राव यादवेंद्र सिंह भाजपा के पूर्व नेता स्वर्गीय देशराज सिंह यादव के बेटे हैं और वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं, उनकी पत्नी और एक भाई भी जिला पंचायत सदस्य हैं। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले ही राव यादवेंद्र सिंह ने भाई अजय यादव और मां बाईसाहब यादव के साथ भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। लेकिन एक माह पहले उनकी मां बाई साहब यादव और भाई अजय यादव फिर से भाजपा में लौट गए। लेकिन यादवेंद्र सिंह कांग्रेस से जुड़े रहे। आपको बता दें की राव परिवार से सिंधिया का पहले भी मुकाबला होता रहा हैं। और अब 22 साल बाद फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया का मुकाबला राव से होगा। इससे पहले साल 2002 के उपचुनाव में सिंधिया के सामने यादवेंद्र के पिता स्वर्गीय देशराज सिंह यादव चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उस चुनाव में देशराज सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। राव देशराज सिंह को पहले से ही सिंधिया परिवार का घुर विरोधी माना जाता है। गुना संसदीय क्षेत्र में भाजपा के कद्दावर नेता रहते हुए उन्होंने हमेशा सिंधिया परिवार का विरोध किया। भाजपा ने भी दो बार देशराज सिंह को चुनावी मैदान में उतारा। पहली बार 1999 में माधवराव सिंधिया के सामने चुनाव लड़ाया। 3 साल बाद माधवराव सिंधिया के निधन के बाद साल 2002 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी उपचुनाव में देशराज सिंह से ही मुकाबला करना पड़ा। हालांकि दोनों ही बार सिंधिया परिवार ने उन्हें हरा दिया। 22 साल बाद अब दूसरी बार ज्योतिरादित्य सिंधिया का राव परिवार से मुकाबला होगा। इस बार उनके सामने स्वर्गीय देशराज सिंह के बेटे यादवेंद्र सिंह चुनाव मैदान में रहेंगे।
इस तरह हुई हरजीत
राव देशराज सिंह को 1999 में पहली बार लोकसभा चुनाव में माधवराव सिंधिया ने हराया। सिंधिया को 443965 वोट मिले जबकि देशराज सिंह को 229537 वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार माधवराव सिंधिया ने देशराज सिंह को 214428 वोट से पराजित किया। बाद में साल 2002 के उपचुनाव में कुल 7 लाख 21 हजार 222 मतदाताओं में से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 5 लाख 35 हजार 728 वोट प्राप्त किए जबकि प्रतिद्वंदी राव देशराज सिंह को सिर्फ 1 लाख 29 हजार 160 वोट मिले। यानी दूसरी बार देशराज सिंह की 4 लाख 6 हजार 568 वोटों से हार हुई।
इस बार चुनौती मिलेगी ? शायद नहीं
लोगों की मानें तो बीते चुनाव में सिंधिया कांग्रेस में थे। करीब तीन चार जातीय समीकरण उनके विपरीत थे। ऊपर से मोदी मैजिक ने अंदर ही अंदर कमाल किया क्योंकि गुना लोकसभा के लगभग बूथों पर बीजेपी के कार्यकर्ता ही नजर नहीं आए थे बावजूद इसके केपी यादव की जीत हुई। लेकिन इस बार जब पीएम मोदी का जादू लोगों के सर परवान चढ़ा हुआ हैं हर वर्ग को बीजेपी ने लाभान्वित किया हैं साथ ही बीते पांच साल में पूरे लोकसभा में एक भी काम नहीं होने के चलते लोगों को सिंधिया के काम करने के सभी अंदाज याद आ गए हैं। जनता का कहना हैं की मोदी सरकार के प्रभावशाली व्यक्तित्व सिंधिया ही हैं जो पूरे इलाके को बड़ी योजनाएं लाकर दे सकते हैं। विकास कर सकते हैं। इसलिए जनता का भरोसा हैं की इस बार मोदी जी की आंधी में सिंधियां का खुद का वर्चस्व ऐतिहासिक विजय तय कर सकता हैं। यही कारण हैं की जनता भूल सुधार करना चाहती हैं।

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