1986 को माधवराव सिंधिया ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया टर्मिनल का शिलान्यास किया था। 27 सितंबर 1991 को संयोगवश नागरिक उड्डयन मंत्री रहते हुए स्वयं ही इस टर्मिनल का शुभारंभ भी किया। 31 साल बाद 2022 में जब इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के नवीन टर्मिनल का भूमिपूजन समारोह हुआ तो माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बतौर नागरिक उड्डयन मंत्री देश के गृहमंत्री अमित शाह के साथ मिलकर इसकी आधारशिला रखी। .... और आज महज 16 महीने की अवधि में निर्माण कार्य पूरा कराकर स्वयं ज्योतिरादित्य सिंधिया नये टर्मिनल का शुभारंभ कर रहे हैं। ऐसे में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं है कि आज फिर सिंधिया परिवार ने इतिहास दोहराकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। क्योंकि सिंधिया परिवार और पूरा ग्वालियर इस बात का साक्षी बन रहा है। हम आज राजमाता विजयराजे सिंधिया एवं माधवराव राव सिंधिया को पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें सच्चे मायने में विकास के रूप में पुष्पांजलि अर्पित कर रहे हैं।
साभार: डॉ केशव पांडे

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